अमृतसर रेल हादसाः दशहरा आयोजन की इजाज़त आख़िर किसने दी?

- Author, रविंदर सिंह रॉबिन
- पदनाम, पंजाब से बीबीसी हिंदी के लिए
अमृतसर में रावण दहन के दौरान हुए हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा था कि क्या जौड़ा फ़ाटक के पास धोबी घाट में दशहरा आयोजन के लिए आयोजकों ने प्रशासन और नगर निगम से इजाज़त ली थी?
इस घटना के तुरंत बाद अमृतसर पुलिस ने आयोजन की अनुमति के सवाल पर साफ़ उत्तर नहीं दिया था. लेकिन डीसीपी अमरीक सिंह पवार ने जानकारी दी, ''पुलिस ने इस आयोजन की अनुमति दी थी लेकिन ये शर्त थी कि अमृतसर नगर निगम से उस जगह पर आयोजन की इजाज़त ली जाए. अगर नगर निगम अनुमति नहीं देता तो पुलिस सुरक्षा की इजाज़त का सवाल ही ख़त्म हो जाता है.''
19 अक्टूबर को दशहरा आयोजन में हुए हादसे में 58 लोगों की जान चली गई थी और अब इसके दो दिन बाद दशहरा कमिटी के अध्यक्ष सौरभ मदन मिट्ठू ने सोशल मीडिया पर दो मिनट 14 सेकेंड का एक वीडियो साझा किया.
इस वीडियो में उन्होंने कहा, ''मैंने आयोजन से जुड़ी हर तरह की इजाज़त ली थी. रावण पुतले के लिए 20 फुट का घेरा रखा गया था. अमृतसर नगर निगम की ओर से पानी के टैंक और दमकल भी मंगवाए गए थे. ये दशहरा का आयोजन धोबी घाट मैदान के भीतर किया गया था ना कि रेलवे ट्रैक पर.''

इमेज स्रोत, Getty Images
इस पूरी स्थिति को साफ़ करते हुए अमृतसर नगर निगम की कमिश्नर सोनाली ने बताया, ''हमने ऐसे किसी भी आयोजन की इजाज़त नहीं दी थी.''
आयोजन स्थल पर पानी के टैंक और दमकल भेजने के सवाल पर उन्होंने बीबीसी को बताया, ''यहां कोई एंबुलेंस और दमकल मुहैया नहीं कराया गया. रही बात पानी के टैंक देने की बात तो वो हमने उस इलाके के पार्षद के कहने पर दिए थे. इस आयोजन के बारे में हमें नहीं बताया गया था. ना ही मौखिक इजाज़त ली गई और ना ही लिखित.''
अमृतसर के मेयर करमजीत सिंह रिंटू ने भी साफ़-साफ़ इंकार करते हुए कहा, ''आयोजकों ने इस आयोजन के लिए आवेदन तक नहीं दिया था. ऐसे आयोजनों में फ़ायर ब्रिगेड विभाग और स्वास्थ्य विभाग से भी इजाज़त लेनी पड़ती है. जो कि आयोजकों ने नहीं ली.''
इस विवाद के बीच 15 अक्टूबर की तारीख के साथ एक चिट्ठी भी सामने आई है. इसमें दशहरा समारोह के आयोजक सौरभ मदन मिट्ठू अमृतसर के डीसीपी से आयोजन के मेहमान और राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग कर रहे हैं.

इमेज स्रोत, Reuters
मोहकामपुर के एसएचओ ने एक रिपोर्ट में बताया है कि आयोजकों को हरी झंडी लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के मामले में दी गई थी. उन्हें कहा गया था कि वे लाउडस्पीकर के मामले में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश का पालन करें.
इस रिपोर्ट में मैदान में 20 हज़ार लोगों के इकट्ठा होने की इजाज़त दी गई थी.
हालांकि ये अहम विषय है कि एक एकड़ से भी कम क्षेत्रफल में फैले धोबी घाट मैदान में 20 हज़ार लोग उसकी क्षमता से काफ़ी ज़्यादा है. यहां अंदर आने और बाहर जाने के लिए सिर्फ़ एक ही गेट दिया गया है जो लगभग 10 फुट तक चौड़ा है. आयोजन के वक्त वीआईपी एंट्री को मंच के पीछे तैयार किया गया था.
लोगों की सहूलियत के लिए मैदान में बड़ी एलईडी स्क्रीन रेलवे ट्रैक की दिशा में भी लगाई गई थी. बड़ी मात्रा में लोग ट्रैक पर खड़े होकर स्क्रीन पर आयोजन देख रहे थे.

इमेज स्रोत, Getty Images
अमृतसर पुलिस ने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 304, 304 ए, 337 और 338 के तहत एफ़आईआर दर्ज की है.
वहीं दूसरी ओर रेलवे पुलिस के एडिशनल डायरेक्टर जनरल इक़बाल प्रीत सिंह सहोता ने बताया कि चार लोगों की एसआईटी बनाई गई है जो मामले की जांच और हादसे में रेलवे की भूमिका की जांच करेगी.
डिप्टी कमिश्नर कमलदीप सिंह संघा ने बताया है कि कई शवों को अब तक पहचाना नहीं जा सका है.
बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












