बीएचयू में एक बार फिर पसरा तनाव, हिंसा और आगजनी

बीएचयू

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    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

वाराणसी का काशी हिन्दू विश्वविद्यालय यानी बीएचयू परिसर एक बार फिर हिंसक गतिविधियों का शिकार हो गया है.

यहां के सर सुन्दर लाल अस्पताल में किसी मरीज़ की एक बेड की मांग से डॉक्टरों के साथ शुरू हुआ विवाद मार-पीट, हिंसा, तोड़-फोड़, आगजनी और फिर धरना प्रदर्शन में तब्दील हो गया.

जूनियर डॉक्टर इस समय अपनी मांगों को लेकर वीसी कार्यालय के पास स्थित एलडी गेस्ट हाउस के बाहर धरने पर बैठे हैं और पूरे परिसर में बड़ी संख्या में पुलिसबल और पीएसी को तैनात किया गया है.

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इमेज कैप्शन, हड़ताल से मरीज़ हैं परेशान

इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने 28 सितंबर तक शैक्षणिक कार्य स्थगित करने और रेज़िडेंट डॉक्टरों को 24 घंटे के भीतर छात्रावास खाली करने का अल्टीमेटम दिया है.

बताया जा रहा है कि सोमवार को किसी मरीज़ के साथ बीएचयू परिसर स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल में आए उनके परिजनों ने जूनियर डॉक्टरों के साथ कथित तौर पर मारपीट की. यही नहीं, मेडिकल छात्रों के साथ बाहर से आए कुछ लोगों ने धन्वंतरि छात्रावास में घुसकर मारपीट की.

इस घटना के बाद रेज़ीडेंट डॉक्टरों ने परिसर में तोड़फोड़ और आगजनी की. कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया और एटीएम में भी तोड़-फोड़ की गई. हिंसा में कई जूनियर डॉक्टर भी गंभीर रूप से घायल हो गए.

विवाद के बाद परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी को बुला लिया गया. मंगलवार सुबह विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से एलबीएस, रुइया एनेक्सी और धन्वंतरि हॉस्टल खाली कराने के आदेश जारी कर दिए गए तो वहीं 28 सितंबर तक के लिए विश्वविद्यालय में अवकाश घोषित कर दिया गया.

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हॉस्टल खाली कराने संबंधी विश्वविद्यालय प्रशासन के आदेश से छात्रों का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर आ गया. कई छात्र तो हॉस्टल खाली भी करने लगे लेकिन ज़्यादातर छात्र प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में धरने पर बैठ गए हैं. छात्र चीफ़ प्रॉक्टर प्रोफ़ेसर रोयाना सिंह को हटाने की मांग कर रहे हैं.

धरने में शामिल एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हम हॉस्पिटल में पिट भी रहे हैं, हमें कोई सुरक्षा भी नहीं दी जा रही है. दूसरे हमसे ही हॉस्टल खाली कराया जा रहा है. हॉस्पिटल में आए दिन मरीज़ों के तीमारदार जूनियर डॉक्टरों से मारपीट करते हैं लेकिन डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन कभी गंभीर नहीं दिखता."

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इस बीच, बीएचयू स्थित ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों ने पूरी तरह से अपनी सेवाएं देना बंद कर दिया है.

स्थानीय पत्रकार नीलांबुज तिवारी कहते हैं, "'ट्रॉमा सेंटर में दुर्घटनाग्रस्त मरीज़ आते हैं, ऐसे में लोगों को बहुत परेशानी हो रही है. सर सुंदरलाल अस्पताल के सभी जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं, सिर्फ़ सीनियर डॉक्टर ही मरीज़ देख रहे हैं. लेकिन समस्या ये है कि सैंपलिंग और जांच का काम तो सब जूनियर डॉक्टर ही करते हैं, इसलिए मरीज़ों को काफ़ी परेशानी हो रही है."

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बीएचयू का सर सुंदरलाल अस्पताल न सिर्फ़ वाराणसी बल्कि आस-पास के कई ज़िलों के लोगों के लिए इलाज का भरोसेमंद स्थान है. बड़ी संख्या में लोग यहां इलाज के लिए आते हैं.

घटना के बाद से ही परिसर में जहां एक ओर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. वहीं, अस्पताल में मरीज़ों के परिजन इधर-उधर भटक रहे हैं. हालांकि, अस्पताल के अधीक्षक प्रोफ़ेसर विजयनाथ मिश्र का दावा है कि अस्पताल में ज़रूरी सेवाएं निर्बाध रूप से चल रही हैं.

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