उत्तर प्रदेशः क्या है बच्चों के मैदान पर गोशाला बनाने का मामला

क़ादिर ख़ान

इमेज स्रोत, Qadir Khan

इमेज कैप्शन, फ़ज़ल-ए-रहमानिया इंटर कॉलेज के छात्र क़ादिर ख़ान प्रदेश स्तर पर वॉलीबॉल खेल चुके हैं
    • Author, टीम बीबीसी हिन्दी
    • पदनाम, दिल्ली

राज्य स्तर पर वॉलीबॉल खेल चुके क़ादिर ख़ान रोज़ाना अपने स्कूल के मैदान में अभ्यास करते हैं.

उनका सपना एक दिन देश की राष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम में जगह बनाना है. अब उनका ये सपना अधूरा रह सकता है क्योंकि यूपी सरकार उनके स्कूल के मैदान में गोशाला बनाना चाहती है.

उत्तर प्रदेश में बलरामपुर ज़िले की तुलसीपुर तहसील के फ़ज़ल-ए-रहमानिया स्कूल के बच्चों के खेल के मैदान में गोशाला बनाने के प्रस्ताव पर अब विवाद हो गया है.

स्कूली बच्चों ने अपने खेलने के हक़ को लेकर प्रदर्शन किया है जबकि प्रशासन का कहना है कि जिस ज़मीन को गोशाला बनाने के लिए चयनित किया गया है वो सरकारी है.

मैदान में गोशाला बनने के बारे में क़ादिर ख़ान कहते हैं, "सिर्फ़ मैं ही नहीं और भी बच्चे इस मैदान में अभ्यास करते हैं. अगर यहां गोशाला बन गई तो हमारा खेलना बंद हो जाएगा. सब कुछ रुक जाएगा."

क़ादिर ख़ान और उनकी टीम

इमेज स्रोत, Qadir Khan

इमेज कैप्शन, क़ादिर का कहना है कि अगर उनके मैदान में गोशाला बनी तो उनका खेल का सफ़र रुक जाएगा

बलरामपुर के ज़िलाधिकारी कृष्णा करुणेश से जब इस विषय में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "जिस ज़मीन को गोशाला बनाने के लिए चयनित किया गया है, वह सरकारी है. सरकार जैसे चाहे अपनी ज़मीन का इस्तेमाल कर सकती है."

फ़ज़ल-ए-रहमानिया इंटर कॉलेज एक अल्पसंख्यक स्कूल है, जिसे सरकार से मदद मिलती है. स्कूल की प्रबंध समिति से जुड़े शारिक़ रिज़वी कहते हैं, "सरकार जिस ज़मीन पर गोशाला बना रही है वह स्कूल प्रशासन को 1977 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने दी थी और इससे जुड़े दस्तावेज़ हमारे पास हैं."

वो कहते हैं, "अगर यहां गोशाला बन गई तो बच्चे के पास खेलने का मैदान नहीं रहेगा. हम सरकार के इस क़दम को अदालत में भी चुनौती देंगे. हमने फिलहाल प्रशासन से फिर से विचार करने की गुज़ारिश की है."

इस आरोप पर ज़िलाधिकारी कहते हैं, "ये सरकारी ज़मीन है जिसे हमने गोशाला के लिए चयनित किया है. यहां फ़ायर स्टेशन भी प्रस्तावित है. स्कूल प्रशासन चाहता है कि ये ज़मीन उनको मिल जाए लेकिन किसी भी शासनादेश के तहत ये हम उन्हें नहीं दे सकते हैं."

इंटर कॉलेज

इमेज स्रोत, Qadir Khan

इमेज कैप्शन, फ़ज़ल-ए-रहमानिया इंटर कालेज एक अल्पसंख्यक संस्थान है

उन्होंने कहा, "हमारे ज़िले में अधिकतर इंटर कॉलेज सरकारी या सार्वजनिक भूमि के निकट बने हैं. ये इंटर कॉलेज भी सरकारी ज़मीन के पास है और स्कूल प्रशासन ने ज़मीन को घेरकर स्कूल में मिलाने की कोशिश भी की है. स्कूल के पास अपना अलग से खेल का मैदान है."

गोशाला खुलने से बच्चे के स्वास्थ्य और आसपास की स्वच्छता पर असर होने के सवाल पर ज़िलाधिकारी कहते हैं, "ये क़रीब एक एकड़ ज़मीन है. इसमें चरने का मैदान भी विकसित किया जाएगा और इसकी चारदिवारी करायी जाएगी. जानवर बाहर नहीं जाएंगे."

जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रशासन की प्राथमिकता स्कूल बच्चें से पहले गाय है तो उन्होंने कहा, "सवाल बच्चे के मैदान का नहीं है बल्कि स्कूल प्रशासन सरकारी ज़मीन स्कूल में मिलाना चाहता है."

ये भी पढ़ें-

प्रदर्शन करते बच्चे

इमेज स्रोत, Zakir Hussain

इमेज कैप्शन, स्कूल के बच्चों ने अपने मैदान को बचाने के लिए प्रदर्शन भी किया है

उन्होंने कहा, "हमारी प्राथमिकता बच्चे ही हैं. अगर बच्चों के स्कूल का मैदान है तो हम वहां पर कोई दख़ल नहीं देंगे और पीछे हट जाएंगे. अगर आसपास बच्चे के पास खेलने के लिए और कोई सुरक्षित ज़मीन नहीं है तो हम पुनर्विचार करेंगे. मैंने स्थानीय एसडीएम से सभी तथ्यों का पता लगाने के लिए कहा है."

ये स्कूल नगर पंचायत पचपेड़वा के पास स्थित है और यहां गोशाला इसी नगर पंचायत के लिए बननी है. ज़मीन पर विवाद होने और बच्चों के प्रदर्शन के बाद अब नगर पंचायत ने भी यहां गोशाला न बनाने का प्रस्ताव पास करते हुए प्रशासन से कहीं और ज़मीन उपलब्ध करवाने की अपील की है.

नगर पंचायत चेयरमैन समन मलिक के पति मंज़ूर ख़ान ने बीबीसी से कहा, "हम नहीं चाहते कि बच्चों के खेलने के मैदान को लेकर गोशाला बनायी जाए. इससे लोगों में भी रोष फैल रहा है और बच्चों को भी दिक़्क़तें होंगी. हमने एक प्रस्ताव पास कर ज़िला प्रशासन से ज़मीन कहीं और आवंटित करने की अपील की है."

मैदान में खेलते बच्चे

इमेज स्रोत, Zakir Hussain

इमेज कैप्शन, स्कूल प्रशासन का कहना है कि यदि मैदान में गोशाला बनी तो बच्चे के खेलने के लिए ज़मीन नहीं रहेगी

वहीं शारिक रिज़वी का कहना है कि उनके पास इस ज़मीन के मालिकाना हक़ से जुड़े दस्तावेज़ भी हैं. इस पर ज़िलाधिकारी का कहना है कि अगर दस्तावेज़ हैं तो इसकी भी जांच करायी जाएगी.

दूसरी ओर स्कूली बच्चे अपना मैदान बचाने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं. क़ादिर ख़ान सोमवार को भी प्रदर्शन में शामिल हुए. वो कहते हैं, "एक तरफ़ तो सरकार कहती है कि बच्चे ही देश का भविष्य हैं और दूसरी तरफ़ गायों के लिए बच्चों का मैदान छीन रही है. कथनी और करनी में इतना फ़र्क़ क्यों हैं?"

उन्होंने कहा, "हमारे पास पहले से ही बहुत कम सुविधाएं हैं, इसके बावजूद भी हम मेहनत करके अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर हमसे मैदान छीन लिया गया तो हमारे सभी रास्ते बंद हो जाएंगे."

उन्होंने कहा, "अभी कुछ दिन पहले स्थानीय विधायक ने एक रैली में कहा था कि अगर कोई बच्चा खेल में आगे है तो उसे खेलने दिया जाए और उस पर कोई दबाव न बनाया जाए. एक और तो वो खेल को बढ़ावा देने की बात करते हैं और दूसरी ओर हमें बर्बाद कर रहे हैं, ऐसा क्यों हैं? "

स्थानीय नगर पंचायत का पत्र

इमेज स्रोत, Manzoor Khan

इमेज कैप्शन, नगर पंचायत की ओर से भी प्रशासन से मैदान में गौशाला न बनाने की अपील की गई है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालने के बाद प्रदेश में अवैध बूचड़खाने बंद कर दिए थे और प्रशासन को गोहत्या को सख़्ती से रोकने के लिए क़दम उठाने के लिए कहा था. इसका असर गायों और गोवंशीय पशुओं की बिक्री पर भी हुआ है.

किसानों के बैलों और गायों को खुला छोड़ देने की वजह से आवारा पशुओं की संख्या बढ़ी है और अब ये गायें किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई हैं. प्रदेश के कई ज़िलों में आवारा गायों से परेशान किसानों ने उन्हें स्कूलों में भी बंद किया है.

किसानों की परेशानी को देखते हुए सरकार ने हर पंचायत स्तर पर गोशाला बनाने के लिए कहा है. इन गोशालाओं के लिए ज़मीन खोजना भी प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)