इथियोपिया में बंधक भारतीय और उनके परिवार वालों का ऐसा है हाल

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अफ्रीकी देश इथियोपिया में तनख़्वाह न मिलने से नाराज़ स्थानीय लोगों ने सात भारतीय नागरिकों को बंधक बना लिया है. इनमें से दो को रिहा किए जाने की ख़बरें आई हैं, मगर पाँच लोग अभी भी बंधक हैं.
ये मामला सरकारी क्षेत्र की भारतीय कंपनी आईएलएंडएफ़एस और स्पेन की कंपनी एल्सामेक्स एसए के साझा उपक्रम आईटीएलएल-एल्सामेक्स से जुड़ा है.
इस नई कंपनी ने इथियोपियाई सरकार के साथ 2016 में देश में 160 किलोमीटर की सड़क बनाने का क़रार किया था.
भारतीय कंपनी के लोगों को बंधक बनाने वाले भी इसी कंपनी के लिए काम करते थे और तीन महीने से तनख्वाह नहीं मिलने के कारण नाराज़ थे.
बंधक बने सात लोगों में शामिल ख़ुर्रम इमाम और सुखविंदर सिंह से हमारे सहयोगी वात्सल्य राय ने बात की.

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ख़ुर्रम इमाम आईएलएंडएफएस कंपनी में वरिष्ठ इंजीनियर हाईवे के पद पर हैं.
उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन महीने से कंपनी का काम ठप था, फिर भी कंपनी स्थानीय कर्मचारियों को तनख्वाह दे रही थी.
"लेकिन अक्टूबर और नवंबर की सैलेरी इन लोगों को नहीं मिली, जिसकी वजह से इन लोगों ने हमें बंधक बना लिया है. 25 अक्टूबर से हम लोग कैद में हैं."
बिहार के रहने वाले ख़ुर्रम इमाम ने बताया कि इथियोपिया में आईएलएंडएफएस कंपनी तीन प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी. इन तीन प्रोजेक्टों में तीन कैंप हैं, इन तीन कैंपों में सात लोगों को बंधक बना लिया गया है.
"हमारे कैंप में चार बंधक हैं. इनमें जम्मू-कश्मीर के चैतन्य हरि, आंध्र प्रदेश के नागराजा बिशु, मध्यप्रदेश के सुखविंदर सिंह शामिल हैं."

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इन लोगों को इथियोपिया के उत्तरी शहर बहिड़ दार से 200 किलोमीटर दूर एक जगह पर बंधक बनाकर रखा गया है.
हालांकि ये लोग टेलिफ़ोन के माध्यम से घरवालों और बाहर के लोगों से बात कर पा रहे हैं. लेकिन इन्हें कहीं आने-जाने नहीं दिया जा रहा.
ख़ुर्रम इमाम ने बताया कि उनके पास खाने का सामान भी अब ख़त्म हो गया है. पीने का पानी भी थोड़ा ही बचा है.

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स्थानीय प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
इमाम ने बताया कि उन्होंने फोन के ज़रिए इथियोपिया के स्थानीय प्रशासन से बात की और भारतीय दूतावास को पत्र भेज अपनी स्थिति बताई थी.
बंधक बनाए गए इन लोगों ने भारत की विदेश मंत्री को ट्वीट भी कर दिया था और विदेश मंत्रालय से मेल कर मदद मांगी थी. हालांकि ख़ुर्रम इमाम के मुताबिक उन्हें अबतक कोई जवाब नहीं मिला है.

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मामले में कंपनी क्या कर रही है?
ख़ुर्रम इमाम ने बताया कि आईएलएंडएफएस एक कॉर्पोरेट कंपनी है और इसका कोई मालिक नहीं है.
उन्होंने कहा, "हमारी कंपनी से बातचीत चल रही है. वो स्थानीय लोगों को उनकी बची हुई तनख्वाह देने के लिए तैयार हैं. लेकिन पैसा इंडिया से यहां ट्रांसफर नहीं हो पा रहा है. यही वजह है कि हम अबतक फंसे हुए हैं."
करीब ढाई सौ लोगों ने कंपनी के इन कर्मचारियों को कैद कर रखा है, ऐसे में वहां से निकलना भी इतना आसान नहीं है.
हालांकि स्थानीय प्रशासन इन स्थानीय लोगों को समझाने की कोशिश कर रहा है कि बंधक बनाए गए लोगों को परेशान ना करें.

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"प्रशासन ने हमसे कहा है कि इन लोगों को सैलेरी दे दें, उसके बाद आप लोगों को यहां से निकाल लिया जाएगा. अब सैलेरी तो कंपनी ही देगी."
सुखविंदर सिंह आईएलएंडएफएस कंपनी में मकेनिकल इंजीनियर हैं. उनका परिवार इंदौर में रहता है. उन्होंने बीबीसी को बताया कि वो काफी मुश्किल स्थिति में हैं.
उन्होंने कहा, "फोन के ज़रिए परिवार से बात तो कर रहे हैं. लेकिन हम नहीं चाहते कि वो परेशान हो, इसलिए जब भी बात होती है तो कह देते हैं कि बस वापस आ रहे हैं. हम आपके माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से अपील करना चाहते हैं कि हम लोगों को जल्द से जल्द यहां से निकालें. हम अपने देश वापस लौटना चाहते हैं."
इथियोपिया में फंसे इन भारतीयों के परिजन अपने स्तर पर विदेश मंत्रालय से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्हें किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, यह जानने के लिए हमारे सहयोगी आदर्श राठौर ने इथियोपिया में फंसे सुखविंदर सिंह के बेटे सतिंदर से बात की.

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सतिंदर ने बताया कि विदेश मंत्रालय से उनकी बात हुई है. "मंत्रालय ने कहा कि वो इस मामले में कार्रवाई कर रहे हैं. मैं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मिलने की कोशिश करूंगा."
सतिंदर अपने बीवी-बच्चों के साथ गुजरात में रहते हैं और उनकी मां और दूसरे दो भाई इंदौर में रहते हैं.
सतिंदर ने बताया कि उन्हें घटना के बारे में तीन दिन पहले ही पता चला. जिसके बाद मदद के लिए उन्होंने विदेश मंत्रालय को ट्वीट और मेल किए.
आईएलएंडएफ़एस कंपनी की तरफ से अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
वहीं समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार भारतीय विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार मामले को सुलझाने के लिए मंत्रालय इथियोपियाई सरकार से बात कर रही है.
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