एमनेस्टी इंटरनेशनल पर प्रवर्तन निदेशालय का छापा

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने गुरुवार को बेंगलुरु स्थित ग़ैर-सरकारी संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल (इंडिया) के कार्यालय पर छापेमारी की. बीबीसी को कम से कम दो स्रोतों ने ऐसी जानकारी दी है.
एमनेस्टी कार्यालय में काम करने वाले एक अधिकारी ने नाम नहीं लेने की शर्त पर बीबीसी को बताया, "जी हां, यह रेड दो बजे शुरू हुई. हमारे रिसर्चर्स और दूसरे प्रशासनिक अधिकारियों के फोन ले लिए गए."
एमनेस्टी के ही एक दूसरे कर्मचारी ने बीबीसी को बताया, "हमें नहीं पता है कि उन्होंने छापा क्यों मारा क्योंकि हमारा कोई भी फ़ंड फ़ेमा यानी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत नहीं आता है."
हालांकि शुक्रवार को एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस पर बयान जारी किया.
इस बयान में एमनेस्टी इंटरनैशनल ने भारत के कार्यकारी निदेशक आकर पटेल ने कहा, "सरकार मानवाधिकार संगठनों के साथ आपराधिक उपक्रम की तरह व्यवहार कर रही है. क़ानून के शासन को लेकर प्रतिबद्ध संगठन के रूप में भारत में हमारा संचालन यहां के क़ानून के मुताबिक होता है. हम पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर काम करते हैं. हम प्रधानमंत्री की उस बात के साथ अधिक सहमत नहीं हो सकते हैं जिसमें वो कहते हैं कि आपातकाल जैसी दमनकारी अवधि ने भारत के इतिहास पर दाग लगाया है. अफसोस की बात यह है कि उन जैसे बुरे दिनों की एक बार फिर भारत पर छाया पड़ रही है. मानवाधिकारों की रक्षा के बजाय, सरकार अब उन लोगों को निशाना बना रही है जो उसके लिए लड़ते हैं."
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़डीआई) के नियमों का उल्लंघन किया और एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एआईआई) नाम से एक नई कंपनी के खाते में 36 करोड़ रुपए प्राप्त किए.
ईडी के अनुसार, ''जब गृह मंत्रालय ने एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया फ़ाउंडेशन ट्रस्ट (एआईआईएफ़टी) को एफ़सीआरए 2010 के तहत इजाज़त देने से इंकार कर दिया तब उन्होंने एआईआईपीएल नाम से दूसरा रास्ता अपनाया.''
बयान में कहा गया, ''यह कंपनी कमर्शियल तरीक़ों से अभी तक 36 करोड़ रुपए का विदेशी निवेश प्राप्त कर चुकी थी. इस रक़म में से 10 करोड़ रुपए लंबी अवधी के कर्ज़ के तौर पर लिया गया था.''
वहीं, देर रात एमनेस्टी इंडिया ने अपनी ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया और केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए. ट्वीट में कहा गया, "एमनेस्टी इंडिया पर ईडी के छापे सत्ता पर सवाल उठाने वाले संगठनों को चुप करने के लिए सरकार का परेशान करने वाला रवैया दिखाते हैं. यह साफ़तौर से दिखाता है कि सरकार नागरिक समाज के संगठनों में ख़ौफ़ भरना चाहती है."
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ग्रीनपीस पर भी हुए थे छापे
एमनेस्टी इंटरनेशनल पर यह कार्रवाई वैश्विक पर्यावरण एनजीओ ग्रीनपीस के कार्यालयों पर हुई छापेमारी के तीन सप्ताह बाद हुई है.
भारत में ग़ैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा विदेशों से फ़ंड इकट्ठा करना एक विवादास्पद मुद्दा रहा है.
अप्रैल 2015 में सरकार ने क़रीब 9000 ऐसी संस्थाओं के पंजीकरण रद्द कर दिए थे जिन्हें विदेशों से फ़ंड मिलता था. सरकार ने कहा था कि ये संस्थाएं भारत के टैक्स क़ानून का पालन नहीं कर रही हैं.

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ग्रीनपीस के प्रवक्ता ने नाम नहीं लिए जाने की शर्त पर बताया, "हमारे यहां जो रेड शुरू हुई वो सुबह साढे़ ग्यारह बजे से लेकर शाम छह बजे तक चली. वो बिना किसी वॉरंट के आए थे. हम फ़ेमा के तहत नहीं आ सकते हैं क्योंकि हमारा फ़ंड देश के भीतर से ही आता है."
"हमने फ़ंड जुटाने की गतिविधियों के लिए एक दूसरी कंपनी को आउटसोर्स कर रखा है. लेकिन उन्होंने हमारे बैंक अकाउंट फ्रीज़ कर दिए और हमें इस बारे में बताया भी नहीं गया. ये सूचना भी हमें एक बैंक से मिली कि उन्होंने हमारे दर्जनों अकाउंट फ्रीज़ कर दिए हैं."
ग्रीनपीस के अधिकारियों ने दावा किया कि ईडी के अधिकारी न तो वॉरंट की कॉपी दिखा सके और न ही वो शिकायत की कॉपी जिसके आधार पर ये रेड डाली गई थी.
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ग्रीनपीस का कहना है कि उनका संगठन भारत में पर्यावरण से जुड़े काम में ख़र्च होने वाला हर रुपया जागरुक लोगों का दान किया गया होता है. बयान में कहा गया है कि ऐसा लगता है कि इस देश में लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने का अभियान चल रहा है.
ग्रीनपीस ने कर्नाटक हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है और अगले सोमवार को इस पर सुनवाई होनी है.
वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने ट्वीट कर सरकार के इस क़दम पर हमला किया है. भूषण ने कहा कि ये सरकार अपने हर आलोचक को परेशान कर रही है और ये भारत में सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग है.
उधर, कर्नाटक में कांग्रेस के प्रवक्ता रिज़वान अरशद ने एक बयान जारी कर कहा, "जो भी ग़ैर-सरकारी संस्था सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाती है, उस पर सरकार रेड कर देती है. प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई और आईबी के पास सरकार के भीतर भ्रष्ट लोगों को बचाने के लिए अलावा कोई काम नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी सिर्फ़ भ्रष्टों की हिफ़ाज़त कर रहे हैं."
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