सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, घाटी में खून की एक बूंद नहीं गिरी

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सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर मसले पर जल्द सुनवाई करने से भी इंकार किया है. उन्होंने हालात में सुधार की उम्मीद जताई है.
मंगलवार को तहसीन पूनावाला की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह हालात में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं और इसलिए सुनवाई को दो हफ्ते के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है.
जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने और घाटी में इंटरनेट मोबाइल सेवाएं बाधित होने के साथ-साथ लगातार कर्फ्यू जारी रहने पर तहसीन पूनावाला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

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समाचार एजेंसी एएनआई से मिली जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर को एक संवेदनशील मुद्दा बताया और कहा कि वह अभी कुछ दिन और इंतज़ार करना चाहते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि वह जम्मू कश्मीर पर लगी पाबंदियां कब तक जारी रखना चाहते हैं? इसके जवाब में अटर्नी जनरल ने कहा, ''हम रोज़ हालात का जायज़ा ले रहे हैं. अभी हालात बहुत ही संवेदनशील बने हुए हैं. वहां अभी तक खून की एक भी बूंद नहीं बही है, किसी की मौत नहीं हुई है.''
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बीते 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त कर दिया गया था. इसके अलावा जम्मू कश्मीर राज्य के दो हिस्सा कर दिए गए, जम्मू कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया.
संसद में अनुच्छेद 370 को हटाने का प्रस्ताव पेश करने से पहले पूरे जम्मू कश्मीर और लद्दाख में सुरक्षाबलों की तैनाती कर दी गई थी. सभी इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया था.
इसके साथ ही कई दिनों से भारत प्रशासित कश्मीर में संचार व्यवस्थाएं भी ठप कर दी गई हैं. पूरी घाटी में इंटरनेट, मोबाइल और लैंडलाइन सेवाएं बंद हैं.
केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला सहित कई नेताओं और अलगाववागी नेताओं को भी नज़रबंद किया है.
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