हरियाणा: चौटाला परिवार में फूट के बीच अजय चौटाला पार्टी से निष्कासित

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, टीम बीबीसी हिन्दी
- पदनाम, नई दिल्ली
चौटाला परिवार में चल रहे विवाद के बीच इंडियन नेशनल लोक दल (INLD) ने अजय सिंह चौटाला की प्राथमिक सदस्यता रद्द कर दी है.
अजय सिंह चौटाला के परिवार का कहना है कि एक बड़े षड़यंत्र के तहत ये फ़ैसला लिया गया है.
इनेलो के हरियाणा प्रभारी अशोक अरोड़ा ने चंडीगढ़ में अजय सिंह चौटाला के छोटे भाई अभय सिंह चौटाला की मौजूदगी में इस फ़ैसले की घोषणा की.
अजय सिंह चौटाला पर 'पार्टी विरोधी गतिविधियां' करने का आरोप लगा है.
अशोक अरोड़ा ने मीडिया के लोगों के सामने दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद ओम प्रकाश चौटाला की चिट्ठी पढ़कर सुनाई.
इस चिट्टी में ही अजय सिंह चौटाला की प्राथमिक सदस्यता रद्द करने का फ़ैसला लिखा हुआ था.

इमेज स्रोत, Getty Images
ओम प्रकाश चौटाला ने अजय सिंह चौटाला के बेटों, दुष्यंत सिंह चौटाला और दिग्विजय सिंह चौटाला को 2 नंवबर को ही पार्टी से निकाल दिया था.
पिता को पार्टी से निकाले जाने के फ़ैसले पर दिग्विजय सिंह चौटाला ने बीबीसी पंजाबी सेवा के संवाददाता अरविंद छाबड़ा से कहा है कि ओम प्रकाश चौटाला ने इस तरह के कोई निर्देश नहीं दिए हैं.
उन्होंने कहा, "17 नवंबर को जो पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक होनी है उसमें लोग किसका समर्थन करते हैं, उससे सारी सच्चाई जनता के सामने आ जाएगी."
दिग्विजय सिंह चौटाला के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इनेलो के राष्ट्रीय सचिव आर एस चौधरी ने अरविंद छाबड़ा से कहा, "पहले जब अजय के बेटों को पार्टी से निकाला गया था, तब भी वो कह रहे थे कि साज़िश हुई है. अब जब उनके पिता को निकाल दिया गया है तो भी वो साज़िश होने की बात कह रहे हैं. मुझे समझ नहीं आ रहा कि साज़िश है क्या?"

इमेज स्रोत, Getty Images
बहरहाल, अशोक अरोड़ा ने ये दावा किया है कि वो सिर्फ़ ओम प्रकाश चौटाला के आदेशों का पालन कर रहे हैं.
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला सूबे में अध्यापकों की भर्ती के एक मामले में धांधली करने की सज़ा काट रहे हैं.
उनके बड़े बेटे अजय सिंह चौटाला को भी इस मामले में दोषी पाया गया था. इन दिनों दोनों ही पैरोल पर जेल से बाहर हैं.
चौटाला परिवार के भीतर चल रहा विवाद हाल ही में सामने आया है. पार्टी की कमान किसके हाथ में जाएगी? इसपर चल रहे विवाद के बीच अजय सिंह चौटाला ने 17 नवंबर को हरियाणा के जींद ज़िले में एक बड़ी रैली बुलाई है.
हालांकि बुधवार को इनेलो के हरियाणा प्रभारी अशोक अरोड़ा ने अजय चौटाला की इस रैली को 'ग़ैर क़ानूनी' बताया और कहा कि इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला को ही स्पेशल बैठक या रैली बुलाने का अधिकार है.

इमेज स्रोत, Getty Images
विवाद शुरू कैसे हुआ?
शुरुआत में संघर्ष अभय चौटाला और उनके भतीजे दुष्यंत के बीच सामने आया था.
7 अक्तूबर को सोनीपत ज़िले में इनेलो की रैली थी. दो हफ़्ते की पैरोल पर ओम प्रकाश चौटाला भी जेल से बाहर आए थे और वो भी रैली में मंच पर मौजूद थे.
भीड़ के एक हिस्से ने अभय चौटाला के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी शुरू कर दी. इसका नतीजा ये हुआ कि ओम प्रकाश चौटाला ने दुष्यंत और दिग्विजय को पार्टी से निकाल दिया.
साथ ही इनेलो के युवा मोर्चे को भी भंग कर दिया. इसका नेतृत्व दिग्विजय सिंह चौटाला कर रहे थे.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
हालांकि दुष्यंत और दिग्विजय ने फ़ैसला मानने से इनकार कर दिया था. उनका कहना था कि इस तरह की कार्रवाई केवल उनके पिता अजय सिंह चौटाला ही कर सकते हैं.
इस घटना के बाद दुष्यंत चौटाला ने पूरे हरियाणा में घूमकर बैठकें शुरू कीं और ये मांग की कि पार्टी उन्हें बताये कि उन्होंने कौनसा अनुशासन तोड़ा है.
दूसरी तरफ़ अभय सिंह चौटाला ने अपने भतीजों से किसी भी तरह के मतभेद से इनकार किया था. उन्हें दुष्यंत और दिग्विजय के बारे में कहा था कि दोनों ही उनके बच्चे हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
2019 के लिए इसके क्या मायने हैं?
साल 2014 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में इनेलो को 24 फ़ीसदी वोट मिले थे.
90 सदस्यों वाली विधानसभा में 18 सीटों पर ही पार्टी को जीत मिली थी.
2019 में पार्टी उम्मीदवारों के चयन की ज़िम्मेदारी ओम प्रकाश चौटाला के पास है और वो ही तय करेंगे कि हिसार से दुष्यंत को लोकसभा का टिकट मिलेगा या नहीं.
दिग्विजय चौटाला के भविष्य का फ़ैसला भी ओम प्रकाश चौटाला ही करेंगे.
ज़ाहिर है कि अभय चौटाला भी चाहेंगे कि उनके भी दोनों बेटों को टिकट मिले.
ओम प्रकाश चौटाला और अजय सिंह चौटाला, दोनों पैरोल पर जेल से बाहर हैं.
लेकिन साल 2013 में इन्हें दोषी क़रार दिया गया था. सज़ा के अनुसार दोनों ही 6 सालों तक चुनाव नहीं लड़ सकते हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
इनेलो पार्टी के बारे में
चौटाला परिवार की जड़ें राजस्थान से जुड़ी हैं, लेकिन हरियाणा में सिरसा का चौटाला गाँव इस परिवार के कारण जाना जाता है.
इनोलो हरियाणा विधानसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी है. इसकी स्थापना ओम प्रकाश चौटाला के पिता देवी लाल ने की थी.
देवी लाल साल 1971 तक कांग्रेस में रहे थे. वो दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे.
साल 1977 में देवी लाल जनता पार्टी में आ गए और 1987 में लोकदल के साथ.
1989 में देवी लाल भारत के उप-प्रधानमंत्री बने. देवी लाल की पकड़ ग्रामीण मतदाताओं में अच्छी मानी जाती थी.
आगे चलकर देवी लाल के बड़े बेटे ओम प्रकाश चौटाला भी हरियाणा के तीन बार मुख्यमंत्री बने. ओपी चौटाला इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
ओपी चौटाला और उनके बड़े बेटे अजय सिंह चौटाला जूनियर बेसिक ट्रेनिंग टीचर्स की भर्ती में घपला करने में 10 साल की जेल की सज़ा काट रहे हैं.
ओपी चौटाला जेल से ही पार्टी के सारे अहम फ़ैसले लेते हैं. पार्टी शक्ति का दूसरा केंद्र ओपी चौटाला के छोटे बेटे अभय सिंह को माना जाता है.
अजय सिंह चौटाला की पत्नी नैना सिंह विधायक हैं. इनके दो बेटे हैं. दुष्यंत सिंह बड़े बेटे हैं और ये हिसार से लोकसभा सांसद हैं. छोटे बेटे दिग्विजय सिंह इनोलो के युवा मोर्चा के प्रमुख हैं.
इन दोनों को ही ओम प्रकाश चौटाला ने पार्टी से बाहर कर दिया है.
अजय सिंह चौटाला के भाई अभय सिंह चौटाला हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं.
साथ ही इनेलो हरियाणा प्रदेश यूनिट के महासचिव भी हैं. अभय सिंह चौटाला के भी दो बेटे हैं.
एक बेटा, करण सिरसा ज़िला परिषद का उपाध्यक्ष है और साथ में भारतीय ओलंपिक संघ में भी उपाध्यक्ष है.
वहीं दूसरा बेटा अर्जुन परिवार के साथ सिरसा ज़िले में अपने खेतों को देखता है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














