मध्य प्रदेश: गोहत्या पर कमलनाथ की सरकार ने लगाया रासुका

रासुका, एमपी
इमेज कैप्शन, गौ हत्या मामले में अभियुक्त नदीम और शकील
    • Author, शुरैह नियाज़ी
    • पदनाम, भोपाल से, बीबीसी हिंदी के लिए

मध्य प्रदेश में काग्रेंस के सत्ता संभालने के बाद पहली बार तीन लोगों के ख़िलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की गई है.

यह कार्रवाई खंडवा में गोहत्या के आरोप में की गई है.

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक़ ये घटना खंडवा जिले के खरखली गांव के पास की है. पुलिस का दावा है कि जब टीम घटनास्थल पर पहुंची तो सभी अभियुक्त वहां से भाग निकले.

अब पुलिस ने सभी तीनों अभियुक्तों नदीम, शकील और आज़म को गिरफ्तार कर लिया है.

नदीम और शकील दोनों भाई हैं और तीसरा अभियुक्त आज़म खरखली गांव का ही रहने वाला है.

पुलिस का कहना है कि जब वे घटनास्थल पर पहुंचे तो उन्हें वहां पर गाय के कटे अवशेष मिले.

पुलिस ने बताया, ''नदीम उर्फ़ राजू पर पहले भी गो हत्या का मामला दर्ज हो चुका है. हमने इन लोगों पर मोघट रोड पुलिस स्टेशन में गोहत्या निषेध अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस अधीक्षक की सिफ़ारिश पर इन लोगों पर ज़िला कलेक्टर ने रासुका लगाया है.''

रासुका, एमपी

खंडवा के एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा ने बताया, "यह मामला तीन दिन पुराना है. हमें सूचना मिली थी कि मोघट थाने के अंतर्गत गाय को काटा जा रहा है जिसमें तीन लोग शामिल हैं. इसके बाद पुलिस टीम वहां पर पहुंची और सूचना को सही पाया गया. वहां से तीन अभियुक्त भागने में कामयाब रहे. इसके बाद कारवाई करते हुए उन पर मामला दर्ज किया गया."

उन्होंने बताया कि पुलिस ने तीनों को गिरफ़्तार कर लिया है और उन पर रासुका की कारवाई की गई है.

इस मामलें में रासुका के तहत कारवाई करने को एसपी ने सही ठहराया है. उन्होंने कहा कि यह मामला काफ़ी संवेदनशील है और इससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है इसलिये यह कारवाई की गई है.

वहीं स्थानीय लोग और अभियुक्तों के वक़ील का मानना है कि यह पूरा मामला आपसी रंजिश का है.

अभियुक्तों के वक़ील नफ़ीस क़ुरैशी का कहना है, "शकील और नदीम खंडवा के निवासी हैं. जिन्हें ग़लत तरीक़े से खरखली गांव का निवासी बता कर फंसाया जा रहा है. ये आपसी रंजिश का मामला है. इस घटना से इनका कोई लेना देना नही है."

मध्य प्रदेश का खंडवा जिला काफ़ी संवेदनशील माना जाता रहा है. सरकार दावा करती है कि इस क्षेत्र में सिमी के कार्यक्रता काफ़ी सक्रिय हैं. भोपाल में सिमी के लोगों से कथित मुठभेड़ का मामला भी यहीं हुआ था.

हालांकि इस घटना पर स्थानीय लोगों का दावा है कि पुलिस के मुख़बिरों ने इस पूरे मामलें को अंजाम दिया ताकि इन लोगों को फंसाया जा सके.

नाम नहीं बताने की शर्त पर स्थानीय लोगों ने कहा, '' इन दो लोगों के ख़िलाफ़ पहले कोई भी अपराध दर्ज नही है.''

जब बीबीसी ने अभियुक्तों के परिवार से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने इस मामलें में बात करने से इनकार कर दिया.

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