छत्तीसगढ़ चुनाव में पहली बार घटा मतदान प्रतिशत

इमेज स्रोत, DPR
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिये
छत्तीसगढ़ में माओवाद प्रभावित विधानसभा की 18 सीटों पर सोमवार को आरंभिक तौर पर 60.49 फीसदी मतदान की ख़बर है.
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहली बार मतदान प्रतिशत में गिरावट आई है.
पहले दिल्ली से हुई चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस में 70 फ़ीसदी मतदान का दावा किया गया था.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
लेकिन छत्तीसगढ़ के चुनाव आयोग के मुताबिक, 18 सीटों पर शुरुआती तौर पर औसतन 60.49 फ़ीसदी मतदान हुआ है.
जिन इलाकों में सुबह 7 बजे से अपराह्न 3 बजे तक मतदान हुआ, वहां मतदान का औसत 52 प्रतिशत रहा. जबकि जहां सुबह आठ से शाम 5 बजे तक मतदान का समय रखा गया था, उन आठ विधानसभाओं में औसत मतदान 70.08 रहा.

इमेज स्रोत, DPR
छत्तीसगढ़ में मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुब्रत साहू के अनुसार, "सोमवार को जिन 18 सीटों पर मतदान हुये हैं, उनमें सबसे कम बीजापुर में 33 फ़ीसदी मतदान हुआ है, जबकि सबसे अधिक खुज्जी में 72 फ़ीसदी मतदान हुआ है."
चुनाव आयोग के अनुसार सोमवार को नारायणपुर में 39.90, अंतागढ़ में 43, भानुप्रतापपुर में 57, कांकेर में 62, दंतेवाड़ा में 49, मोहला मानपुर में 67, केशकाल में 63.51, कोंडागांव में 61.47 और कोंटा में 46.19 प्रतिशत मतदान हुआ है.
इसी तरह बस्तर में 70, जगदलपुर में 65, चित्रकोट में 71, खैरागढ़ में 70.14, डोंगरगढ़ में 71, राजनांदगांव में 70.50, डोंगरगांव में 71 मतदान हुआ.

इमेज स्रोत, DPR
कम मतदान
हालांकि आंरभिक आंकड़ों को देखें तो राज्य बनने के बाद पहली बार 2003 में इन्हीं इलाकों में प्रथम चरण में हुए मतदान में 71.30 प्रतिशत लोगों ने भाग लिया था. इसके बाद 2008 में यह आंकड़ा 70.51 प्रतिशत जा पहुंचा. 2013 में हुये पिछले विधानसभा चुनाव में यह आंकड़ा बढ़ कर 77.02 प्रतिशत हो गया.
हालांकि सोमवार के मतदान के बारे में छत्तीसगढ़ में मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुब्रत साहू का कहना है कि आखिरी आंकड़े आने के बाद मतदान के प्रतिशन में बढ़ोतरी हो सकती है.
बीजापुर और सुकमा में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ के अलावा अधिकांश इलाकों में मतदान का काम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ. बीजापुर में हुई मुठभेड़ में जहां सुरक्षाबलों के दो जवान घायल हो गये, वहीं सुकमा में सुरक्षाबलों ने दो कथित माओवादियों के एक मुठभेड़ में मारे जाने का दावा किया है.

इमेज स्रोत, DPR
विधानसभा की 18 सीटों में से मोहला-मानपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, कांकेर, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोंटा 10 ऐसे विधानसभा क्षेत्र थे, जहां सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक मतदान हुआ. लेकिन कई इलाक़ों में वोटिंग मशीनों की गड़बड़ी के कारण मतदान शुरु होने में देरी हुई.
आम आदमी पार्टी के नेता संकेत ठाकुर के अनुसार, "अकेले भानुप्रतापपुर विधानसभा के घोड़दा, कनेचुर, बुदेली, भोंडिया, सतनामी पारा (सम्बलपुर), सलिहापारा 82, साल्हे 94, दुर्गुकोंदल और डुवा में साढ़े दस बजे तक वोटिंग शुरू नहीं हो पाई थी."

इमेज स्रोत, DPR
कहीं मशीनें खराब हुईं तो कहीं मतदाताओं की जानकारी के बिना सुबह-सुबह मतदान केंद्र ही बदल दिया गया. नाराज़ मतदाताओं ने कुछ जगहों पर धरना भी दिया.
दूसरी ओर सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर में ज़िला प्रशासन ने कई जगहों पर पिछले 18 सालों में पहली बार मतदान का भी दावा किया. दंतेवाड़ा में पिछले चुनाव में नौ मतदान केंद्र ऐसे थे, जहां एक भी मतदान नहीं हुआ था. लेकिन इस बार कहीं से भी शून्य मतदान की ख़बर नहीं है.
लेकिन माओवादियों ने एक बयान जारी कर कहा है कि जिन संवेदनशील इलाकों में मतदान की तैयारी के दावे प्रशासन की ओर से किये गये, वहां कोई मतदान दल ही नहीं पहुंचा. हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों से इनकार किया है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आपयहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














