अलीगढ़ से ग्राउंड रिपोर्ट: बच्ची की हत्या से सदमे में टप्पल

- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, टप्पल, अलीगढ़
दिल्ली से करीब 100 किलोमीटर दूर अलीगढ़ ज़िले की टप्पल तहसील के लोगों में बेहद गुस्सा है.
यहां लोगों को आश्चर्य है कि कोई भी व्यक्ति कैसे एक ढाई साल की बच्ची को किडनैप करके, उसके शरीर के टुकड़े करके, उस पर एसिड डालकर उसकी हत्या कर सकता है - और वो भी कथित तौर पर चंद हज़ार रुपए के उधार के लिए.
पायल (बदला हुआ नाम) 30 मई से लापता थी. रिश्तेदारों से घिरी उसकी मां ने बताया, "वो सुबह घर के बाहर खेल रही थी और चंद ही मिनट बाद हमने पाया कि वो यहां नहीं है."
उनका सिर साड़ी के पल्लू से ढंका था. वो आंगन में बैठी हुई थीं और उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे. चेहरे पर सूखे आंसू के निशान थे.
परिवार, दोस्तों, रिश्तेदारों ने टप्पल और आस-पास के गांवों में हर जगह पायल को ढूंढा लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला.
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पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया लेकिन पायल की तलाश बंद नहीं हुई.
टप्पल में हर किसी को पता था कि एक परिवार की छोटी सी, नटखट ढाई साल की बेटी घर से गायब है.
कुत्ते घसीट रहे थे शव
30 मई को बच्ची लापता हुई थी. दो जून सुबह सात बजे छाया (बदला हुआ नाम) लोगों के घरों से कूड़ा उठाकर सिर पर लादकर निकल ही रही थीं कि उन्हें लगा कि तीन कुत्ते सड़क के पास कूड़े के ढेर में एक बच्चे के शरीर को खींच कर ले जा रहे हैं.
ये कूड़े का का बड़ा ढेर पायल के घर से मात्र 200 मीटर की दूरी पर है.

टप्पल की वाल्मीकि बस्ती में रहने वाली छाया ने अपने घर में मुझे बताया, "मैं ज़ोर से चिल्लाई कि ये किसी बच्चे का शरीर है और मिनटों में पूरा गांव वहां इकट्ठा हो गया."
जिस किसी ने भी नन्ही पायल को इस हाल में देखा, वो रो पड़ा.
पायल की एक आंटी ने बताया, "उसके शव की दुर्दशा थी और उस पर एसिड डाला गया था. मैं तो उसकी ओर देख भी नहीं पा रही थी."
"उसे पहचानना संभव नहीं था. उसने पीली रंग की अंडरपैंट्स पहन रखी थी. हम उससे उसे पहचान पाए."

बलात्कार की पुष्टि नहीं
पायल की आंटी और दादी को स्थानीय महिलाओं, रिश्तेदारों ने घेर रखा था और उन्हें दिलासा दे रही थीं.
नीचे ज़मीन पर बैठी, दीवार पर सिर टिकाए पायल की दादी का बुरा हाल था और रोते-रोते ही उनके मुंह से कुछ शब्द फूट रहे थे.
"वो बहुत शैतान थी. बहुत धीरे से बोलती थी. लेकिन बहुत ज़्यादा बोलती थी. कहती थी, बाबा मुझे चाय दे दो, बाबा मुझे बिस्किट दे दो. वो पांच साल की तपस्या का फल थी."
वर्षा (बदला हुआ नाम) और मुकेश (बदला हुआ नाम) की बेटी पायल बड़ी मन्नतों और डॉक्टरों के इलाज के बाद पैदा हुई थी.
पायल के पैदा होने के चंद महीने बाद ही वर्षा उसके भाई को दुनिया में ला पातीं कि पेट में ही उसकी मृत्यु हो गई.
घर के बाहर एक टेंट के नीचे बैठे लोग बेहद नाराज़ थे. ढाई साल की बच्ची के साथ कोई ऐसा कैसे कर सकता है, एक ने कहा.
पायल के दादा ने दोषियों को फांसी पर चढ़ाने की मांग की है. टप्पल में हमने जितने लोगों से बात की, सब सकते में थे.
बच्ची का नाम सोशल मीडिया पर हैशटैग के ज़रिये उजागर कर विवादों में आई अलीगढ़ पुलिस का कहना है कि अभी तक बच्ची के बलात्कार की पुष्टि नहीं हो पाई है.

कर्ज़ का मामला
अलीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मणिलाल पाटीदार ने कहा कि ऐसा लगता है कि विवाद पैसे लौटाने को लेकर था लेकिन जांच जारी है.
पुलिस ने दो व्यक्तियों ज़ाहिद और असलम को गिरफ्तार किया है और उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाने की तैयारी में है.
मणिलाल पाटीदार ने कहा, "ये ऐसा मामला है जहां लोगों के मन में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हुई है. हमने कानून लगाने के लिए दस्तावेज़ों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया है और उन्हें मंज़ूरी के लिए हम प्रशासन के पास भेजेंगे."
गिरफ़्तार किए गए दोनों व्यक्ति पायल के घर के नज़दीक ही रहते थे. पायल का शव जिस कूड़े के ढेर में मिला वो उनके घर के ठीक सामने है.
जब हम ज़ाहिद के घर पहुंचे तो घर खाली पड़ा था, दरवाज़ों पर ताले लगे थे. ज़ाहिद के घर में कपड़े ज़मीन पर बिखरे पड़े थे, किचन में आटा बिखरा पड़ा था. असलम का घर भी बंद था.
पड़ोसियों ने बताया कि ज़ाहिद की उम्र 28-29 साल है और उसके दो-तीन बच्चे है जबकि असलम की उम्र 40 के करीब बताई जाती है और उसके चार बच्चे हैं.

इलाके में तनाव
जाट बहुल बताए जाने वाले इस इलाके में मुसलमान कम संख्या में हैं.
ज़ाहिद के घर के पास में ही रहने वाले रहीस खान टप्पल के बाहर काम करते हैं और ईद के लिए घर लौटे थे.
वो कहते हैं, "चाहे हिंदू हो या मुसलमान, किसी के बच्चे के साथ ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए."
कुछ लोगों में बदले की कार्रवाई का डर है. शायद इसलिए इलाके में चारों ओर पुलिस का भारी जमावड़ा है.
मामले की जांच जारी है लेकिन दावा किया जा रहा है कि घटना का कारण पायल के दादा का ज़ाहिद को दिया गया कर्ज़ है.

आरोपी ने दी थी धमकी
परिवार के एक नज़दीकी ने बताया, "करीब पांच साल पहले, पायल के दादा ने ज़ाहिद को 50,000 रुपए दिए थे लेकिन उसने पूरे पैसे नहीं लौटाए."
पायल के परिवार में उसके दादा के अलावा किसी को भी पैसे के इस लेनदेन के बारे में नहीं पता था.
"पैसा मांगने पर ज़ाहिद ने कुछ दिन पहले नतीजों की धमकी दी थी. जब परिवार को ज़ाहिद के घर के सामने बच्ची का शव मिला तो वो वहां से भागने लगा."
घर के बाहर गर्मी में टेंट के नीचे बैठे पायल के दादा अब उस कर्ज़ का नाम लेते ही चिड़चिड़े हो जाते हैं.
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