'कड़वे प्रवचन' देने वाले तरुण सागर का निधन

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प्रसिद्ध जैन मुनि तरुण सागर का निधन हो गया है. शनिवार देर रात करीब 3.30 बजे तरुण सागर ने दिल्ली में शहादरा के कृष्णा नगर इलाके में अंतिम सांस ली. वे 51 साल के थे.
तरुण सागर पीलिया से पीड़ित थे और दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल से अपना इलाज करवा रहे थे. बताया जा रहा है कि वे संथारा प्रथा का पालन कर रहे थे और उन्होंने दवाइयां लेने से इंकार कर दिया था.
जैन संप्रदाय के लोग संथारा प्रथा के तहत अन्न-जल छोड़ देते हैं, इसका लक्ष्य जीवन को ख़त्म करना होता है. जैन संप्रदाय की मान्यता के अनुसार इस तरह 'मोक्ष' प्राप्त किया जा सकता है.
तरुण सागर की मौत पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दुख प्रकट किया है.
राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर जैन मुनि को श्रद्धांजलि दी है.
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कड़वे प्रवचन देते थे
मुनि तरुण सागर का जन्म साल 1967 में मध्यप्रदेश में हुआ था और उनका जन्म का नाम पवन कुमार जैन था. 20 साल की उम्र में तरुण सागर जैन मुनि बन गए थे.
तरुण सागर को उनके कड़वे प्रवचनों के लिए जाना जाता था. वे अपने अनुयायियों को जो प्रवचन देते थे उन्हें कड़वे प्रवचन कहते थे.
इन प्रवचनों में तरुण सागर समाज में मौजूद कई बुराइयों की तीखे शब्दों में आलोचना करते थे. उनके प्रवचनों की किताब भी 'कड़वे प्रवचन' नाम से प्रकाशित की जाती है.
पिछले साल उन्होंने देश में फ़र्जी बाबाओं की जांच करने और उन्हें सजा दिलवाने की बात भी कही थी. तरुण सागर ने कहा था कि देशभर में लगभग 1400 फ़र्जी बाबा हैं जिनकी संपत्ति की जांच की जानी चाहिए.

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हरियाणा विधानसभा पहुंचे
तरुण सागर की लोकप्रियता जैन समुदाय के बाहर भी थी. उनकी पहुंच नेता और कई राज्य सरकारों तक थी. साल 2016 में तरुण सागर को हरियाणा विधानसभा को संबोधित करने के लिए बुलाया गया था.
जब तरुण सागर ने हरियाणा विधानसभा को संबोधित किया तो राजनीतिक गलियारों में कई दिन तक इसकी चर्चा चलती रही. उसी दौरान बॉलीवुड संगीतकार और कई मौक़ों पर आम आदमी पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल रहने वाले गायक विशाल डडलानी को अपने एक ट्वीट के चलते माफ़ी मांगनी पड़ी थी.
डडलानी ने लिखा था, "अगर आपने इन लोगों के लिए वोट दिया है तो आप इस बकवास के लिए ज़िम्मेदार हो. नो अच्छे दिन, जस्ट नो कच्छे दिन."
उनके इस ट्वीट के बाद लोगों ने उनकी खूब आलोचना की. खुद अरविंद केजरीवाल ने इस ट्वीट को अफ़सोसजनक बताया था. इसके बाद डडलानी ने कई बार अलग-अलग यूजर्स को माफ़ी का ट्वीट भेजा था.

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संघ की बेल्ट बदली
तरुण सागर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का क़रीबी माना जाता था. साल 2011 में उन्हें राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने विजयदशमी के कार्यक्रम में बुलाया था.
इस दौरान उन्होंने कहा था कि स्वंयसेवक जिस चमड़े की बेल्ट का इस्तेमाल करते हैं वह अहिंसा के विपरीत है. इसके बाद आरएसएस ने अपनी ड्रेस से चमड़े की बेल्ट की जगह कैनवस की बेल्ट इस्तेमाल करनी शुरू कर दी.
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