छत्तीसगढ़ चुनाव: आख़िर कितने लोगों ने किया है मतदान

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- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, रायपुर से
छत्तीसगढ़ में 90 विधानसभा सीटों के लिये इस महीने हुए चुनाव में कुल कितने मतदाताओं ने मतदान किया है, यह रहस्य गहराता जा रहा है.
20 नवंबर को हुए मतदान के बाद राज्य सरकार द्वारा मंगलवार को मतदान के तीसरी बार कथित अंतिम आंकड़े सार्वजनिक किये गए हैं. इनमें कुछ विधानसभा में तो मतदान में 18 फीसदी से भी अधिक की बढ़ोत्तरी दर्ज़ की गई है. इसके उलट कुछ विधानसभा क्षेत्र में मतदान के आंकड़े कम हो गए हैं.
मतदान को लेकर सरकारी आंकड़े कुछ और कहानी कह रहे हैं जबकि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी इन आंकड़ों को खारिज़ कर रहे हैं.
राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा तीसरी बार जारी किये गये मतदान के आंकड़ों को ख़ारिज करते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुब्रत साहु ने बीबीसी से कहा, "21 नवंबर को फाइनल आंकड़े आये हैं, उसके बाद उनमें कोई बदलाव नहीं हुआ है."
उन्होंने कहा कि 20 और 21 नवंबर को दो चरणों में ही मतदान के आंकड़े सार्वजनिक किये गये थे. इसके बाद इन आंकड़ों में कोई फेरबदल नहीं हुआ है.
इधर इन आंकड़ों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने संदेह जताया है कि सरकार के निर्देश पर मतदान के आंकड़ों में फेरबदल की हरसंभव कोशिश हो रही है.
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने मतदान के आंकड़ों में बढ़ोत्तरी को स्वाभाविक माना है.

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नहीं मिटाए गए मॉक पोल के आंकड़े
आंकड़ों को लेकर यह विवाद ऐसे समय में हुआ है, जब मॉक पोल के आंकड़ों के साथ मतदान को लेकर भारी गड़बड़ी को निर्वाचन आयोग पहले ही स्वीकार कर चुका है. (मॉक पोल में मतदान से ठीक पहले उम्मीदवार के प्रतिनिधियों के सामने वोटिंग मशीन में 50 बार वोट डाले जाते हैं, जिन्हें डिलीट कर के मतदान की शुरुआत की जाती है.)
लेकिन, राज्य में 50 से अधिक जगहों पर इन मॉक पोल के आंकड़ों को डिलीट नहीं किया गया और मतदान शुरु कर दिया गया.
यही कारण है कि किसी केंद्र पर अगर 1000 वोट डाले गये हैं, तो उस केंद्र की वोटिंग मशीन पर वोटिंग का आंकड़ा 1050 दर्शा रहा है. इस बड़ी गड़बड़ी को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
यही कारण है कि केंद्रीय चुनाव आयोग ने राज्य में मतदान के बूथवार आंकड़ों को सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी है.
इसके अलावा मतदान के बाद एक के बाद एक कई गड़बड़ियां सामने आ रही हैं. बिलासपुर में एक स्ट्रॉन्ग रूम को सप्ताह भर बाद सील किया गया तो धमतरी में स्ट्रॉन्ग रूम में घंटों अनाधिकृत लोगों के साथ रहने के कारण तहसीलदार को निलंबित किया गया. अलग-अलग केंद्रों से ऐसी कई शिकायतें लगातार आ रही हैं.

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20 और 21 को जारी हुए आंकड़े
छत्तीसगढ़ में 90 विधानसभा की सीटों के लिये इस महीने दो चरणों में मतदान हुये हैं. राज्य की माओवाद प्रभावित 18 सीटों पर इस महीने की 12 तारीख़ को मतदान हुआ, जबकि बची हुई 72 सीटों पर 20 नंवबर को मतदान हुआ था.
दूसरे चरण का मतदान ख़त्म होने के बाद चुनाव आयोग ने 20 नवंबर की शाम को ही मतदान के आरंभिक आंकड़े सार्वजनिक किये थे. इन आंकड़ों के अनुसार राज्य की 72 विधानसभा सीटों पर शाम 6 बजे तक 66.63 प्रतिशत मतदान हुआ था.
चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना था कि शाम 6 बजे के बाद भी कई केंद्रों पर मतदान जारी है. इस स्थिति में सही आंकड़े देर रात या अगले दिन सुबह ही आ पायेंगे.
इसके बाद 21 नवंबर की शाम को फिर से मतदान के आंकड़े जारी किये गये. इसके अनुसार मतदान का प्रतिशत 76.35 तक पहुंच चुका था.
राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग की वेबसाइट पर जारी किये गये मतदान के इन आंकड़ों के साथ इस बात का भी उल्लेख था कि 72 विधानसभा क्षेत्रों के सभी मतदान दल सकुशल पहुंच चुके हैं एवं सभी के द्वारा अपने संग्रहण केंद्रों में निर्वाचन सामग्री जमा की जा चुकी है.
इसके साथ-साथ 72 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान में प्रयुक्त मशीनें स्ट्रॉन्ग रूम में राजनीतिक दलों एवं चुनाव के उम्मीदवारों की उपस्थिति में सील की जा चुकी हैं.

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तीसरा आंकड़ा
राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग के निदेशक चंद्रकांत उइके के अनुसार, "चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद जनसंपर्क विभाग की वेबसाइट पर चुनाव आयोग से प्राप्त ख़बरें ही जारी की जा रही हैं. इन्हीं ख़बरों को मीडिया से जुड़े लोगों को मेल भी किया जाता है."
मतदान के आठवें दिन यानी 27 नवंबर को जनसंपर्क विभाग की वेबसाइट पर फिर से मतदान के नये आंकड़े जारी किये गये हैं. इसके अनुसार मतदान का आंकड़ा 76.60 पहुंच गया.
इससे पहले 21 नवंबर को जारी किये गये आंकड़ों की तुलना में यहां महज 0.25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई लेकिन इस आंकड़े ने कम से कम 44 विधानसभा सीटों पर मतदान के आंकड़ों को बदल कर रख दिया.
उदाहरण के लिये राज्य की पहली विधानसभा भरतपुर-सोनहत में 20 नवंबर की शाम को मतदान के जो आंकड़े जारी किये गये थे, उसके अनुसार इस विधानसभा क्षेत्र में कुल 65.32 प्रतिशत मतदान हुआ था. अगले दिन यानी 21 नवंबर की शाम को जो आंकड़े जारी किये गये, उसमें बताया गया कि मतदान का यह आंकड़ा 72.88 प्रतिशत हो गया है.
लेकिन, 27 नवंबर को मतदान के आंकड़े तीसरी बार जारी किये गये और यह 84 प्रतिशत तक जा पहुंचा. यानि शुरुआती 65.32 प्रतिशत का आंकड़ा तीसरी बार 18.68 प्रतिशत तक बढ़ गया.

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इसी तरह 20 नवंबर को प्रेमनगर विधानसभा के जो आंकड़े जारी किये गये थे, उसके अनुसार वहां 69.17 प्रतिशत मतदान हुआ था. अगले दिन शाम तक यह आंकड़ा बढ़ कर 82.66 प्रतिशत हो गया. लेकिन 26 नवंबर को जो नये आंकड़े आये, उसमें यह आंकड़ा घट कर 80.42 प्रतिशत रह गया.
आंकड़ों को देखें तो 90 में से कम से कम 44 विधानसभा सीटों के मतदान के आंकड़े या तो बढ़ गये हैं या कम हो गये हैं.
कहां से आये आंकड़े
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के छत्तीसगढ़ संयोजक गौतम बंदोपाध्याय कहते हैं, "आँकड़ों का इस तरह बदलना और इस हद तक बदलना चुनाव आयोग के कामकाज और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है."
"अगर आठ-आठ दिन बाद आँकड़े बदलेंगे तो चुनाव आयोग को अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा करनी चाहिये."

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इस पूरे मुद्दे पर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुब्रत साहु कहते हैं, "सेकेंड फेज़ के आंकड़े दो चरण में आये हैं. एक उसी दिन आ गया था, 20 नवंबर को."
"कुछ जो हेलिकॉप्टर ड्रॉपिंग वाली टीम थे और कुछ जो बहुत इंटीरियर में जो दूसरे दिन आये, उनके आंकड़े सेकेंड फेज़ में आए. ये फाइनल आंकड़े हैं और इनमें कोई परिवर्तन नहीं आया है."
सुब्रत साहु का साफ कहना है कि निर्वाचन आयोग ने 20 नंवबर को हुए मतदान के आंकड़े दो ही चरणों में प्रस्तुत किये हैं.
हालांकि, जनसंपर्क विभाग के संयुक्त संचालक और इन दिनों निर्वाचन आयोग के नोडल अधिकारी आलोक देव कहते हैं, "20 और 21 नवंबर को जो आंकड़े पेश किये गये थे, वे अंतिम आंकड़े नहीं थे. तीसरी बार 26 नवंबर को जो आंकड़े आये हैं, वह मतदान के अंतिम आंकड़े हैं."
लेकिन, 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से महज 0.75 प्रतिशत वोटों के अंतर से हारने वाली कांग्रेस पार्टी इस पूरे मामले को एक साजिश की तरह देख रही है.

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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के संवाद प्रमुख शैलेष नितिन त्रिवेदी कहते हैं, "निर्वाचन आयोग द्वारा लगातार आंकड़ों को बदलना पूरी चुनावी प्रक्रिया को संदेह में लाता है. कई सवाल खड़े करता है."
"कांग्रेस ने अपने सभी उम्मीदवारों को निर्देश दिये हैं कि वह बूथवार आंकड़ों को अपने साथ रखें और मतगणना के दौरान उनमें कहीं भी अंतर नज़र आता है तो उस पर तत्काल प्रतिक्रिया दें."
हालांकि, छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष धरमलाल कौशिक मतदान के आंकड़ों में किसी भी तरह की गड़बड़ी को अस्वीकार करते हैं. कौशिक का कहना है कि लोगों ने इस बार उत्साह के साथ मतदान किया है इसलिये आंकड़े बढ़े हैं.
वे कहते हैं, "पोलिंग बूथ के आंकड़ों का मिलान करना बहुत ज़रूरी है. मेरा अनुमान है कि पोलिंग बूथ के आंकड़ों के मिलान करने के कारण इतनी देरी हुई होगा."
"निर्वाचन आयोग को कटघरे में खड़ा करने की बात ठीक नहीं है."
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