कठुआ रेप केस: सज़ा, रिहाई और इंसाफ़ के सबक

- Author, मोहित कंधारी
- पदनाम, जम्मू से, बीबीसी हिंदी के लिए
कठुआ गैंग रेप और हत्या मामले की पीड़िता, बकरवाल समुदाय से संबंध रखने वाली आठ साल की मासूम बच्ची, को 15 महीने के लंबे इंतज़ार के बाद पठानकोट की अदालत में इंसाफ़ तो मिल गया लेकिन मंज़िल तक पहुंचने से पहले उनके वकीलों को एक लंबी क़ानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी.
पीड़िता को इंसाफ़ दिलाने के लिए वकीलों ने न सिर्फ बड़ी-बड़ी चुनौतियों का सामना डट के किया बल्कि मामले की सुनवाई के दौरान पैदा हुए राजनितिक हालात और उससे जुड़े तनाव को भी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया.
इस सनसनीखेज गैंग रेप और हत्या मामले के मास्टरमाइंड सांझी राम समेत तीन अभियुक्तों को अदालत ने उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है.
सबूतों के अभाव में सांझी राम के बेटे, विशाल जन्गोत्रा, को अदालत ने रिहा कर दिया जबकि तीन पुलिस कर्मियों को भी पाँच-पाँच साल की क़ैद की सज़ा सुनाई गई है.
पुलिसकर्मियों को सबूतों को मिटाने में दोषी ठहराया गया है.

विशाल जन्गोत्रा क्यूँ हुए बरी?
विशाल जन्गोत्रा को केस की सुनवाई कर रहे जज ने इस आधार पर रिहा किया है कि वो वारदात के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे.
अपना फैसला सुनाते समय जज ने साफ़-साफ़ शब्दों में कहा, "बचाव पक्ष ने विशाल को बेगुनाह साबित करने के लिए कोर्ट में जो सबूत पेश किये थे उससे ये साफ़ जाहिर होता है कि अपराध के समय वो कठुआ के रसना गाँव में माजूद ही नहीं थे इसलिए उन्हें इन सभी आरोपों से बरी किया जाता है. हैरानी की बात ये है कि आरोप पत्र में क्राइम ब्रांच ने विशाल को मुख्य अभियुक्त के रूप में पेश किया था लेकिन कोर्ट के सामने इतने लंबे अरसे में क्राइम ब्रांच की टीम ने एक भी ऐसा सबूत पेश नहीं किया जिससे वो अपनी बात ठोस तरीके से साबित कर सके."
घटना से पहले विशाल मुजफ्फरनगर के मीरापुर में रहकर आकांक्षा कॉलेज से बीएससी (कृषि विज्ञान) फर्स्ट ईयर की पढ़ाई कर रहे थे. नौ जनवरी से खतौली के केके जैन डिग्री कॉलेज में विशाल की परीक्षाएं चल रही थीं. उन्होंने बताया था कि वो वारदात के वक्त परीक्षा दे रहे थे.
इस मामले में क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने दावा किया था कि विशाल 11 जनवरी की शाम मीरापुर से जम्मू गए और वारदात को अंजाम दिया. खुद को बचाने के लिए उन्होंने अपनी जगह 12 जनवरी को किसी दूसरे युवक से परीक्षा दिला दी.
इसके अलावा और भी सबूत थे जिनसे अदालत ने ये माना कि विशाल जन्गोत्रा घटना के समय अपराध की जगह पर मौजूद नहीं थे.
पीड़िता के वकीलों की चुनौतियां
पीड़ित परिवार की तरफ से पंजाब के मलेरकोटला शेहर के रहने वाले वकील मुबीन फारूकी खान और उनकी टीम के सदस्यों ने मासूम बच्ची को इंसाफ़ दिलवाने के लिए दिन रात मेहनत की.
बीबीसी हिंदी से विशेष बातचीत में मुबीन फारूकी ने बताया, "जब से कठुआ रेप और हत्या का मामला प्रकाश में आया था इसको हर जगह धर्म के चश्मे से देखा जाने गया था."
उन्होंने कहा कि घटना के बाद बड़ी संख्या में सबूत मिटा दिए गए थे इसके चलते ये मामला बहुत पेचीदा बनता चला गया. इस के साथ ही पूरे देश में इस बात को लेकर भी बहस शुरू हो गई थी कि क्या मुजरिम और पीड़ित का धर्म देख कर उनको सज़ा दी जाएगी या इंसाफ़ की लड़ाई लड़ी जाएगी.
मुबीन फारूकी कहते हैं, "कठुआ मामले से जुड़ी सबसे बड़ी बात यह है की सभी धर्मों को मानने वालों ने एक साथ आकर इस बच्ची को इंसाफ़ दिलाने के लिए अपनी-अपनी जगह प्रयास किए और अपना योगदान दिया."
मुबीन फारूकी कहते हैं, "अगर आप वकीलों के नाम पर एक नज़र डालेंगे तो आप को हिंदू, मुस्लिम, सिख, और इसाई धर्म को मानने वाले लोगों के नाम नज़र में आएंगे. ये बात साबित करता है कि इस मासूम बच्ची को इंसाफ़ दिलाने में किसी ने भी अपनी पीठ नहीं दिखाई, सब एक साथ कंधे से कंधा मिला कर चले और अपनी मंजिल को हासिल कर सके."
कठुआ गैंग रेप के उतार चढ़ाव
पिछले साल अप्रैल महीने में मामले की जांच पूरी होने के बाद जब क्राइम ब्रांच की टीम कठुआ की अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने के लिए पहुंची थी उस समय कोर्ट परिसर में तनाव का माहौल पैदा किया गया और स्थानीय वकीलों द्वारा जांच अधिकारी को कोर्ट परिसर में दाखिल होने से जबरन रोका गया.
इसके बाद पूरे देश में मामले ने तूल पकड़ा और सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जम्मू और कश्मीर से बाहर पठानकोट ज़िला और सत्र न्यायालय में करवाने का आदेश जारी कर दिया. इसके बाद मामले की सुनवाई 31 मई, 2018 से लेकर 3 जून, 2019 तक लगातार पठानकोट की अदालत में चली.
अभियुक्तों के समर्थन में निकली तिरंगा यात्रा
गैंगरेप मामले में अभियुक्तों के समर्थन में तिरंगे हाथ में लेकर रैली निकालने जैसी घटना भारत में शायद पहली बार हुई होगी. पूरे देश में इस बात की कड़ी निंदा हुई और मामला तूल पकड़ता चला गया.
इसके अलावा, इस मामले ने जम्मू और कश्मीर के बीच पहले से बनी गहरी खाई और चौड़ी होती नज़र आई. जम्मू के कुछ लोग जहां अभियुक्तों के समर्थन में तिरंगा लेकर रैलियां निकाल रहे थे.
वहीं, भारत प्रशासित कश्मीर में पीड़ित बच्ची को इंसाफ़ दिलाने को लेकर आम लोगों और अलगाववादियों ने भी प्रदर्शन किए और महबूबा मुफ़्ती सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास किया ताकि दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके.
भाजपा के मंत्रियों का इस्तीफा?
रियासत की मुख्य मंत्री महबूबा मुफ़्ती ने जिस तरह बीजेपी के दो मंत्रियों चंद्र प्रकाश गंगा और लाल सिंह को इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर किया उससे उन्होंने कश्मीर घाटी में अपना सियासी कद ऊँचा करने का प्रयास किया था.
चूंकि इस मामले में जम्मू और कश्मीर दो हिस्सों में बंटा हुआ था ऐसे में महबूबा मुफ़्ती के लिए ये मुद्दा एक बड़ी चुनौती बन गया था. उन्होंने पहले दिन से इस मामले में कहा था कि वो पीड़ितों को न्याय दिलाएगी और किसी तरह की धांधली नहीं होने देंगी.
भाजपा के दोनों मंत्रियों ने कठुआ रेप केस में अभियुक्त के समर्थन में हिंदू एकता मंच के बैनर तले रैली निकाले जाने में एक अहम भूमिका अदा की थी. उन्होंने हिंदू एकता मंच की रैली में 1 मार्च, 2018 को भाग लिया था. इसमें उन्होंने संगठन की मांगों का समर्थन भी किया था.
हिंदू एकता मंच की मांग ये थी कि इस मामले की जांच सीबीआई के हवाले की जाए. लेकिन महबूबा मुफ़्ती ने उनकी मांग को सिरे से नकार दिया. इसके कुछ समय बाद ही भाजपा के शीर्ष नेतृतव ने जून 2018 में आनन् फानन में फैसला लेकर उनकी सरकार से समर्थन वापिस लेकर राज्य में चल रही गठबंधन सरकार से किनारा कर लिया.
तालिब हुसैन और दीपिका सिंह राजावत की भूमिका?
कठुआ गैंग रेप मामले में उस समय एक नया मोड़ आया जब पीड़िता के पिता ने महिला वकील दीपिका राजावत को केस से अलग कर दिया वहीँ दूसरी और सामाजिक कार्यकर्ता तालिब हुसैन पर बलात्कार जैसे संगीन आरोप लगे.
घटना के तुरंत बाद दीपिका सिंह राजावत ने पीड़िता को इंसाफ़ दिलाने की खातिर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. एक लंबे अरसे तक जब दीपिका ने पठानकोट की अदालत में हाजरी नहीं लगाई तो पीड़िता के पिता ने पठानकोट की ट्रायल अदालत में एक याचिका दायर कर दीपिका राजावत को केस से हटा दिया था.
पीड़िता के पिता ने अपनी याचिका में बताया कि दीपिका राजावत सिर्फ़ दो बार अदालत में हाज़िर हुई थी.
तालिब हुसैन कठुआ की घटना के बाद प्रदर्शनों के ज़रिए इस मुद्दे को उठाते रहे. तालिब हुसैन पर उनकी एक क़रीबी रिश्तेदार ने ये आरोप लगाया था कि हुसैन ने उनका बलात्कार किया. इस आरोप के बाद हुसैन क़रीब ढाई महीने तक जेल में रहे और फैसला आने से पहले ज़मानत पर रिहा हो गए थे. इस समय वो पीडीपी में शामिल हो कर पार्टी में काम कर रहे हैं.
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