राजस्थानः किसान पर था दो-दो बैंकों का क़र्ज़

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- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
राजस्थान में क़र्ज़ माफ़ी का मुद्दा फिर सतह पर आ गया है. धान का कटोरा कहे जाने वाले श्रीगंगानगर ज़िले में एक किसान सोहन लाल कडेला ने मौत को गले लगा लिया था.
ख़ुदकशी से पहले उसने वीडियो बनाया था और एक नोट लिखा, जिसमें अपनी मौत के लिए क़र्ज़ माफ़ी पर कांग्रेस सरकार की वादा ख़िलाफ़ी को ज़िम्मेदार बताया.
बीजेपी ने कहा है कांग्रेस ने किसानों के साथ बड़ा धोखा किया है. मृतक के परिजन कहते हैं कि सोहन लाल कडेला क़र्ज़ को लेकर परेशान थे.
राज्य की लोक संस्कृति के जानकार कहते हैं कि 'इस मरुस्थली राज्य के किसानों में जीवटता की प्रवृति रही है, जो कुछ अब हो रहा है, वो नया है.'
सीमावर्ती श्रीगंगानगर ज़िले के एक गांव में सोहन लाल कडेला ने रविवार को ज़हर खाकर अपनी जान दे दी थी. इस घटना के बाद किसानों ने मंगलवार को वहां विरोध प्रदर्शन किया और पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग की.
इस घटना को लेकर उप मुख्य मंत्री सचिन पायलट ने मीडिया से कहा 'यह घटना बहुत दुखद है. लेकिन जो सीमित जानकारी मिली है, उसके मुताबिक़ क़र्ज़ जैसी कोई बात नहीं थी. अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी, पुलिस जाँच कर रही है.'
लेकिन उस क्षेत्र में किसान सभा के नेता श्योपत मेघवाल ने बीबीसी से कहा, "पहले बीजेपी ने और फिर अब कांग्रेस ने किसानों के साथ धोखा किया है."

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बैंक का क़र्ज़
कांग्रेस क़र्ज़ माफ़ी का वादा कर सत्ता में आई और फिर भूल गई. मेघवाल ने कहा 'उस किसान पर बैंक का क़र्ज़ था. वो अभावों से टूट गया था.'
पुलिस और अन्य सूत्रों के मुताबिक़, सोहन लाल पर दो बैंकों का ढाई लाख रुपये का क़र्ज़ था. इसमें एक लाख रुपये से कुछ अधिक सिंडिकेट बैंक का क़र्ज़ था.
बैंक की रायसिंहनगर शाखा के सहायक प्रबंधक लकी गर्ग के मुताबिक़, "बैंक ने न तो कोई नोटिस भेजा, न ही कोई तकाज़ा किया. यह कोई बड़ा क़र्ज़ भी नहीं था. इस इलाक़े के लिहाज़ से यह बहुत छोटा क़र्ज़ था. समझ में नहीं आता कि ऐसे क्यों हुआ."
मगर मृतक के भाई कृष्ण ने बीबीसी से कहा, "मेरा भाई क़र्ज़ से परेशान था. यह अभी पता नहीं है कि उस पर बैंक का कितना क़र्ज़ था. कुछ बाज़ार में भी लेनदेन होगा. वो आर्थिक रूप से परेशान था, बैंक वालों के फ़ोन आते थे."
वो कहते हैं, "मेरा भाई थोड़ा गुमसुम रहने लगा था. कभी सोता रहता था. किसी को कुछ बताता नहीं था."
सोहन लाल ने अपनी मौत से पहले एक नोट लिखा, जिसमें अपनी मौत के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को ज़िम्मेदार ठहराया था.
पुलिस के मुताबिक़, 'यह अभी जाँच की जा रही है कि यह नोट में लिखी इबारत उसके हाथों की थी या किसी और की है.'

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क़र्ज़ माफ़ी का वादा
मृतक सोहन लाल छोटा किसान था, परिजनों के मुताबिक़, उसके पास छह बीघा ज़मीन थी. वो भी बिना कोई ठीक सिंचाई व्यवस्था के. ऐसी ज़मीन को बारानी कहते हैं. उसके घर में पत्नी है, एक बेटा और एक बेटी है.
पुलिस अधीक्षक हेमंत शर्मा कहते हैं, "इसमें सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जाँच की जा रही है. इसके पहले वर्ष 2018 में सोहन लाल किसी मुद्दे को लेकर पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ गया था. इसके लिए उसके विरुद्ध मुक़दमा भी दर्ज हुआ था."
पुलिस के अनुसार, मृतक खेती के आलावा दुकान भी करता था. कुछ और बाते भी हैं, जिनकी पुष्टि होना अभी बाक़ी है.
पिछले विधानसभा चुनावों में क़र्ज़ माफ़ी एक बड़ा मुद्दा था. उस वक्त बीजेपी सत्तारूढ़ थी. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने अपनी चुनावी सभाओं में मतदाताओं को कॉग्रेस के सत्तारूढ़ होने पर 10 दिन में सम्पूर्ण क़र्ज़ माफ़ी की बात कही थी. वे जालौर की सभा में भीड़ से मुख़ातिब होकर दस दिन में क़र्ज़ माफ़ी का वायदा किया था.
पर कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कुछ क़र्ज़ माफ़ हुए, लेकिन राष्ट्रीयकृत और प्राइवेट बैंकों के क़र्ज़ का मसला हल नहीं हुआ है.
बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष और विधायक सतीश पूनिया कहते हैं, "कांग्रेस ने किसानों के साथ छलावा किया है. इसे चुनाव में एक लोकलुभावन नारे के रूप में इस्तेमाल किया. पहले सम्पूर्ण क़र्ज़ की बात की और फिर सम्पूर्ण शब्द को धीरे से हटा दिया."

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18,000 करोड़ की क़र्ज़ माफ़ी का दावा
वो कहते हैं, "राजस्थान में कोई 59 लाख किसान किसी न किसी बैंक के क़र्ज़दार हैं. इसमें राष्ट्रीयकृत और निजी बैंक भी शामिल हैं. सरकार इसमें से कुछ क़र्ज़ माफ़ कर दिए. बाक़ी के लिए कुछ बहाने ढूंढे जा रहे हैं. सरकार की इस हरकत से किसानों का मनोबल गिरा है, निराशा का माहौल बना है. यह ठीक नहीं है, क्योंकि यही माहौल किसी को जीवन से पलायन की तरफ़ ले जाता है."
इससे पहले पिछले माह जब क़र्ज़ माफ़ी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में आरोप प्रत्यारोप की जंग सी छिड़ गई.
राज्य के जनसम्पर्क मंत्री रघु शर्मा ने बीबीसी से कहा, "सरकार ने सहकारी क्षेत्र में दो लाख तक के क़र्ज़ माफ़ कर दिए हैं. यह 18 हज़ार करोड़ रुपये होते हैं. बाक़ी बैंकों में भी दो लाख तक के क़र्ज़ माफ़ किए जाएंगे. बीजेपी की शब्दावली में तो किसान शब्द होता ही नहीं है."
शर्मा कहते हैं, "पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार ने 50 हज़ार तक के क़र्ज़ माफ़ी की बात की और महज़ दो हज़ार करोड़ तक के क़र्ज़ माफ़ किए. बीजेपी अब किस मुँह से बात कह रही है."
भारत के इस मरुस्थली भू भाग में सदियों तक खेती मानसून पर निर्भर रही है और कहावत है 'तीजो कुरियो आठवो अकाल' यानी हर तीन साल में अर्ध अकाल और आठ साल में पूरा अकाल.
मगर कभी सूखे और अभावों में किसान को टूटते नहीं देखा गया.

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किसानों को घाटा
राज्य की लोक संस्कृति के जानकार डॉ आईदान सिंह भाटी कहते हैं, "मरुस्थल के लोगों में धैर्य और पुरुषार्थ का भाव कूट कूट कर भरा है. वे हालात का मुक़ाबला करते हैं, लेकिन हार नहीं मानते. अब जब सिंचाई है, परिवहन है, बिजली है और साधन है, तब ऐसी घटनाएं हो रही हैं. यह राजस्थान के लिए नई बात है और हमे चिंतित होना चाहिए."
गंगानगर में सिंचाई का अच्छा तंत्र है और लोग खेती किसानी में माहिर हैं. किसान नेता श्योपत मेघवाल कहते हैं, "जब किसान को उसकी लागत का मोल नहीं मिलेगा, वो निराश हो जाएगा. हमारे क्षेत्र में सरसों पैदा करने वाले किसान को प्रति बीघा पांच हज़ार रुपये का घाटा उठाना पड़ा है."
मेघवाल कहते हैं, "यह सिंचित क्षेत्र है मगर किसान को सिंचाई के लिए निर्धारित पानी नहीं मिलता. हमारा पानी बह कर सरहद के उस पार पाकिस्तान जा रहा है."
"कोई किसान क़र्ज़ के बोझ से दबा है और क़िल्लत से जूझ रहा है, कहीं कोई भूमिहीन मज़दूर मुफ़लिसी से लड़ रहा है. इसके बरक्स सियासी पार्टियां है जो आपस में लड़ रही हैं. ऐसे में किसान का मुद्दा पीछे छूट जाता है."
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