चर्चा में है सऊदी प्रिंस सलमान और पुतिन का हाई फाइव: आज की पांच बड़ी ख़बरें

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन

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ब्यूनस आयर्स में हो रहे जी-20 देशों के सम्मेलन में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन के साथ खुशी से हाथ मिलाते नज़र आए.

दोनों नेता विश्व के सामने खड़ी आर्थिक चुनौतियों के मसले पर शुक्रवार को हो रही बैठक में शिरकत करने पहुंचे थे.

मीडिया में आ रही ख़बरों के अनुसार हाथ मिलाने का ये अंदाज़ इस बात की ओर इशारा है कि सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशोज्ज़ी की हत्या के बाद भले कुछ देशों ने उस पर प्रतिबंध लगाए हैं लेकिन सऊदी को अब भी कई देशों का समर्थन हासिल है.

जी-20 सम्मेलन में सऊदी क्राउन प्रिंस की मुलाक़ात फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हुई.

अमरीका चीन ट्रेड वॉर

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इस अहम बैठक में शुक्रवार को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और अमरीका के पड़ोसियों मेक्सिको और कनाडा के बीच एक अहम क्षेत्रीय व्यापार समझौता भी हुआ.

इसके बाद ट्रंप ने कहा कि इस दौरान वो चीनी राष्ट्रपति से डिनर टेबल पर मुलाक़ात कर सकते हैं और इस बात की संभावना है कि अमरीका-चीन ट्रेड वॉर सुलझाने को लेकर किसी तरह की सहमति बन जाए.

उन्होंने कहा, "अगर हम किसी तरह के समझौते पर पहुंच पाए तो बेहतर होगा क्योंकि मुझे लगता है कि हम ये चाहते हैं. इस बात के अच्छे संकेत मिल रहे हैं."

राहुल गांधी

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किसान मोर्चे में एकजुट हुआ विपक्ष

शुक्रवार को भारत की राजधानी दिल्ली में हुए किसान मुक्ति मोर्चे में कई राजनीतिक दल एक साथ मंच पर नजर आए. इनमें कांग्रेस, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी, समाजवादी पार्टी, एनसीपी, नेशनल कांफ्रेंस और आम आदमी पार्टी जैसे राजनीतिक दल शामिल हैं.

दिल्ली में किसान कर्ज़ माफी और आय बढ़ाने की मांगों को लेकर इकट्ठा हुए थे. 2019 लोकसभा चुनावों से पहले इस मुद्दे को लेकर विपक्ष में एक तरह की एकजुटता बन रही है.

मोर्चे में राहुल गांधी ने कहा कि किसान भाजपा सरकार से "अनिल अंबानी का हवाईजहाज़ या मुफ्त चीज़ों की मांग" नहीं कर रहे बल्कि वही मांग रहे हैं जो उनका हक है.

मार्च में पहुंचे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार किसानों से किए अपना वायदे पूरे करे और स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करे.

नवजोत सिंह सिद्धू

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मोदी पर इमरान ख़ान की गुगली

पाकिस्तान ने हाल में करतारपुर कॉरिडोर का शिलान्यास किया जिसमें भारत के दो नेता शामिल हुए थे. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की आपत्ति के बाद भी हाल में कांग्रेस में शामिल हुए नवजोत सिंह सिद्धू और हरसिमरत कौर पाकिस्तान गए थे.

इस पर चर्चा शुरु होने पर नवजोत सिंह सिद्धू ने बीते कल हैदराबाद में एक प्रेस क़न्फ्रेस ने कहा कि मेरे कप्तान सिर्फ राहुल गांधी हैं और उन्होंने ही मुझे वहां भेजा था.

हालांकि इसके कुछ देर बाद उन्होंने ट्वीट कर इस पर सफाई दी और लिखा, "राहुल गांधी ने कभी मुझे पाकिस्तान जाने के लिए नहीं कहा. पूरी दुनिया जानती है कि मैं पाक प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के पर्सनल न्योते पर गया था."

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इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि करतारपुर गलियारे के शिलान्यास कार्यक्रम में भारत सरकार की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने एक 'गुगली' फेंकी थी.

उनका कहना था कि इस कारण वजह से भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ने दो मंत्रियों को इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भेजना पड़ा.

इससे पहले भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान का न्योता ठुकरा दिया था और कहा था कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता नहीं होगी.

महबूबा मुफ़्ती

अटल से अलग हैं मोदी- महबूबा मुफ्ती

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने बीबीसी से बात करते हुए कहा है कि कश्मीर को लेकर जैसी सोच अटल बिहारी वाजपेयी की थी, वैसी सोच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नहीं है.

उनका कहना था कि उनके पिता ये समझ बैठे कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तरह नरेंद्र मोदी भी दूरंदेश होंगे".

उन्होंने कहा कि उनके पिता मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने साल 2014 में बीजेपी के साथ मिलकर सरकार दूरदर्शिता के साथ बनाई थी ताकि कश्मीर के मुद्दे में गति आए, लेकिन, "बीजेपी इसे समझ नहीं पाई".

व्यापार

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कम रही जीडीपी वृद्धि दर

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दर में जुलाई-सितंबर की अवधि में गिरावट दर्ज की गई है.

सितंबर में ख़त्म हुई दूसरी तिमाही में धीमी पड़कर 7.1 प्रतिशत रह गई है जबकि इसकी पिछली तिमाही में यह 8.2 फीसदी थी.

बताया जा रहा है कि गिरावट का मुख्य कारण डॉलर के मुकाबले कमज़ोर रुपया और ग्रामीण मांग में कमी आना है.

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