'पहले मुझे घुटन हुई और फिर नाक से खून निकलने लगा'

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- Author, कमलेश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
जेट एयरवेज़ की मुंबई से जयपुर जा रही फ्लाइट में गुरुवार को केबिन प्रेशर कम होने से यात्रियों को सांस लेने और नाक-कान से खून निकलने की समस्या हो गई थी.
इस विमान में 166 यात्री सवार थे और कुछ समय के लिए सबकी जान पर बन आई थी. जेट एयरवेज़ के एक क्रू मेंबर के केबिन प्रेशर को मेंटेन रखने वाला बटन दबाना भूलने के कारण ये हादसा हुआ था.
विमान सवार कुछ यात्रियों ने उस वक़्त का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर भी किया था जिसमें देखा जा सकता था कि यात्री परेशान हैं और कुछ के नाक और कान से खून भी निकल रहा है.
इस विमान में सवार एक यात्री दर्शक हाथी ने विमान के अंदर के हालातों के बारे में बताया. उस दिन क्या-क्या हुआ पढ़ें आगे—
''सुबह 6 बजे मुंबई से जब फ्लाईट ने उड़ान भरी तो शुरू से ही कूलिंग कम थी. थोड़ी देर सब ठीक चला फिर अचानक मास्क नीचे आ गए. हमें समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों हुआ है क्योंकि कोई अनाउंसमेंट भी नहीं हुई थी. इसके बाद धीरे-धीरे सांस लेने में दिक्कत होने लगी और घुटन सी महसूस होने लगी. हमें लगा कि मास्क इसी वजह से बाहर आ गए हैं.
फिर पायलट ने निर्देश दिए कि मास्क पहनकर सांस लेते रहें. लेकिन, मुझे लग रहा था कि मास्क पहनने का ख़ास फ़ायदा नहीं है क्योंकि ऑक्सीजन ठीक से आ नहीं रही थी.
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मेरे आसपास बैठे लोग भी काफ़ी बैचेन हो रहे थे. वो कभी मास्क निकालते, तो कभी पहनते. उन्हें भी कोई फ़ायदा नहीं लग रहा था. फिर प्रेशर की वज़ह से सिर और कान में दर्द होना शुरू हो गया.
धीरे-धीरे सभी को कुछ न कुछ दिक्कत होने लगी. कुछ लोगों के नाक और कान से ख़ून भी निकलने लगा. कुछ लोग इतना डर गए थे कि जान बचेगी या नहीं सोचने लगे थे. वहीं, कुछ लोगों को ये नहीं पता था कि मास्क को नीचे की तरफ़ खींचना पड़ता है. इस कारण वो मास्क इस्तेमाल ही नहीं कर पा रहे थे. मैंने आसपास के कुछ लोगों को बताया लेकिन फिर भी लोग इससे जूझ रहे थे.
एक बड़ी परेशानी ये थी कि कोई बता ही नहीं रहा था कि प्लेन में क्या दिक्कत आई है और आगे क्या होने वाला है. हमें नहीं पता था कि वो प्लेन आगे ले जाएंगे या हम लौटेंगे. साथ ही प्लेन में टर्बुलेंस भी हो रहा था. फिर भी लोग अपनी-अपनी तरह से मैनेज कर रहे थे. कुछ तो बहुत ज़्यादा डर गए थे.
हमने ऐयर हॉस्टेस को मदद के लिए बुलाया लेकिन उन्होंने भी मना कर दिया क्योंकि वो भी मास्क का इस्तेमाल कर रही थीं. सब एक-दूसरे की हालत देख रहे थे. किसी के नाक से तो किसी के कान से ख़ून निकल रहा था. फ़्लाइट में कुछ बुर्जुग भी मौजूद थे और उनके लिए ये बहुत बड़ी समस्या थी.

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जब वापस लौटा विमान
करीब 40 से 45 मिनट तक हम इसी घबराहट और बैचनी में रहे. इसके बाद राहत तब मिली जब 6:45 बजे पायलट ने अनाउंस किया कि फ़्लाइट मुंबई वापस लौट रही है. अब जाकर हमें कुछ तो पता था कि आगे क्या होने वाला है.
पर फ़्लाइट के लैंड होते ही प्लेन के अंदर सफ़ेद-सफ़ेद धुंआ भर गया. फिर पायलट ने हमें थोड़ा पीठ झुकाकर बैठने के लिए कहा. थोड़ी देर तक यही स्थिति रही और फिर हम बाहर निकले.
प्लेन से बाहर आने के बाद हमने एयरहॉस्टेस से पूछा कि क्या हुआ था तो उन्होंने ज़वाब दिया कि हमें नहीं पता. फिर डॉक्टर्स को बुलाया और जिन लोगों के ख़ून निकल रहा था उन्हें आइसपैक दिया गया. फिर भी कुछ नहीं हुआ तो उन्हें नानावती अस्पताल भेज दिया गया.
लोगों ने ग्राउंड स्टाफ़ से रिफ्रेशमेंट और पानी मांगा, जो करीब आधे-एक घंटे के बाद दिया गया लेकिन वो भी सबको नहीं मिला. हैरानी ये थी कि नीचे आने के बाद भी कोई ख़ास इंतजाम नहीं थे. ये इमरजेंसी की हालत थी लेकिन ग्राउंड स्टाफ़ का रवैया ठीक नहीं था. हम उनसे कुछ पूछ रहे थे पर वो बता नहीं रहे थे.
कुछ लोग की बहस भी हो गई. लोग परेशान हो गए थे कि न उन्हें कोई जानकारी थी और न कुछ खाने-पीने के लिए मिल रहा था.''
फ्लाइट के वापस मुंबई आने पर इंतजामों को लेकर और भी यात्री नाराज़ दिखे. इसी तरह विमान में सवार सतीश नायर ने भी अपने अनुभव बताए.
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सतीश नायर
''फ्लाइट उड़ने के एक दो मिनट बाद ही मुझे कान में दर्द महसूस हुआ. मुझे लगा कि शायद ज़ुकाम की वज़ह से हुआ होगा. फिर दस मिनट के अंदर लगा कि कंधा भारी हो गया. सांस लेने में दिक्कत होने लगी और आंखों के आगे अंधेरा सा छा गया.
तभी ऑक्सीजन मास्क निकल आया और मैंने तुरंत उसे लगा लिया. लेकिन, तभी मेरी नाक से खून निकलना शुरू हो गया और मुझे घबराहट होने लगी. तब मैंने देखा कि आसपास के लोगों को भी इसी तरह की दिक्कत हो रही है.
दरअसल, ये सुबह-सुबह की फ़्लाइट थी इसलिए कई लोग सोए भी हुए थे. उनकी नींद ही दर्द या सांस में परेशानी के कारण खुली. लोगों को समझ ही नहीं आ रहा था कि प्लेन में क्या हुआ है.
हम इसलिए भी परेशान थे क्योंकि कुछ बताया नहीं जा रहा था. वो लोग निर्देश तो देते हैं कि आपातकाल में क्या करना है लेकिन ये हक़ीक़त थी और उन्हें बताना चाहिए थे. कई बार मास्क ऐसे भी निकल आता है तो मुझे भी लगा कि शायद कोई बड़ी बात नहीं है.

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तभी एक महिला यात्री ज़ोर से चिल्लाई कि हमें करना क्या है, मुझे चक्कर आ रहा है. तब जाकर क्रू को लगा कि कुछ जानकारी देनी चाहिए.
हालांकि, मेरे साथ ज़्यादा समस्या नहीं हुई लेकिन जब प्लेन ने लैंड किया तो पता चला कि हालत कितनी गंभीर थी.
हैरानी वाली बात ये है कि इतनी बड़ी इमरजेंसी हो गई लेकिन वहां सिर्फ एक एंबुलेंस थी और कोई डॉक्टर नहीं था. फिर जिन यात्रियों के ख़ून निकल रहा था उन्हें अलग कर दिया गया और उन्हें एयरपोर्ट की बस में बैठाकर शुरुआती इलाज के लिए टर्मिनल भेज दिया.
मेरा ख़ून रुक गया था इसलिए मैं उस बस में गया जिसमें वो यात्री थे जिन्हें ज्याद परेशानी नहीं थी. फिर हमें बैगेज के एरिया में भेज दिया गया. वहां भी ग्राउंड स्टाफ़ और सीआईएसएफ़ को इस घटना की जानकारी नहीं थी.
फिर दो अधिकारी आए तो उन्होंने हमारे लिए डॉक्टर का इंतजाम किया. काफ़ी देर बाद खाने-पीने का सामान दिया गया. फ़्लाइट दोबारा 11:15 बजे निकली तब तक हमने वहीं इंतजार किया.

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पांच यात्री नानावती भेजे गए
जिन यात्रियों की हालत गंभीर थी उन्हें नानावती अस्पताल भेजा गया.
नानावती अस्पताल के चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफ़ुसर ने बताया कि 20 सितंबर को दोपहर 11 या 12 बजे के करीब एयरपोर्ट से पांच मरीज लाए गए थे. सभी का इलाज ईएनटी विशेषज्ञ ने किया. उन्हें नाक और कान से ख़ून निकलने के साथ बेरोट्रॉमा हो गया था यानि शरीर में दबाव का असंतुलन बन गया था. मेडिकल टीम ने उनका इलाज किया और धीरे-धीरे उनकी हालत सामान्य हो गई.
डॉक्टर ने उन्हें अगले एक हफ़्ते तक यात्रा न करने और सात दिन बाद फिर से दिखाने की सलाह दी है.

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प्रेशर कम हो, तो क्या होता है?
गंगाराम में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मोहसिन वली बताते हैं कि ये बहुत गंभीर स्थिति थी. यह ख़ुशकिस्मती थी कि विमान सही समय पर लौट आया. ऐसी हालत में ज़्यादा से ज़्यादा दो घंटे तक ज़िंदा रहा जा सकता है.
दरअसल, शरीर के अलावा वायुमंडल में भी हवा का प्रेशर होता है. विमान के उड़ने पर उसमें ये प्रेशर ख़त्म हो जाता है और फिर कृत्रिम रूप से प्रेशर बनाया जाता है. अगर ये हवा विमान में नहीं होगी तो शरीर के अंग फूलने लगेंगे और नसें फटने लगेंगी. शरीर के अंदर और बाहर के प्रेशर का संतुलन बिगड़ जाएगा.
इसके अलावा विमान में सवार लोगों को ऑक्सीजन की भी कमी हुई होगी.

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ऐसी स्थिति में उंगलियां सुन्न पड़ जाती हैं और हल्की झनझनाहट होती है. सांस लेने में दिक्कत, नाक बंद लगना, नाक से ख़ून आना कान में दर्द, बहुत तेज सिरदर्द, जोड़ों में दर्द और घबराहट होती है. एक तरह से शरीर को हवा की कमी महसूस होती है.
इससे ईयरड्रम्स को नुकसान पहुंचता है और स्थायी बहरापन भी हो सकता है. ये बहुत ही ख़तरनाक स्थिति थी. इसमें लोगों की जान भी सकती थी.
इसके बुजुर्गों और बच्चों पर पड़ने वाले असर पर डॉ. मोहसिन कहते हैं कि उम्रदराज़ लोगों के लिए तो हालात और बुरे हो जाते हैं क्योंकि उन्हें पहले से ही सांस संबंधी समस्याएं रहती हैं. लेकिन, ऐसी स्थिति में बच्चों को बड़ों से कम दिक्कत है क्योंकि उनके शरीर में लचीलापन ज़्यादा होता है. उनकी नसें ज़्यादा खिंचाव सहन कर सकती हैं.
इस घटना पर विमानन मंत्रालय ने बताया है कि जेट एयरवेज़ ने कॉकपिट क्रू को जांच होने तक ऑफ़ ड्यूटी कर दिया है. इस मामले की जांच की जा रही है.
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