शिमला: चलती कार में 'रेप' की जांच के लिए SIT

इमेज स्रोत, AFP
शिमला में 19 वर्षीय लड़की से चलती कार में बलात्कार मामले की जांच के लिए एक आठ सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है.
इस एसआईटी अगुवाई एएसपी (सिटी) शिमला परवीर ठाकुर करेंगे.
स्थानीय पत्रकार अश्वनी शर्मा ने बताया, "अब तक मिली जानकारी के मुताबिक कुछ लोग लड़की का पीछा कर रहे थे. इसकी मौखिक सूचना उसने लक्कड़ बाज़ार पुलिस चौकी में दी थी. लेकिन बताया जाता है कि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे ढली थाने पर जाने को कहा. लेकिन थाने पहुंचने से पहले ही लड़की को अगवा कर लिया गया."
अश्वनी शर्मा ने बताया कि प्रदेश के गृह सचिव ने मजिस्ट्रेट जांच के भी आदेश दिए हैं. इसमें पुलिसकर्मियों की कथित लापरवाही की भी जांच की जाएगी.

रविवार की है घटना
समाचार एजेंसी पीटीआई ने डीएसपी प्रमोद शुक्ला के हवाले से ख़बर दी कि लड़की ने गुड़िया हेल्पलाइन (1515) के ज़रिये शिकायत की थी. उनका आरोप है कि रविवार रात 10 बजे के क़रीब चलती कार में उनसे एक शख़्स ने बलात्कार किया.
बयान में कहा गया है कि यह घटना तब हुई जब लड़की मॉल रोड से पैदल आ रही थी. जहां यह घटना हुई बताई जा रही है वह ढली पुलिस थाने के अंतर्गत आता है.
शिकायत के मुताबिक, इस दौरान एक कार लड़की के पास आकर रुकी और उसे भीतर खींच लिया गया. इसके बाद चलती कार में उनसे बलात्कार किया गया.

इमेज स्रोत, Thinkstock
इस मामले में सोमवार को ढली पुलिस थाने में एफ़आईआर दर्ज कर ली गई थी. लेकिन अब तक किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है.
इस संबंध में कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत के ज़रिए राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
संयोग की बात यह है कि पीड़ित लड़की ने जिस गुड़िया हेल्पलाइन के ज़रिये पुलिस से मदद मांगी, वह साल 2017 में शिमला के ही कोटखाई में एक नाबालिग छात्रा से बलात्कार और हत्या की बहुचर्चित घटना के बाद शुरू की गई थी.
उस समय भी पुलिस पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगे थे.
बाद में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था और सीबीआई ने पाया था कि जांच करने वाली एसआईटी के अधिकारियों ने न सिर्फ़ लीपा-पोती की थी, बल्कि हिरासत में लिए गए संदिग्ध की मौत के पीछे भी उनका ही हाथ था.
इस मामले में एसआईटी प्रमुख समेत कई वरिष्ठ अधिकारी जेल में रहे और हाल ही में उन्हें ज़मानत मिली है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












