क्या दिग्विजय सिंह के सियासी एजेंडे को आगे बढ़ा पाएंगे विलायत रिटर्न 'छोटे राजा साहब' जयवर्धन सिंह

- Author, रजनीश कुमार
- पदनाम, राघोगढ़ (मध्य प्रदेश) से, बीबीसी संवाददाता
शाम का वक़्त है और दिग्विजय सिंह के राघोगढ़ क़िले में स्थानीय लोग अपने नेता का इंतज़ार कर रहे हैं. राघोगढ़ से दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह चुनाव लड़ रहे हैं. वो अपनी पत्नी जाम्या के साथ चुनाव प्रचार पर निकले हैं.
क़िले में इंतज़ार कर रहे लोगों के हाव-भाव देख साफ़ महसूस हो रहा है कि वो अपनी फ़रियाद लेकर आए हैं. इंतज़ार करने वाले सभी उम्र के लोग हैं.
घड़ी की सुई 7:30 पर जैसे ही गई कि तीन गाड़ियां क़िले में धूल उड़ाती घुसीं. गाड़ियां रुकी भी नहीं थी कि फ़रियादी गाड़ी के पीछे भागे. जयवर्धन गाड़ी से उतरे भी नहीं थे कि लोग पांव छूने के लिए टूट पड़े.
पांव छूने की ललक जवान से बूढ़ों तक में दिखी. क़रीब 50 साल की एक महिला झुकने को हुईं कि जयवर्धन ने उन्हें रोक लिया और कहा, ''काकी आपसे तो बात हो गई थी न, फिर क्यों आईं?''
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जयवर्धन की पत्नी क़िले के भीतर चली गईं और उनका बेटा बाहर खेलने लगा. जयवर्धन फ़ोन पर आधे घंटे तक बात करते रहे और लोग उनके पीछे-पीछे घूमते रहे. बात करने के बाद जयवर्धन क़िले में ही बने अपने कार्यालय के पहले फ्लोर पर लोगों के साथ गए. वहां लोगों की फ़रियाद सुनी. स्थानीय लोगों का कहना है कि जयवर्धन जब राघोगढ़ में होते हैं तो रोज़ लोगों की फ़रियाद सुनते हैं.
दिग्विजय सिंह का यह क़िला उनके राजा होने की आख़िरी निशानी है. इस क़िले में न कोई दरवाज़ा है और न ही कोई दरबान. बाहर से इमारत किसी बुज़ुर्ग की तरह नज़र आती है, लेकिन भीतर से बिल्कुल जवान. बाहर और भीतर का कोई मेल नहीं है. यह किला किसी मुग़ल कालीन इमारत की तरह विशाल नहीं है बल्कि ऐसे घर भारत में कई रईसों के होते हैं.
क़िले के भीतर जयवर्धन के दफ़्तर के पहले कमरे में एक टेबल पर उनकी मां आशा सिंह और दिग्विजय सिंह की तस्वीर रखी है. इन दोनों तस्वीरों के बीच में जयवर्धन के बचपन की तस्वीर है. दूसरे कमरे में जयवर्धन ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी की डिग्री और दून स्कूल की तस्वीरें लगा रखी हैं.

छोटे राजा साहब
दिग्विजय सिंह ने अपनी राजनीतिक और राघोगढ़ की पूरी विरासत जयवर्धन के हवाले कर दी है. राघोगढ़ एक साफ़-सुथरा शहर है. दिग्विजय सिंह के क़िले के गेट के बाहर लोगों की बस्तियां हैं. यहां के लोग जयवर्धन को छोटे राजा साहब कहकर बुलाते हैं.
शहर के लोगों का कहना है कि जयवर्धन के पास पहुंचना बहुत आसान है. इसी शहर के राजकुमार चंद्रावत सिंचाई विभाग के रिटायर सरकारी कर्मचारी हैं. उनका एक बेटा अमरीका में इंजीनियर है.
चंद्रावत कहते हैं, ''बड़े राजा साहब के पास भी पहुंचना आसान था. वो तो क़िले में जाने के बाद किसी को बिना खाना खिलाए नहीं भेजते थे. छोटे साहब के साथ अच्छी बात ये है कि वो बड़े सब्र के साथ हर किसी की बात सुनते हैं. उनके क़िले में आप कभी भी जा सकते हैं.''
राघोगढ़ गुना ज़िले में है. राघोगढ़ के 34 किलोमीटर की दूरी पर गुना है जहां से ज्योतिरादित्य सिंधिया सांसद हैं. सिंधिया और दिग्विजय सिंह के संबंधों को लोग अच्छा नहीं बताते हैं. बेशक सिंधिया राजघराना दिग्विजय सिंह से बहुत बड़ा रहा है, लेकिन दिग्विजय सिंह राजनीतिक हैसियत में सिंधिया परिवार से बहुत आगे रहे. दिग्विजय सिंह दस सालों तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं.
कहा जाता है कि आज तक सिंधिया परिवार का कोई व्यक्ति दिग्विजय सिंह के राघोगढ़ क़िले में नहीं आया था. इसी साल मई महीने में ज्योतिरादित्य सिंधिया राघोगढ़ किला पहुंचे तो गुना और ग्वालियार में कई दिनों तक चर्चा रही.
कहा गया कि जयवर्धन सिंह की पहल पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ऐसा किया और इसका एक मक़सद यह संदेश देना भी था कि आधुनिक लोकतंत्र में रजवाड़ों की पुरानी दुश्मनी की कोई जगह नहीं है.

जयवर्धन और ज्योतिरादित्य
इस इलाक़े के लोग जयवर्धन सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के व्यवहारों की तुलना अक्सर करते हैं. आजकल यह तुलना काफ़ी ज़ोरों पर है.
गुना के एक बैंकर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ''बेशक सिंधिया राजघराने का प्रभाव ज़्यादा रहा है, लेकिन ज्योतिरादित्य और जयवर्धन की तुलना विनम्रता के स्तर पर करें तो जयवर्धन आगे हैं. जयवर्धन को किसी को भी गले लगाने में कोई परहेज नहीं है, लेकिन ज्योतिरादित्य की ऐसी तस्वीरें बहुत कम ही दिखती हैं.''
राघोगढ़ के साथ गुना में भी लोग जयवर्धन की तारीफ़ करते हैं कि वो मिलते बहुत आत्मीयता से हैं.
28 नवंबर को मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान है और कांग्रेस ने इस बार प्रदेश के वरिष्ठ नेता कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया को आगे किया है. दिग्विजय सिंह प्रदेश में घूम तो रहे हैं, लेकिन रैलियों में भाषण नहीं दे रहे हैं.

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'पिता ने प्रण पूरा किया'
मध्य प्रदेश में बीजेपी पिछले 15 सालों से सत्ता में है. इसके पहले दिग्विजय सिंह दस साल तक मुख्यमंत्री थे. जयवर्धन से पूछा कि आख़िर उनके पिता ने ऐसा क्या कर दिया था कि लोगों ने 15 सालों तक कांग्रेस को सत्ता से बेदख़ल कर रखा है?
जयवर्धन कहते हैं, ''देखिए उसमें उनकी कोई ग़लती नहीं थी. 10 साल बाद जनता को बदलाव चाहिए था और ऐसा हुआ. दिग्विजय सिंह को भरोसा था तभी उन्होंने यहां तक कहा था कि वो चुनाव हारेंगे तो दस सालों तक कोई राजनीतिक पद नहीं लेंगे. उन्होंने ऐसा किया भी. 2013 में उनका प्रण पूरा हुआ तब जाकर राजनीतिक रूप से सक्रिय हुए हैं. राजनीतिक संन्यास के दौरान मेरे पिता ने केवल पार्टी के लिए काम किया था.''
जयवर्धन कहते हैं, ''मेरे पिता की भले हार हुई थी, लेकिन उन्होंने कई अहम काम किए थे. उन्होंने प्रदेश में पंचायती राज कायम किया. भूमिहीनों को ज़मीन दिलाने की कोशिश की. हालांकि वो बहुत ठीक से लागू नहीं हो पाया. मेरे पिता बुनियादी सुधार कर रहे थे. मेरे पिता के शासन में कोई भ्रष्टाचार नहीं था. मगर आज की सरकार में देखिए भ्रष्टाचार का आलम क्या है.''

जयवर्धन से पूछा कि उनकी परवरिश राजघराने में हुई या सामंती व्यवस्था में? उनका जवाब था, ''आज़ाद भारत में न कोई राजा है और न कोई राजघराना. ये बात ज़रूर है कि यहां हमारा पुराना परिवार है और आसपास के लोगों से अच्छे ताल्लुकात हैं और ये पीढ़ियों से है. यहां से हमारे परिवार की तीन पीढ़ियां विधायक बनती आ रही हैं. मैंने कभी ख़ुद को किसी से ऊपर नहीं माना है. हम कभी किसी से कोई भेदभाव नहीं करते हैं.''
कहा जाता है कि दिग्विजय सिंह की नकारात्मक छवि उनके विवादित बयानों से भी बनी है. क्या जयवर्धन की अपने पिता से इस मुद्दे पर बात नहीं हुई? क्या जयवर्धन ने अपने पिता को कभी नहीं कहा कि उन्हें ऐसे बयान नहीं देने चाहिए?
जयवर्धन इस सवाल के जवाब में कहते हैं, ''मेरे पिता दस साल तक मुख्यमंत्री रहे, मैं उन्हें क्या समझाऊंगा. नगरपालिका अध्यक्ष से वो विधायक बने, सांसद बने, कांग्रेस अध्यक्ष बने और मुख्यमंत्री बने. जिस व्यक्ति के पास राजनीति का इतना लंबा अनुभव है उसे पांच साल से विधायक एक व्यक्ति क्या कह सकता है? दूसरी बात तो ये कि मेरे पिता जो भी बयान देते हैं, उसके पक्ष में पक्का सबूत होता है. उनके विरोधियों ने ऐसी छवि बनाने की कोशिश की. मेरे पिता ने सबसे बड़ा यूरिया प्लांट राघोगढ़ में बनाया. इस छोटे से शहर में पांच सीबीएसई स्कूल हैं. मध्य प्रदेश में सबसे पहला डीपीएस राघोगढ़ में खुला. ये सब दिग्विजय सिंह ने ही किया है.''

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'राजस्थान की सड़कें मध्य प्रदेश से बेहतर'
दिग्विजय सिंह के शासनकाल में सड़क और बिजली की हालत बहुत ख़राब थी. ऐसा क्यों था? जयवर्धन कहते हैं, ''देखिए यह समय की बात है. 15 साल हो गए तो क्या विकास के काम नहीं होते. कहां विकास के काम नहीं हुए हैं. अगर हम तुलना मध्य प्रदेश और राजस्थान की करें तो सड़कें कहां की बेहतर हैं? राजस्थान में तो हर पांच सालों पर सरकार बदलती रहती है. राजस्थान की सड़कें मध्य प्रदेश से कई गुना बेहतर हैं. सड़कों के लिए फ़ंड केंद्र से आता है और 2004 से 2014 के बीच यूपीए सरकार ने फ़ंड देने में कोई कमी नहीं की.''
जयवर्धन किसे बड़ा नेता मानते हैं? कई लोगों का मानना है कि कांग्रेस में दिग्विजय सिंह सबसे बड़े नेता हैं न कि कमलनाथ और सिंधिया. क्या आप भी ऐसा ही मानते हैं? जयवर्धन कहते हैं, ''देखिए, दिग्विजय सिंह जी 10 सालों तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं. स्वाभाविक है उनकी जान-पहचान और लोग हर ज़िले में हैं. लेकिन कमलनाथ और सिंधिया भी बड़े नेता हैं.''
जाति व्यवस्था को अगर तोड़ना हो तो जयवर्धन इसके लिए क्या करना चाहेंगे? जयवर्धन इसके जवाब में कहते हैं, ''जाति में क्या बुराई है और क्या अच्छाई है इसे पारिभाषित नहीं कर सकते. बस सबको समान अवसर मिले. कुछ लोग हैं जो जाति को फ़ॉलो नहीं करते. हालांकि यह भी निजी मामला है.''
क्या जयवर्धन की पत्नी भी राजनीति में आएंगी? जयवर्धन ने कहा, ''नहीं..नहीं..मेरे घर में औरतें...देखिए यह तो उनका निर्णय होगा. वो आज हमारे साथ चुनाव प्रचार में गई थीं. यह बात उनसे ही पूछिएगा.''
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