महिलाओं के अधिकार, सेक्स और ब्रह्मचर्य पर क्या थी गांधी की सोच

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, सौतिक बिस्वास
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दिसंबर 1935 में अमरीका में जन्मे गर्भ निरोध कार्यकर्ता और सेक्स शिक्षक मार्गरेट सैंगर ने भारत के पश्चिमी राज्य महाराष्ट्र में भारत की आज़ादी के नायक रहे महात्मा गांधी से उनके आश्रम में मुलाकात कर बहुत सी दिलचस्प बातें की थी.
सैंगर भारत की 18 दिवसीय दौरे पर थीं और इस दौरान उन्होंने गर्भ निरोध और महिलाओं की आज़ादी के विषय पर डॉक्टरों और कार्यकर्ताओं से बातें की.
गांधी के साथ उनकी दिलचस्प बातें प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा की बायोग्राफ़्री 'फ़ादर ऑफ़ द नेशन' का हिस्सा है.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त
दुनियाभर के 60 अलग-अलग संग्रहों से इकट्ठा की गई जानकारियों के आधार पर शांति के सबसे प्रसिद्ध प्रतीक महात्मा गांधी के 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत आने के समय से 1948 में हुई हत्या तक उनके जीवन की नाटकीय कहानी को 1,129 पन्नों की किताब में चित्रण किया गया है.
इस जीवनी में महिलाओं के अधिकारों, सेक्स और ब्रह्मचर्य पर गांधी के विचारों की एक झलक भी है.
आश्रम में गांधी के सचिव महादेव देसाई उनकी और नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बैठकों के महत्वपूर्ण नोट्स लिया करते थे.
उन्होंने लिखा, "सैंगर और गांधी दोनों इस बात पर सहमत थे कि महिलाओं को और आज़ादी मिलनी चाहिए और अपने भाग्य का फ़ैसला खुद उन्हीं को करना चाहिए."
लेकिन जल्द ही दोनों के बीच मतभेद भी हो गए.

इमेज स्रोत, Getty Images
कस्तूरबा से जिस्मानी रिश्ता त्याग कर गांधी कैसा महसूस करते थे
अमरीका में 1916 में पहला परिवार नियोजन केंद्र खोलने वाली सैंगर का मानना था कि गर्भनिरोधक महिलाओं की आज़ादी का सबसे सुरक्षित माध्यम है.
गांधी ने यह कहते हुए ऐतराज जताया कि महिलाओं को अपने पति को रोकना चाहिए, जबकि पुरुषों को अपनी कामुकता पर नियंत्रण करना चाहिए. उन्होंने सैंगर से कहा कि सेक्स केवल वंश-वृद्धि के लिए होना चाहिए.
- यह भी पढ़ें | वो 8 महिलाएं, जिनके करीब रहे महात्मा गांधी
सैंगर ने झट से गांधी से कहा कि "महिलाओं में भी पुरुषों के समान ही भावनाएं और कामुकता होती हैं. ऐसा समय भी आता है जब महिलाओं को भी अपने पति की ही तरह शारीरिक संबंध बनाने की उतनी ही तीव्र इच्छा होती है."
उन्होंने कहा, "क्या आपको लगता है कि दो लोग जो आपस में प्यार करते हैं और साथ खुश हैं वो दो साल में एक बार सेक्स करें ताकि उनके बीच शारीरिक रिश्ता तभी बने जब वो बच्चा चाहते हों."
उन्होंने जोर दिया कि ऐसे में ही गर्भनिरोधक को अपनाया जाना चाहिए ताकि अनचाहे गर्भ को रोका जा सके और साथ ही अपने शरीर पर नियंत्रण भी हासिल किया जा सके.
लेकिन गांधी अपनी बात पर अड़े रहे.
उन्होंने सैंगर से कहा कि वो सभी प्रकार से सेक्स को 'वासना' मानते हैं. उन्होंने अपनी शादी के विषय में उनसे कहा कि जिस्मानी सुख को त्यागने के बाद से उनकी पत्नी कस्तूरबा से उनका रिश्ता आध्यात्मिक बन गया था.
- यह भी पढ़ें | जब महात्मा गांधी पहली बार कश्मीर पहुंचे

इमेज स्रोत, Getty Images
गांधी की सहमति और एतराज
गांधी की 13 साल की उम्र में शादी हो गई थी और उन्होंने 38 वर्ष की आयु में ब्रह्मचर्य की शपथ ली थी. इसके लिए वो जैन गुरु रेचंदभाई और रूस के लेखक लियो टॉल्सटॉय से प्रेरित हुए जिन्होंने अपने जीवन में ब्रह्मचर्य अपनाया था.
गांधी ने अपनी आत्मकथा में यह लिखा है कि जब उनके पिता की मृत्यु हो रही थी तब वो अपनी पत्नी के साथ सेक्स में व्यस्त थे.
सैंगर के साथ बातचीत के अंत में गांधी कुछ हद तक नरम पड़ गए.
उन्होंने कहा कि वो पुरुषों के स्वैच्छिक नसबंदी को लेकर ऐतराज नहीं करते हैं, लेकिन गर्भ निरोधक की जगह दोनों को पत्नी की पीरियड्स के सुरक्षित समय के दौरान सेक्स करना चाहिए.
सैंगर आश्रम से वापस जाने तक इस मुद्दे पर गांधी से सहमत नहीं थीं. बाद में उन्होंने 'स्वच्छंदता और विलासिता' पर गांधी के डर के विषय में लिखा. वो अपने अभियान पर गांधी का समर्थन ना पाने की वजह से बहुत निराश थीं.
- यह भी पढ़ें | महात्मा गांधी ने ईसाई बनने से क्यों इनकार किया था?

इमेज स्रोत, Penguin
यह पहली बार नहीं था जब महात्मा गांधी ने खुले तौर पर गर्भ निरोध को लेकर बात की.
1934 में एक महिला अधिकार कार्यकर्ता ने उनसे पूछा था कि क्या आत्म नियंत्रण के बाद सबसे उपयुक्त गर्भ निरोधक हैं?
इस पर गांधी ने जवाब दिया, "क्या आप मानती हैं कि शरीर की स्वतंत्रता गर्भनिरोधकों का सहारा लेकर प्राप्त की जा सकती है. महिलाओं को यह सीखना चाहिए कि वो अपने पति को कैसे रोकें. अगर गर्भ निरोधकों का पश्चिम की तरह इस्तेमाल किया जाए तो इसके गंभीर परिणाम होंगे."
"पुरुष और महिलाएं केवल सेक्स के लिए ही जिएंगे. वो मानसिक रूप से सुन्न और विक्षिप्त हो जाएंगे. वास्तव में दिमागी और नैतिक रूप से वो बर्बाद हो जाएंगे."
- यह भी पढ़ें | क्या है महात्मा गांधी का उत्तर कोरिया से कनेक्शन?

इमेज स्रोत, GANDHI FILM FOUNDATION
गांधी का यौन इच्छा पर जीत का परीक्षण
सालों बाद, जब भारत की आज़ादी की पूर्व संध्या पर बंगाल के नोआखली ज़िले में हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए तो गांधी ने एक विवादास्पद प्रयोग किया. उन्होंने अपनी नातिन और सहयोगी मनु गांधी को अपने साथ बिस्तर में सोने के लिए कहा.
गुहा लिखते हैं, "वो अपनी यौन इच्छा पर जीत का परीक्षण करने की कोशिश कर रहे थे."
उनके जीवनी लेखक के अनुसार, पता नहीं क्यों गांधी यह मानते थे कि "धार्मिक हिंसा की शुरुआत पूर्ण ब्रह्मचारी बनने की उनकी विफलता से जुड़ा हुआ था."
गांधी, जिन्होंने अपने पूरी ज़िंदगी में विभिन्न धर्मों के बीच समरसता का प्रचार किया वो आज़ादी से पहले हिंदू-मुस्लिम के बीच हुई इस धार्मिक हिंसा से बहुत व्याकुल थे.
जब उन्होंने अपने सहयोगियों को इस 'प्रयोग' के बारे में बताया तो उन्हें बहुत विरोध का सामना करना पड़ा. उन्होंने गांधी को चेतावनी दी कि यह उनकी प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिला देगा और उन्हें इस प्रयोग को छोड़ देना चाहिए. उनके एक सहयोगी ने कहा कि यह 'आश्चर्यचकित करने वाला और नहीं बदला जा सकने वाला' दोनों ही है. एक अन्य सहयोगी ने इसके विरोध में गांधी के साथ काम करना छोड़ दिया.
गुहा लिखते हैं कि इस अजीब प्रयोग को समझने के लिए किसी को "स्पष्ट रूप से यह समझाना होगा कि पुरुष ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं."



इमेज स्रोत, GANDHI FILM FOUNDATION
गांधी क प्राचीन हिंदू दर्शन वाले विचार
तब करीब 40 सालों से गांधी ब्रह्मचर्य का पालन कर रहे थे. "अब अपने जीवन के अंत में, अखंड राष्ट्र के रूप में भारत को देखने के अपने सपने को ध्वस्त होता देख, गांधी समाज की कमियों को समाज के सबसे प्रभावशाली नेता यानी की खुद अपनी कमी के तौर पर दर्शा रहे थे."
गांधी के एक करीबी सहयोगी और प्रशंसक ने बाद में अपने एक मित्र को लिखा कि, "गांधी के लिखे शब्दों से मैंने पाया कि उन्होंने आत्म-अनुशासन का कठोर पालन किया था, कुछ वैसा ही जैसा कि मध्ययुगीन ईसाई तपस्वी या जैन संन्यासी किया करते थे."
इतिहासकार पैट्रिक फ्रेंच ने लिखा कि हालांकि गांधी के कुछ अपरंपरागत विचारों के केंद्र में प्राचीन हिंदू दर्शन था, "वो नैतिकता और स्वास्थ्य, खान-पान और सांप्रदायिक जीवन को लेकर अपने झक्की सिद्धांतों की वजह से विक्टोरियाई युग के व्यक्ति लगते थे."
जाहिर है, महिलाओं पर गांधी के विचार जटिल और विरोधाभासी थे.
- यह भी पढ़ें | औरंगज़ेब की तारीफ़ में गांधी ने क्या कहा था?

इमेज स्रोत, GANDHI FILM FOUNDATION
ऐसा लगता था कि वो महिलाओं का पुरुषों को आकर्षित करने को नापसंद करते थे. गुहा के अनुसार वो 'आधुनिक हेयर स्टाइल और कपड़े' से घृणा करते थे.
उन्होंने मनु को लिखा, "कितने दुख की बात है कि आधुनिक लड़कियां अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखने के बजाए फैशन करने को अधिक महत्व देती हैं. वो मुस्लिम महिलाओं के पर्दा रखने की भी आलोचना करते थे. वो कहते थे कि इससे महिलाओं के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है. उन्हें पर्याप्त हवा और रोशनी नहीं मिलती है इसलिए वो रोगग्रस्त रहती हैं."
इसके साथ ही, गांधी यह भी मानते थे कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार मिलना चाहिए.
- यह भी पढ़ें | कैसा बीता था महात्मा गांधी का आख़िरी दिन..

इमेज स्रोत, Getty Images
दक्षिण अफ्रीका में महिलाएं उनके राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन में शामिल तो हुई थीं. उन्होंने एक महिला, सरोजिनी नायडू को कांग्रेस पार्टी का तब अध्यक्ष बनाया जब पश्चिम में बहुत कम ही महिला नेता थीं.
उन्होंने महिलाओं से शराब की दुकानों के बाहर विरोध प्रदर्शन करने को कहा. कई महिलाएं ने ब्रिटिश साम्राज्य के ख़िलाफ़ उनके नमक आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया.
गुहा लिखते हैं, "गांधी ने कभी आधुनिक नारीवाद की भाषा का उपयोग नहीं किया."
"महिला शिक्षा, महिलाओं का कारखानों और ऑफिसों में काम किए जाने का समर्थन करते हुए उन्होंने सोचा कि बच्चों को पालने और घर के कामों को महिलाएं करेंगी. आज के समय के अनुसार गांधी को रूढ़िवादी माना जाना चाहिए. लेकिन, उनके समय के हिसाब से वो निस्संदेह प्रगतिशील थे."
जब 1947 में भारत स्वतंत्र हो गया तो उनकी इस विरासत ने, जैसा कि गुहा मानते हैं, देश को पहली महिला राज्यपाल और महिला कैबिनेट मंत्री दिलाने में सहायता की.
लाखों शरणार्थियों के पुर्नवास के काम का नेतृत्व शक्तिशाली महिलाओं के एक समूह के हाथ में था. अमरीकी विश्वविद्यालयों में महिला राष्ट्रपतियों के चयन से दशकों पहले एक शीर्ष विश्वविद्यालय ने अपने उप-कुलपति के रूप में एक महिला को चुना.
गुहा कहते हैं, 1940 और 1950 के दशक में भारत में महिलाएं उतनी विशिष्ठ थीं जितनी कि उसी दौर में अमरीका में. इसे गांधी के विचित्र 'सत्य के प्रयोग' के बावजूद उनकी महत्वपूर्ण और अज्ञात उपलब्धियों में से गिना जाना चाहिए.



(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)












