पाकिस्तान सरकार ने कश्मीर तनाव पर ट्वीट की कठुआ रेप पीड़िता की तस्वीर

इमेज स्रोत, Twitter
- Author, फ़ैक्ट चेक टीम
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
पाकिस्तान सरकार ने 'कठुआ गैंग रेप और मर्डर केस' की पीड़ित बच्ची की तस्वीर इस्तेमाल कर ये अपील की है कि भारत प्रशासित कश्मीर में हो रहे नरसंहार को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय कुछ क़दम उठाये.
क़रीब 19 महीने पुरानी इस तस्वीर के साथ पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लिखा कि "अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत प्रशासित कश्मीर में कश्मीरियों के नरसंहार को रोकने के लिए क़दम उठाने चाहिए, जिन्हें उनके अधिकारों से वंचित कर दिया गया है और जो फ़ासीवादी भारत सरकार द्वारा लगाये गए अमानवीय कर्फ़्यू के कारण अब अपने घरों में फंसे हुए हैं. #KashmirHour."

इमेज स्रोत, Twitter
प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की अपील पर भारत प्रशासित कश्मीर के लोगों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए पाकिस्तान ने शुक्रवार, 30 अगस्त 2019 को दोपहर 12 से 12.30 बजे तक 'कश्मीर आवर' मनाया था.
इसी से जोड़ते हुए पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दोपहर तीन बजे कठुआ गैंग रेप की पीड़िता की यह तस्वीर ट्वीट की जिसके साथ भारत प्रशासित कश्मीर में चल रहे मौजूदा तनाव का ज़िक्र किया गया है.

इमेज स्रोत, Getty Images
मौजूदा तनाव से संबंध नहीं
रिवर्स इमेज सर्च से पता चलता है कि कठुआ गैंग रेप पीड़िता की यह तस्वीर फ़रवरी से अप्रैल 2018 के बीच कई वेबसाइट्स ने इस्तेमाल की थी. साथ ही सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने इसे पोस्ट किया था.
यू-ट्यूब पर भी पीड़िता के नाम से सर्च करने पर उनके शव के कई वीडियो हमें मिले जिन्हें अप्रैल 2018 में पोस्ट किया गया था.
इससे यह तो स्पष्ट हुआ कि ये तस्वीर भारत प्रशासित कश्मीर में तनाव की मौजूदा स्थिति से संबंधित नहीं है.
पर ये तस्वीर कठुआ गैंग रेप केस की पीड़िता की ही है, पीड़िता के वकील मुबीन फ़ारूक़ी ख़ान से बात करके हमने इसकी पुष्टि की.
कठुआ गैंग रेप केस
जम्मू-कश्मीर के कठुआ ज़िले में जनवरी 2018 में बकरवाल समुदाय से संबंध रखने वाली आठ साल की मासूम बच्ची के साथ गैंग रेप, प्रताड़ना और हत्या मामले में अदालत ने जून 2019 में छह दोषियों में से तीन को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.
इस सनसनीखेज़ गैंग रेप के बाद देश भर में ग़ुस्सा देखा गया था. पूर्व सरकारी अधिकारी सांजी राम को इस मामले का मास्टरमाइंड माना जा रहा था. पठानकोट की फ़ास्ट ट्रैक अदालत ने सांजी राम को भी उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.
सबूतों के अभाव में सांजी राम के बेटे को अदालत ने रिहा कर दिया था. इसके साथ ही दो पुलिस वालों को भी पाँच-पाँच साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई थी.

सांजी राम के अलावा परवेश कुमार, दो स्पेशल पुलिस अफ़सर दीपक कुमार और सुरेंदर वर्मा, हेड कॉन्स्टेबल तिलक राज और सब-इंस्पेक्टर आनंद दत्ता को इस मामले में दोषी ठहराया गया था. इन पुलिसकर्मियों को सबूतों को मिटाने में दोषी ठहराया गया था.
पठानकोट की फ़ास्ट ट्रैक अदालत के इस फ़ैसले के बाद पीड़िता की माँ ने मुख्य अभियुक्त सांझी राम को फांसी देने की मांग की थी.
निचली अदालत के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ जुलाई 2019 में कुछ आरोपियों ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में अपील दायर की थी जिसपर 11 सितंबर 2019 को सुनवाई होनी है.

(इस लिंक पर क्लिक करके भी आप हमसे जुड़ सकते हैं)
- पढ़ें फ़ैक्ट चेक की सभी कहानियाँ एक साथ - फ़ैक्ट चेक- जानें फ़र्ज़ी ख़बरों और दावों का सच
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)


















