इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में वीसी के ख़िलाफ़ छात्र संगठन क्यों हुए लामबंद?

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, इलाहाबाद से, बीबीसी हिंदी के लिए
इलाहाबाद में विभिन्न संगठनों से जुड़े छात्र पिछले एक हफ़्ते से विश्वविद्यालय परिसर में जगह-जगह और कुलपति आवास के बाहर लगातार नारेबाज़ी और प्रदर्शन करके उनके इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.
वाइस चांसलर प्रोफ़ेसर रतनलाल हांगलू के ख़िलाफ़ इससे पहले भी कई बार विरोध प्रदर्शन हुए हैं लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है.
वीसी प्रोफ़ेसर रतनलाल हांगलू की एक महिला के साथ कथित तौर पर कुछ आपत्तिजनक बातचीत वायरल होने और फिर इन ख़बरों के मीडिया में आने के बाद छात्र सड़कों पर उतर आए हैं.
दिलचस्प बात ये है कि आमतौर पर एक-दूसरे के विरोध में रहने वाले तमाम छात्र संगठन इस मुद्दे पर एक साथ हैं- चाहे वो एबीवीपी हो, समाजवादी युवजन सभा हो, एनएसयूआई हो या फिर वामपंथी छात्र संगठन.

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कैसे शुरू हुआ विवाद
बताया जा रहा है कि वायरल हुए ऑडियो टेप में वीसी हांगलू एक महिला के साथ अपने अंतरंग रिश्तों की बात तो कर ही रहे हैं, महिला को अपने पद का लाभ पहुंचाने का भरोसा भी दे रहे हैं. हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन इस बातचीत को फ़र्जी बता रहा है लेकिन इन ऑडियो टेप्स को सबके सामने लाने वाले छात्र नेता अविनाश दुबे कुछ और ही कहते हैं.
बीबीसी से बातचीत में अविनाश दुबे ने बताया, "महिला दिल्ली में रहती हैं लेकिन उनका संबंध इलाहाबाद से है. उन्होंने ख़ुद मुझे वीसी के साथ हुई बातचीत के टेप उपलब्ध कराए हैं. वॉट्सऐप पर व्यक्तिगत चैट के स्क्रीनशॉट् तो उन्होंने मुझे दिए ही हैं, इसके अलावा भी कई बातें बताई हैं जो बेहद आपत्तिजनक हैं. मैं जब आश्वस्त हो गया कि इन ऑडियो टेप्स में वीसी हांगलू की ही आवाज़ है तो जनहित देखते हुए मैंने इसे अपने फ़ेसबुक अकाउंट के ज़रिये सार्वजनिक कर दिया."

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ऑडियो टेप्स के सार्वजनिक होने के बाद से ही छात्रों का आक्रोश सड़कों पर दिखने लगा और देखते-देखते सभी छात्र संगठनों से जुड़े लोगों ने वीसी हांगलू के ख़िलाफ़ एकसाथ मोर्चा खोल दिया. हालांकि शुरू में विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार इसे ग़लत और वीसी के ख़िलाफ़ साज़िश बताता रहा लेकिन मामला गंभीर होने के बाद एसटीएफ़ से इन टेप्स और चैट्स की सत्यता की जांच कराने का फ़ैसला किया गया.
वीसी के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा
आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ विश्वविद्यालय में मौजूद छात्र संघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह का आरोप है कि प्रोफ़ेसर हांगलू का इससे पहले का कार्यकाल भी काफ़ी विवादित रहा है. वह कहती हैं, "साल 2016 में विश्वविद्यालय के विमेन एडवाइज़री बोर्ड (वैब) को कल्याणी विश्वविद्यालय की एक छात्रा की मां ने पत्र लिखा था जिसमें कुलपति पर कई संगीन आरोप लगाए गए थे. महिला ने बोर्ड से अपील की थी कि वो विश्वविद्यालय की छात्राओं को कुलपति से बचाए. इससे ज़्यादा शर्मनाक बात और क्या हो सकती है? लेकिन वीसी के ख़िलाफ़ किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई बल्कि उनके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वालों को ही ख़ामोश करने की कोशिश होती रहती है."

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छात्रसंघ के एक अन्य पूर्व अध्यक्ष और एबीवीपी नेता रोहित मिश्र काफ़ी ग़ुस्से में दिखते हैं, "इस्तीफ़ा तो हम लेकर ही रहेंगे. जब तक इन्हें यहां से हटाया नहीं जाता, तब तक छात्र सड़कों पर संघर्ष करते रहेंगे. हमारे साथ शहर के तमाम बुद्धिजीवी और विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व पदाधिकारी भी सड़क पर उतरेंगे. अफ़सोस तो इस बात का है कि हमारी सरकार इतने संगीन आरोप के बावजूद इतने संवेदनशील मसले पर चुप्पी साधे हुए है."
छात्रों की नाराज़गी इस बात को लेकर भी है कि इतने संगीन आरोप लगने और इससे पहले भी उनके ख़िलाफ़ कई अन्य शिकायतों के बावजूद वीसी पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. छात्रों के समर्थन में अब सिविल सोसाइटी के लोग भी आ गए हैं लेकिन विश्वविद्यालय के तमाम अध्यापकों और अध्यापक संघ का समर्थन वीसी को मिल रहा है.
छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष दिनेश यादव कुलपति को बर्ख़ास्तगी की मांग करते हैं. वहीं विश्वविद्यालय के आम छात्र इस पूरे प्रकरण से बेहद आहत हैं. सीनेट हॉल के बाहर खड़े कुछ छात्रों से हमने इस बारे में बात की तो उनका कहना था कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए क्योंकि इतनी बड़ी संस्था के शीर्ष अधिकारी के बारे में जो कुछ सुनने में आ रहा है, वो छात्रों को हैरान करने वाला तो है ही, पठन-पाठन का माहौल भी ख़राब हो रहा है.

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विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष
वीसी प्रोफ़ेसर हांगलू से इस पूरे प्रकरण पर बात करने की कोशिश की गई लेकिन वो मिले नहीं, पर विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉक्टर चितरंजन कुमार ने बीबीसी से विस्तार से बात की.
चितरंजन कुमार का कहना है, "ये पूरा का पूरा मामला फ़र्जी है, एसटीएफ़ इनकी सत्यता की जांच कर रहा है. वीसी प्रोफ़ेसर हांगलू ख़ुद कह चुके हैं कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती वो विश्वविद्यालय परिसर में नहीं आएंगे. ऐसे में कुछेक लोगों के आंदोलन करने का कोई औचित्य नहीं है. एक बात और बता दूं कि आंदोलन करने वाले वही छात्र हैं जिन्हें विश्वविद्यालय से निलंबित किया जा चुका है या फिर वो ख़ुद किन्हीं विवादों में हैं और प्रशासन उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहा है."
चितरंजन कुमार का दावा है कि विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षक संघ के प्रतिनिधि, विश्वविद्यालय से जुड़े डिग्री कॉलेजों के शिक्षक और प्राचार्य प्रोफ़ेसर हांगलू के समर्थन में हैं लेकिन कई शिक्षकों और शिक्षक संघ के कुछ पूर्व पदाधिकारियों ने शनिवार को एक राष्ट्रपति के नाम एक पत्र लिखकर वीसी के ख़िलाफ़ लगे तमाम आरोपों की जांच करने की मांग की है.

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कुलपति प्रोफ़ेसर हांगलू फ़िलहाल छुट्टी पर चले गए हैं और प्रोफ़ेसर केएस मिश्र को कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया गया है. कार्यवाहक कुलपति ने मामले की जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अरुण टंडन की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी है लेकिन आंदोलन कर रहे छात्रों ने जांच कमेटी की निष्पक्षता पर संदेह जताया है.
विश्वविद्यालय के पीआरओ डॉक्टर चितरंजन सिंह का कहना है कि 24 सितंबर से लेकर 26 सितंबर तक वॉट्सऐप चैट और ऑडियो टेप के संबंध में जिसके पास भी कोई साक्ष्य हो, जांच कमेटी को दे सकता है. इन सबके बीच ये संयोग ही है कि विश्वविद्यालय आज यानी 23 सितंबर को अपना 132 वां स्थापना दिवस भी मना रहा है.
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