कहानी दिल दुखानेवाली उस तस्वीर की जिसने चंद दिनों में लाखों रुपए जुटा दिए

मृत अनिल और उसका बेटा

इमेज स्रोत, Ketto.org

    • Author, मीना कोटवाल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

दिल्ली में एक बार फिर सीवर की सफ़ाई के लिए उतरे एक शख़्स की जान चली गई.

37 साल के अनिल पश्चिमी डाबरी इलाके में रानी नाम की महिला और तीन बच्चों के साथ एक किराए के मकान में रहते थे.

14 सितंबर की शाम को पड़ोस के ही एक व्यक्ति ने अनिल को सीवर साफ़ करने के लिए बुलाया था. जब अनिल सीवर में उतर रहे थे तो उनकी कमर में बंधी रस्सी बीच में ही टूट गई, जिस वजह से वह 20 फ़ुट से अधिक गहरे सीवर में गिर गए.

अनिल को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

अनिल का परिवार

डाबरी पुलिस स्टेशन के एसएचओ विजय पाल ने बताया, ''अनिल प्राइवेट काम करता था. मकान मालिक ने अनिल को सीवर की सफ़ाई के लिए बुलाया था जहां उसकी मौत हो गई.''

वह आगे बताते हैं कि सफ़ाई के लिए बुलाने वाले सतबीर कला के ख़िलाफ़ ग़ैर इरादतन हत्या, लापरवाही के कारण मौत और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. लेकिन अभी अभियुक्त की गिरफ़्तारी नहीं हुई है क्योंकि वो फ़रार हैं.

मृत अनिल की पत्नी और उनके बच्चे

इमेज स्रोत, Ketto.org

मौत के लिए कौन ज़िम्मेदार?

इससे पहले भी इसी महीने की नौ तारीख़ को पांच लोगों की मौत हो गई थी. उनकी मौत का कारण भी यही था जिसके चलते अनिल की मौत हुई- बिना किसी सेफ़्टी के सफ़ाई कर्मियों को सीवर साफ़ करने के लिए उतारा जाना.

इंडियन एक्सप्रेस पर 11 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इस तरह से ज़िंदगी गंवाने वालों के लिए सरकार और प्राइवेट कंपनिया अपनी जवाबदेही तय नहीं कर पा रही हैं.

इन हालात में सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने ऐसे ही जान गंवाने वाले अनिल के परिवार की मदद करने की ज़िम्मेदारी उठाई, जिसकी आर्थिक स्थिति इतनी ख़राब थी कि उसके पास अनिल के दाह संस्कार तक के पैसे तक नहीं थे.

सोशल मीडिया पर अनिल के दाह संस्कार और उनके परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए क्राउडफ़ंडिंग कैंपेन शुरू किया गया है जिसके तहत ख़बर लिखे जाने तक लगभग 50 लाख रुपये जमा कर लिए गए हैं.

लेकिन ये किया किसने?

मुम्बई स्थित केट्टो ऑर्गेनाइज़ेशन सोशल मीडिया पर क्राउडफ़ंडिंग के ज़रिये रकम जुटाता है.

इस वेबसाइट के माध्यम से ही अनिल के परिवार के लिए भी फ़ंड जुटाया जा रहा है. अनिल की मौत के बाद केट्टो 'दिल्ली के सीवर में सफ़ाईकर्मी की मौत, परिवार दाह-संस्कार में असमर्थ. कृपयासमर्थन करें. (Cleaner dies in Delhi sewer, family can't afford to even cremate him. Please support!)' के नाम से फ़ंड जुटा रहा है.

केट्टो

इमेज स्रोत, Ketto.org

इस पेज पर अनिल के शव और उनके परिवार के सदस्यों की कुछ तस्वीरें हैं और साथ में अनिल के साथ हुए हादसे का विवरण भी दिया गया है. आख़िर में बताया गया है कि धन का उपयोग बच्चों की शिक्षा और परिवार के कल्याण के लिए किया जाएगा. कुछ राशि भविष्य के लिए भी जमा की जाएगी.

इस संस्था ने परिवार के लिए क्राउडफ़ंडिंग के ज़रिये 24 लाख रुपये जमा करने का लक्ष्य रखा था और 15 दिन की समयसीमा भी तय की थी. मगर 17 सितंबर को शुरू किए गए कैंपेन में अभी तक लगभग 50 लाख रुपये जमा हो चुके हैं. कुल 2337 लोग इसे समर्थन दे चुके हैं और अभी भी 13 दिन का समय बचा हुआ है. पेटीएम, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग आदि के ज़रिये लोग सहयोग राशि जमा कर रहे हैं.

रानी और उसकी बेटी

केट्टो के सीनियर एक्जीक्यूटिव कंवलजीत सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि अगर लक्ष्य से अधिक पैसा जुड़ जाता है तो भी तय समय तक फ़ंड जुटाते रहेंगे.

वो बताते हैं, ''अगर तय राशि से अधिक राशि जमा होती है तो ये हमारे लिए और ज़रूरतमंद इंसान दोनों के लिए अच्छा है. हम अपनी केट्टो फ़ीस (पांच प्रतिशत केट्टो फ़ीस, जीएसटी और पेमेंट गेटवे का चार्ज जोड़कर कुल 9.44 प्रतिशत) काटकर साइट पर दिखाया गया बकाया पैसा सीधा लाभार्थी के अकाउंट में पहुंचा देते हैं.

हालांकि सीईओ वरुण सेठ का कहना है कि इस कैंपेन के लिए उम्मीद से ज़्यादा पैसा जुट गया है, इसलिए हो सकता है कि इसे पहले ही ख़त्म करने का फ़ैसला ले लिया जाए.

वो ये भी बताते हैं कि जिस दिन फ़ंड जुटाना बंद कर दिया जाएगा, उस दिन से 24 से 72 घंटो में रकम लाभार्थी के अकाउंट में पहुंचा दी जाएगी.

कंवलजीत सिंह

इमेज स्रोत, Kawaljeet Singh

इमेज कैप्शन, केट्टो के सीनियर एक्जीक्यूटिव कंवलजीत सिंह

इस पैसे का क्या करेगा परिवार?

कुछ साल पहले तक कूड़ा बीनने वाली महिला और सीवर साफ़ करने वाले व्यक्ति के ग़रीब परिवार के घर अगर अचानक लाखों रुपये आ जाएं तो वे इनका क्या करना चाहेंगे?

अनिल के साथ रहने वाली रानी बताती हैं, ''यदि ये पैसा हमें मिल जाता है तो मैं अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहूंगी ताकि वो अनपढ़ रह कर ये काम न करें.''

रानी कहती हैं, ''अनिल बच्चों को डॉक्टर और पुलिस अफ़सर बनाना चाहते थे. अब वो नहीं रहे तो मैं चाहती हूं कि ज़्यादा नहीं तो इतनी शिक्षा ही मिल जाए कि इन्हें ये काम न करना पड़े. इस पैसे से मैं घर लेना चाहूंगी ताकि इन बच्चों के साथ मुझे दर-दर की ठोकरें न खानी पड़े.''

अनिल का मामला इतना चर्चित क्यों हुआ?

अनिल की मौत और उनके परिवार की ख़राब हालत तब अधिक चर्चा में आई जब शिव सन्नी नाम के पत्रकार ने अनिल के शव के साथ खड़े होकर रो रहे उनके बच्चे की तस्वीर ट्विटर पर शेयर की थी.

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 1

कुछ समय में ही इस तस्वीर को हज़ारों लोगों ने रीट्वीट कर दिया था. इसके बाद अनिल के परिवार की मदद के लिए मुहिम चलाई गई. जानेमाने पत्रकारों, समाजसेवकों और फिल्म अभिनेताओं ने भी इस तस्वीर को रीट्वीट किया और अनिल के परिवार की मदद की मुहिम को आगे बढ़ाया.

केट्टो के कंवलजीत सिंह बताते हैं कि अनिल की स्थिति के बारे में उन्हें स्वास्थ्य और आपदा के समय मदद करने वाले उदय फ़ाउंडेशन से पता चला और इस पर काम शुरू कर दिया गया.

सिंह बताते हैं, ''उदय फाउंडेशन ने हमें टैग कर ट्वीट किया था. इसके बाद हमने उनसे संपर्क किया और उनके परिवार की स्थिति समझते हुए हमने एक लाइव कैंपेन शुरू कर दिया.''

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 2

गार्गी रावत, यशवंत देशमुख और शिव सैनी पत्रकार हैं जिन्होंने अनिल के चलाए कैंपेन को ट्वीट किया है. इसके साथ ही मनोज वाजपेयी व अन्य अभिनेताओं ने अनिल के लिए ट्वीट किए.

छोड़िए X पोस्ट, 3
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 3

छोड़िए X पोस्ट, 4
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 4

छोड़िए X पोस्ट, 5
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 5

सोशल मीडिया से क्यों जुटा इतना पैसा?

इस तरह की घटनाएं हमारे आस-पास आए दिन होती रहती हैं, लेकिन हमारा ध्यान कई बार जाता है तो कई बार हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं. लेकिन देखने को मिलता है कि अगर कोई घटना सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आती है तो उस पर बहुत से लोग विश्वास करते हैं. ऐसा कठुआ गैंगरेप, केरल आपदा और अब अनिल के परिवार की मदद के लिए चलाए गए अभियान को लेकर भी देखने को मिला है.

बिलाल ज़ैदी

इमेज स्रोत, Bilal Zaidi

इमेज कैप्शन, क्राउड न्यूज़िंग के संस्थापक बिलाल ज़ैदी

क्राउड न्यूज़िंग के संस्थापक और कठुआ गैंगरेप व मॉब लिंचिंग पर कैंपेन की शुरुआत करने वाले बिलाल ज़ैदी बताते हैं कि 'सोशल मीडिया जब शुरू हुआ तो लोगों को लगा कि उनके साथ जो हो रहा है, उसे वे अब कई लोगों के साथ शेयर कर सकते हैं. बाद में कुछ लोगों ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल कुछ ऐसे परिवारों की मदद के लिए किया जिन्हें किसी तरह की मदद की ज़रूरत है.'

ज़ैदी बताते हैं, "पहले लोग सिर्फ़ अपने से जुड़ी घटनाओं को सोशल मीडिया पर शेयर करते थे. लेकिन वो अन्य लोगों द्वारा शेयर की गई भावुक कर देने वाली घटनाओं से जुड़ाव भी महसूस करते हैं और अगर वे किसी तरह से इन घटनाओं को रोकने के लिए कुछ नहीं कर सकते तो उनके अंदर ये भावना आ जाती है कि मैं कुछ नहीं कर पा रहा तो मुझे चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए. यही इमोशन आंदोलन का रूप ले लेता है."

वो कहते हैं, ''इसी तरह इस कैंपेन में देखा गया कि जब सोशल मीडिया पर मृत पिता और उनके साथ खड़े हुए बच्चे की तस्वीर आई तो लोग भावुक हो रहे थे. इसलिए उन्होंने सोचा कि क्यों न इनकी मदद के लिए क्राउडफ़ंडिंग जैसा कुछ किया जाए."

सोशल मीडिया पर इतनी रकम जुट जाने के कारणों पर रोशनी डालते हुए ज़ैदी कहते हैं कि लोगों को भरोसा है कि जो पैसा वे किसी की मदद के लिए दे रहे हैं, वह सही जगह जा रहा है.

वह कहते हैं, "आज की तारीख़ में किसी पर पैसे को लेकर विश्वास करना बहुत मुश्किल है, मगर सोशल मीडिया पर इस तरह के कैंपेन आपको इस बात का सबूत देते हैं कि आपका पैसा कहां जा रहा है. आपको अपने पैसे के सही जगह पहुंचने की गारंटी चाहिए होती है और इस तरह के कैंपेन में सारी जानकारी आपको स्क्रीन पर दिख जाती है."

ये भी पढ़ें-

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)