'राजपूत' कंगना जो ज़बान से चलाती हैं तलवार

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- Author, नवीन नेगी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
साल 2009- ''फ़िल्म इंडस्ट्री में काम करने वाली लड़कियां ख़ुद को सिर्फ़ सेक्स ऑब्जेक्ट के तौर पर पेश करती हैं, उन्हें एक्टिंग से ज़्यादा अपने लुक्स की चिंता रहती है.''
साल 2019- चार इतिहासकारों ने मणिकर्णिका को पास किया है. अगर करणी सेना ने मेरी फ़िल्म का विरोध किया, तो मैं भी राजपूत हूं, उन्हें बर्बाद कर दूंगी.''
सोशल मीडिया पर 10 YEAR CHALLENGE के लिहाज़ से अगर ऊपर दिए गए दो बयानों के मायने तलाशे जाएं तो कहा जा सकता है कि बीते दस सालों में जिस ज़बान से यह शब्द निकले हैं उसकी धार लगातार तेज़ हुई है.
इस तेज़ धारी तलवार रूपी ज़बान की मल्लिका हैं कंगना रनौत, जिनकी ज़बान की धार से फ़िल्म इंडस्ट्री के बड़े से बड़े अभिनेता और निर्देशक घायल हो चुके हैं.
ये वही कंगना हैं जिन्हें हम उनकी फ़िल्मों के लिहाज़ से कभी रानी कभी तनु कभी सिमरन पुकारते हैं और सिनेमाघरों में भरपूर तालियां और सीटियां बजाते हैं.
इन तमाम तालियों और सीटियों के शोर के बाद भी कंगना का ज़बानी शोर कम नहीं होता. वो बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद पर खुलकर बोलती हैं तो वहीं रिश्तों में आई तकरार पर भी सामने वाले को जमकर कोसती हैं.
करियर के जिस दौर में अभिनेत्रियां अपने लिए गॉडफ़ादर की तलाश कर रही होती हैं ठीक उसी वक़्त कंगना बॉलीवुड में किसी बाग़ी के तौर पर ख़ुद को पेश करती हैं.
वे फ़िल्मी दुनिया की रंगीन लेकिन तंग गलियों में लिखी जाने वाली स्क्रिप्ट में अपनी दख़ल चाहती हैं, अपने डायलॉग चुनती हैं और निर्देशन में भी हाथ आज़माती हैं.
लेकिन फ़िल्मी दुनिया की इन रंगीन ज़िंदगी से पहले आइए सैर करते हैं पहाड़ों की वादियों की.

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पहाड़ी लड़की जिसके जन्म पर हुआ मातम
हिमाचल के मंडी ज़िले में 23 मार्च 1987 को अमरदीप रनौत और आशा रनौत के घर एक लड़की का जन्म हुआ, लेकिन घर में ख़ुशियों की जगह मातम ने ले ली. इसकी वजह थी कि इस घर में पहले से एक लड़की थी. परिवार चाहता था कि अब घर में लड़के का जन्म हो.
घरों में लड़के और लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव पर कंगना ने कई मौक़ों पर अपने ही घर का उदाहरण दिया. उन्होंने खुलकर बताया कि जन्म के बाद उनके घर में मातम जैसा माहौल था. उन्होंने बताया कि जब कभी घर में कोई मेहमान आता तो उनका परिवार हमेशा यह कहानी बताता कि कैसे कंगना एक 'अनवॉन्टेड बच्ची' है.
'अनवॉन्टेड बच्ची' यानी परिवार जिसका जन्म नहीं चाहता था, फिर भी वह परिवार में आ गई. शायद यही वजह थी कि यह अनवॉन्टेड कंगना धीरे-धीरे विरोधी स्वभाव की होने लगी.
हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कंगना ने अपने बचपन के बारे में बताया, ''मैं बचपन से ही ज़िद्दी और विरोधी स्वभाव की रही हूं. अगर मेरे पापा मेरे लिए गुड़िया लाते और भाई के लिए प्लास्टिक की बंदूक़ तो मैं गुड़िया लेने से इंकार कर देती थी. मुझे भेदभाव पसंद नहीं था.''
कंगना हिमाचल से निकलकर पहले चंडीगढ़ पहुंची और फिर 16 साल की उम्र में दिल्ली आ गईं, कुछ वक़्त बाद उन्हें मॉडलिंग के ऑफ़र मिलने लगे और कंगना धीरे-धीरे पहाड़ों से उतरकर मैदानी रंग में रंगने लगीं. उन्होंने कुछ महीनों के लिए अस्मिता थिएटर ग्रुप में काम भी सीखा.

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अवॉर्ड क्वीन कंगना ने छोड़ दिया अवॉर्ड लेना
जब कंगना ने फ़िल्म इंडस्ट्री में करियर बनाने का फ़ैसला किया तो उनके परिवार को यह नागवार गुज़रा. कंगना इस बारे में बताती हैं, ''जब मुझे पहली फ़िल्म का ऑफ़र मिला तो मैंने ख़ुश होकर घर में बताया. मेरी मां को जब पता लगा इस फ़िल्म को वही डायरेक्टर बना रहे हैं जिन्होंने मर्डर फ़िल्म बनाई है तो उन्हें चिंता होने लगी. उन्हें लगा कि कोई मेरी ब्लू फ़िल्म बना देगा.''
कंगना की पहली फ़िल्म थी 'गैंगस्टर'. घुंघराले बालों वाली दुबली-पतली सी एक लड़की जो साफ़ हिंदी भी नहीं बोल पा रही थी, उसे देख लोगों को अंदाज़ा नहीं था कि यह एक दिन फ़िल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े महारथियों के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल देगी.
साल 2006 में गैंगस्टर के साथ 'रंग दे बसंती', 'लगे रहो मुन्नाभाई' और 'फ़ना' जैसी बड़ी फ़िल्में आईं लेकिन कंगना ने अपनी पहली ही फ़िल्म में फ़िल्मफ़ेयर का बेस्ट फ़ीमेल डेब्यू अवॉर्ड जीत लिया.
पहली फ़िल्म के साथ शुरू हुआ अवॉर्ड्स का सिलसिला लगातार जारी रहा. 'फ़ैशन' फ़िल्म में उन्होंने बिगड़ैल और शराब के नशे में डूबी एक आत्ममुग्ध मॉडल का रोल इतनी ख़ूबसूरती से निभाया कि उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिल गया.
इसके बाद कंगना ने क्वीन और तनु वेड्स मनु फ़िल्म के लिए साल 2015 और 2016 का राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किया.
हालांकि इस बीच साल 2014 में कंगना ने अलग-अलग प्राइवेट संस्थानों की ओर से मिलने वाले तमाम अवॉर्ड शो का बायकॉट किया. उन्होंने इन तमाम अवॉर्ड शो को बेबुनियाद क़रार दिया.
एक इंटरव्यू में कंगना ने कहा, ''इन अवॉर्ड्स का मतलब सिर्फ़ अपना विकिपीडिया पेज भरना होता है. शुरुआत में मैं बहुत अच्छे से तैयार होकर इन अवॉर्ड शो में जाती थी. लेकिन एक बार मुझे 'लाइफ़ इन ए मेट्रो' फ़िल्म के लिए अवाॉर्ड मिलना था, मैं रास्ते में ट्रैफिक में फंस गई. जब तक मैं फंक्शन में पहुंची तो मेरा अवॉर्ड सोहा अली ख़ान को दे दिया गया था.''

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बहन रंगोली पर हुआ एसिड अटैक
कंगना रनौत के सबसे क़रीबी इंसान के तौर पर उनकी बड़ी बहन रंगोली चंदेल को समझा जाता है. कंगना ख़ुद यह बात बोल चुकी हैं कि जैसे हर पुरुष की सफलता के पीछे कोई महिला होती है वैसे ही उनकी सफलता के पीछे भी एक महिला ही है.
रंगोली पर एसिड अटैक हो चुका है. पिंक विला वेबसाइट के साथ बातचीत में उन्होंने अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया था.
साल 2006 में जब रंगोली 23 साल की थीं और देहरादून के एक कॉलेज में पढ़ाई कर रही थीं उस समय उन पर एसिड अटैक हुआ था. एक लड़का जो रंगोली से एकतरफ़ा प्यार करता था उसने उन पर एसिड से हमला किया था.
उस वक़्त कंगना अपने करियर के बिलकुल शुरुआती दौर में थीं. इलाज के बाद भी रंगोली की एक आंख की 90 प्रतिशत रोशनी जा चुकी थी, उनके एक स्तन को भी बहुत ज़्यादा नुक़सान पहुंचा.
रंगोली बताती हैं कि उस हमले के बाद वे तीन महीने तक अपना चेहरा देखने की हिम्मत नहीं जुटा पाईं. कंगना ने ही उन्हें संभाला, उनकी प्लास्टिक सर्जरी करवाई.
मौजूदा वक़्त में रंगोली ही कंगना का मीडिया मैनेजमेंट देखती हैं. कंगना सोशल मीडिया से दूर हैं, ऐसे में रंगोली के ज़रिए ही उनकी तमाम अपेडेट्स मिलती हैं.

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बग़ावती सुर उगलने वाली कंगना
कंगना ने करन जौहर को उन्हीं के शो 'कॉफ़ी विद करन' में मूवी माफ़िया और अपनी फ़िल्मों के ज़रिए नेपोटिज़्म को बढ़ावा देने वाला कहा.
कंगना के इस इंटरव्यू के बाद पूरे बॉलीवुड में नेपोटिज्म पर ज़बरदस्त बहस छिड़ गई. फ़िल्म इंडस्ट्री दो ख़ेमों में बंटती हुई दिखाई दी. करन जौहर और उनके कई क़रीबियों ने कंगना से दूरियां बढ़ा ली.
माना गया कि इस इंटरव्यू के बाद कंगना का फ़िल्म इंडस्ट्री में ठहरना मुश्किल हो जाएगा, उन्हें फ़िल्में नहीं मिलेंगी.
कंगना की तेज़ ज़बान इन क़यासों से कुंद नहीं पड़ी. उन्होंने एक बार फिर कहा कि उन्हें फ़िल्म इंडस्ट्री में किसी ख़ान या कपूर की ज़रूरत नहीं है.
कंगना अपने निजी रिश्तों के बारे में भी खुलकर बातें करती रहीं. अपने से उम्र में काफी बड़े आदित्य पंचोली के साथ कंगना के रिश्ते लंबे वक़्त तक मीडिया के गलियारों में चर्चा का मुद्दा बना रहा.
कंगना ने एक टीवी इंटरव्यू में आदित्य पंचोली के साथ अपने रिश्तों के बारे में कहा था, ''मैं मुंबई में बिलकुल नई थी, 18 साल की भी नहीं थी और एक हॉस्टल में रहती थी. तब आदित्य पंचोली ने मुझे एक फ़्लैट दिया था. लेकिन उन्होंने वहां मुझे हाउस अरेस्ट कर दिया. मैंने इस बारे में उनकी पत्नी से बात की लेकिन उन्होंने भी मेरी मदद करने से इंकार कर दिया. मैं बड़ी मुश्किल से खिड़की से कूदकर उस घर से निकल पाई. बाद में अनुराग बासु और उनकी पत्नी ने मेरी मदद की, अनुराग ने 15 दिन तक मुझे अपने ऑफ़िस में छिपाकर रखा.''
कंगना के इन आरोपों पर आदित्य पंचोली ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उन पर लगे सभी आरोप झूठे हैं. एक पत्रकार ने पंचोली से जब पूछा कि अगर अभी कंगना उनके सामने आ जाएं तो वे क्या कहेंगे. इसके जवाब में पंचोली ने हाथ जोड़कर हंसते हुए कहा, ''नमस्ते क्वीन, हमें माफ़ कर दो.''
आदित्य पंचोली ने कहा, ''जब वो (कंगना) इंडस्ट्री में नई-नई आई थी तब मैंने अपनी आंखों से उसके स्ट्रगल को देखा था. मुझे बड़ा अफ़सोस है कि आज वो इस तरह के आरोप लगा रही है. उसे अपनी फ़िल्म का प्रमोशन करना है इसलिए इस तरह 15 साल पुरानी बातें ग़लत तरीके से सामने रख रही है.''
अभिनेता ऋतिक रोशन के साथ अपनी नज़दीकियों के बारे में कंगना ने स्पष्टतौर पर बातें रखीं. अपने एक इंटरव्यू के दौरान कंगना ने ऋतिक को 'सिली एक्स' कहा था.
इसके बाद दोनों के बीच कई तरह के 'ई-मेल' खुलने शुरू हुए. बॉलीवुड एक बार फिर कई ख़ेमों में बंटता हुआ दिखा इतना ही नहीं कंगना के चरित्र पर भी सवाल उठाए जाने लगे.
किसी ज़माने में कंगना के प्रेमी रह चुके अध्य्यन सुमन ने तो यहां कह दिया था कि कंगना ने उन पर काला जादू किया था.

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हालांकि इन तमाम बातों-विवादों के बाद भी कंगना लगातार बॉलीवुड में क़ायम हैं और वह भी मुस्कुराते हुए.
अपनी फ़िल्म 'क्वीन' के आख़िरी सीन की तरह, जहां रानी विजय के हाथों में अंगूठी लौटाते हुए उसे 'थैंक्यू' बोलकर आगे बढ़ जाती है.
इसी तरह कि कोई 'थैंक्यू' रूपी अंगूठी कंगना अपनी ज़बान से आलोचकों और विरोधियों को भी पकड़ा देती हैं.
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