राजनीति और चुनाव पर कितना असर डालती है फ़ेक न्यूज़ #BeyondFakeNews

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- Author, नवीन नेगी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
संभव है कि आपको भी कभी ऐसा व्हाट्सएप्प मैसेज मिला हो कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज को दुनिया का सबसे बेहतरीन ध्वज घोषित किया जा चुका है. या भारत की करेंसी को यूनेस्को ने सर्वश्रेष्ठ घोषित किया है या आपका धर्म ख़तरे में है और उसे बचाने की ज़रूरत है.
अक्सर इस तरह के मैसेज मिलने पर हम उन्हें बिना जांचे परखे आगे फ़ॉर्वर्ड कर देते हैं और जाने-अनजाने फ़ेक न्यूज़ के मायाजाल में फंस जाते हैं.
फ़ेक न्यूज़ की समस्या से इस समय पूरी दुनिया परेशान है, इसी सिलसिले में बीबीसी ने एक रिसर्च जारी की है जिसके ज़रिए यह बात सामने आई कि लोग राष्ट्र निर्माण की भावना से राष्ट्रवादी संदेशों वाली फ़ेक न्यूज़ को साझा कर देते हैं.
यह रिसर्च बीबीसी के #BeyondFakeNews प्रोजेक्ट के तहत की गई है. यह ग़लत सूचनाओं के ख़िलाफ़ एक अंतरराष्ट्रीय पहल है.
बीबीसी ने अपनी रिसर्च में पाया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर हैंडल जितने अकाउंट को फ़ॉलो करता है उनमें से क़रीब 56 प्रतिशत वैरिफ़ाइड नहीं हैं. इन बिना वैरिफ़िकेशन वाले अकाउंट से 61 प्रतिशत बीजेपी का प्रचार होता है.
इस रिसर्च के बारे में बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल कहते हैं, "इस बात में कोई संदेह ही नहीं है कि फ़ेक न्यूज़ एक बहुत बड़ी चुनौती है. चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि चुनाव आने वाले हैं. 2019 के चुनावों के लिए अभी से बहुत से लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए हैं, जिनका काम ही फ़ेक न्यूज़ फैलाना है."

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हालांकि, गोपाल कृष्ण अग्रवाल ये भी कहते हैं कि जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आते हैं, विपक्ष के लोग कुछ भी बोलने और पोस्ट करने लग जाते हैं ताकि सरकार उनका जवाब देती फिरे.
वो कहते हैं, "कभी कोई गौ-रक्षा के नाम पर फ़ेक न्यूज़ फैला देता है तो कभी दलितों के नाम पर."
पर वो ये भी मानते हैं कि फ़ेक न्यूज़ न फैले ये सिर्फ़ सरकार के ही नहीं, सभी के हित में है. लेकिन इसे कंट्रोल कर पाना थोड़ा मुश्किल है.

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गोपाल मानते हैं कि सोशल मीडिया संचार का बेहतरीन माध्यम है लेकिन फ़ेक न्यूज़ की वजह से अब इस माध्यम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होने लगे हैं.
भारत में पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है जबकि कुछ ही महीनों में देश की जनता अपनी नई सरकार का चुनाव भी करने जा रही है.
ऐसे में फ़ेक न्यूज़ के और ज़्यादा विस्तार होने की आशंका है. इस पर राजनीतिक दल कैसे इस पर नियंत्रण करने की योजना बना रहे हैं.

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कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी कहती हैं, "फ़ेक न्यूज़ के आधार पर दंगे जैसी स्थिति बन जाती है. फ़ेक न्यूज़ के आधार पर दुकानें बंद कर दी जाती हैं. धंधे चौपट कर दिए जाते हैं. ये आने वाले समय में एक बहुत बड़ी चुनौती है. जिस पर पूरे देश और समाज को गंभीर रूप से विचार करना होगा. हम देख रहे हैं बहुत सारे ऐसे अकाउंट आये हैं, वेबसाइट बनी हैं जो ये देखते रहते हैं कि कौन-सी फ़ेक न्यूज़ है. बहुत सारे अख़बार हैं जो फ़ेक न्यूज़ रिपोर्ट करते हैं. फिर भी जिस तरह से ग़लत ख़बरें वायरल होती हैं और ग़लत ख़बरों की वजह से हम जैसे लोगों को धमकियां मिलती हैं उसमें भी अंतर बहुत है. उस अंतर को जल्द से जल्द कम करना बहुत ज़रूरी है."
बीबीसी ने फेक न्यूज़ के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए सोमवार को देश के सात शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए थे. ये सात शहर दिल्ली, लखनऊ, अहमदाबाद, चेन्नई, हैदराबाद, अमृतसर और पुणे हैं.
इन कार्यक्रमों में राजनीति, पत्रकारिता और फ़िल्मी दुनिया से जुड़े कई जाने-माने चेहरों ने हिस्सा लिया. सभी मेहमानों ने फे़क न्यूज़ की समस्या को गंभीर चुनौती माना.

आईआईटी दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में फ़िल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने कहा,"आज के ज़माने में हम भारत में ऐसी स्थिति में हैं जहां ऐसा भी हुआ है कि बड़े बड़े न्यूज़ ऑर्गेनाइजेशन हैं, उन्होंने फ़ेक न्यूज़ को डाला है तो फिर क्या कर सकते हैं आप? फिर हम ऐसी स्थिति में है कि किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता.या तो इंसान काम करे, नौकरी करे और पैसे कमाए या इंसान गूगल पर बैठकर फ़ेक न्यूज़ को वैरिफ़ाई करता रहे, फ़ैक्ट चेक करते रहे. दिक्क़त है. जहां तक होता है मैं बचती हूं और जहां ग़लती हो गई मैं माफ़ी मांग लेती हूं."
इसी तरह चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम में अभिनेता प्रकाश राज ने कहा कि इन दिनों फ़ेक न्यूज़ तेज़ी से फैल रही है. वह इतने सधे हुए तरीके़ से फैलाई जाती है कि लोगों के दिमाग़ में ज़रा भी शक नहीं होता.
बीबीसी के महानिदेशक टोनी हॉल ने इस मुहिम की सराहना की है और कहा है कि साल 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान बीबीसी रियलिटी चैक करेगी.
फे़क न्यूज़ से बचने का सबसे कारगर तरीका है जागरुक और सचेत होना. आगे से जब कभी भी आपके मोबाइल में कोई संदेश आए तो उसे जांचना परखना ना भूलें.
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