लाल क़िले से महिलाओं के लिए मोदी ने यह कहा

मोदी

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    • Author, टीम बीबीसी हिन्दी
    • पदनाम, दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारत के 72वें स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर देश को संबोधित किया. लाल क़िले से मोदी का यह पांचवा संबोधन था.

यानी अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले मोदी ने अंतिम बार देश की जनता को संबोधित किया. 80 मिनट के अपने संबोधन में मोदी ने कई बार देश की आधी आबादी यानी महिलाओं का ज़िक्र किया.

समंदर की सिकंदर महिलाएं

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण के शुरुआती लम्हों में ही नौसेना की उन 6 जाबांज महिला अधिकारियों का ज़िक्र किया, जिन्होंने पिछले साल सितंबर में समुद्र के रास्ते पूरी दुनिया की सैर की थी.

मोदी ने कहा, ''उत्तराखंड, हिमाचल, मणिपुर, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की हमारी बेटियों ने सात समंदर पार किया और सातों समंदर को तिरंगे रंग से रंगकर हमारे बीच लौट आईं.''

भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब नौसेना की 6 महिला अधिकारी ऐतिहासिक सुमद्री सफ़र पर निकलीं. इन सभी महिलाओं ने आईएनएस तारिणी नामक सेलबोट पर गोवा से केपटाउन तक का सफ़र तय किया था.

इस टीम की कप्तान उत्तराखंड की वर्तिका जोशी थीं, उनके साथ लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवाल, लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता, लेफ्टिनेंट कमांडर पी स्वाति, लेफ्टिनेंट विजया देवी और लेफ्टिनेंट पी ऐश्वर्या शामिल थीं.

आईएनएस तारिणी में सवार 6 नौसेना महिला अधिकारी

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उज्ज्वला योजना से मिले गैस कनेक्शन

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के दौरान अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं. उन्होंने ग्रामीण महिलाओं का ज़िक्र किया तो उज्ज्वला योजना से जुड़ी बातें भी साझा कीं.

उन्होंने कहा, ''गरीब मां को धुआं मुक्त बनाने वाला चूल्हा दिया, एलपीजी कनेक्शन दिया. 2013 की रफ्तार (पिछली सरकार) से चलते तो शायद 100 साल भी कम पड़ जाते.''

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले से की थी.

इस योजना के तहत तीन साल के भीतर ग़रीबी रेखा से नीचे जीवन जीने वाले परिवारों को 1 करोड़ एलपीजी कनेक्शन देने की बात कही गई थी.

इसका मुख्य लक्ष्य ग्रामीण भारत की महिलाओं को खाना बनाने के दौरान धुएं की समस्या से दूर करना था.

योजना के अनुसार गैस कनेक्शन परिवार की महिला के नाम पर ही दिया जाएगा. इसके लिए सरकार ने शुरुआत में ही 8 हज़ार करोड़ रुपए आवंटित कर दिए थे.

सरकार के आंकडों के मुताबिक देश भर में 24 करोड़ से अधिक परिवार हैं जिनमें से लगभग 10 करोड़ परिवारों को एलपीजी कनेक्शन नहीं मिल पाते.

हालांकि इस योजना की जमीनी हकीक़त बताती कई रिपोर्टें भी मिली जिनके अनुसार ऐसे तमाम परिवार थे जिन्हें उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन तो मिले, लेकिन इन परिवारों के पास इतने पैसे नहीं थे कि वो दोबारा सिलेंडर भरवा सकें.

कई रिपोर्टों के मुताबिक़ तमाम लोगों को आवेदन करने के बावजूद गैस सिलेंडर नहीं मिले.

महिला गैस सिलेंडर उज्जवला योजना

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सुप्रीम कोर्ट की महिला न्यायाधीश

कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की एंट्री हुई थी, जिनमें एक महिला जज इंदिरा बनर्जी शामिल थीं. उनके सुप्रीम कोर्ट में आने के बाद अब देश की सर्वोच्च अदालत में महिला जजों की संख्या तीन हो गई है.

देश के इतिहास में यह पहला मौक़ा है जब सुप्रीम कोर्ट में तीन महिला जज हैं. इनके नाम जस्टिस इंदु मल्होत्रा, जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस इंदिरा बनर्जी है.

प्रधानमंत्री मोदी ने लाल क़िले से देश की महिलाओं की इस उपलब्धि का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा, ''यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि हमारे देश के सुप्रीम कोर्ट में तीन महिला जज बैठी हुई हैं. कोई भी भारत की नारी गर्व कर सकती है तीन महिला जज न्याय कर रही हैं.''

सुप्रीम कोर्ट में शामिल हुईं जस्टिस इंदिरा बनर्जी इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट की चीफ़ जस्टिस थीं. उनकी शुरुआती पढ़ाई कोलकाता में हुई थी और वहीं से उन्होंने अपनी वकालत की शुरुआत की.

इससे पहले, इसी साल अप्रैल में इंदु मल्होत्रा ने भी वरिष्ठ वकील से सुप्रीम कोर्ट के जज तक का सफ़र तय किया था. सीधे बार काउंसिल से जज बनने वाली वो पहली महिला हैं.

वहीं जस्टिस आर भानुमति साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट की जज बनी थीं. वे साल 2013 में झारखंड की चीफ़ जस्टिस थीं.

सुप्रीम कोर्ट में तीन महिला जज
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कैबिनेट में महिलाएं

राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का विषय हमेशा से ही चर्चा में रहा है. संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग लंबे वक़्त से उठती रही है.

इस बीच प्रधानमंत्री मोदी ने लाल क़िले से अपनी कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार सबसे अधिक संख्या में महिलाएं कैबिनेट का हिस्सा बनीं हैं.

मौजूदा वक़्त में 6 महिलाएं भारत सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. इनमें सुषमा स्वराज(विदेश मंत्री), निर्मला सीतारमण (रक्षा मंत्री), स्मृति इरानी (कपड़ा मंत्री), उमा भारती (जल मंत्री), हरसिमरत कौर (खाद्य मंत्री) और मेनका गांधी (महिला एवं बाल विकास मंत्री) हैं.

इसके मुकाबले यूपीए-1 में अंबिका सोनी (पर्यटन और संस्कृति मंत्री) और मीरा कुमार (सामाजिक न्याय मंत्री) कैबिनेट मंत्री थीं. वहीं यूपीए-2 में गिरिजा व्यास (ग़रीबी उन्मूलन मंत्री) और चंद्रेश कुमारी (संस्कृति मंत्री) केंद्रीय मंत्री के पद पर रहीं.

मोदी कैबिनेट

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सेना में महिलाएं

सेना में महिलाओं की हिस्सेदारी को बढ़ाने की दिशा में प्रधानमंत्री ने लाल क़िले से एक बड़ी घोषणा की.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, ''इस मंच से मैं अपने देश की कुछ बहादुर बेटियों को खुशखबरी देना चाहता हूं. भारतीय सशस्त्र सेना में शॉर्ट सर्विस कमिशन (एसएससी) के माध्यम से नियुक्त महिला अधिकारियों को अपने समकक्ष पुरुष अधिकरियों की तरह पारदर्शी चयन प्रक्रिया द्वारा स्थायी कमिशन की आज घोषणा करता हूं. जो हमारी लाखों बेटियां आज यूनिफार्म की ज़िंदगी जी रही हैं. जो बेटियां देश के लिए कुछ करना चाहती हैं उनके लिए मैं ये तोहफा दे रहा हूं.''

साल 1992 में पहली बार भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को प्रवेश मिला था. महिलाओं को शॉर्ट सर्विस कमिशन के तहत सेना में अधिकारी के रूप में एंट्री मिली. इस कमिशन के ज़रिए जो भी महिला सेना में प्रवेश करती है उन्हें 10 से 14 साल तक सेना में नौकरी करने का मौक़ा मिलता है.

शुरुआती कमीश्न 10 साल का होता है उसके बाद यह उस अधिकारी पर निर्भर होता है वह अपने कमिशन को 3 साल या चार साल तक बढ़ाया जा सकता है.

प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद अब महिलाएं स्थायी कमिशन में भी भागीदारी कर सकेंगी.

सेना में महिलाएं

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तीन तलाक़ और मुस्लिम महिलाएं

मोदी सरकार ने तीन तलाक़ को ख़त्म करने पर बहुत अधिक ज़ोर दिया है. संसद में भी तीन तलाक़ से जुड़े क़ानून को पारित करवाने की लगातार कोशिशें होती रहीं.

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर भी इसका ज़िक्र किया और कहा, ''मुस्लिम महिलाओं को लाल किले से विश्वास देना चाहता हूं, कि तीन तलाक़ की कुरीतियां हमारे देश की बेटियों की जिंदगी को तबाह कर रही हैं, मैं ऐसा नहीं होने दूंगा. इस सत्र में भी हमने इन महिलाओं को इस पीड़ा से मुक्ति दिलाने का बेड़ा उठाया था लेकिन अभी भी कुछ लोग हैं जो इसे पारित नहीं होने देते हैं.''

मोदी ने मुस्लिम महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा, ''मैं देश की मुस्लिम महिलाओं- माताओं को यह विश्वास दिलाता हूं कि मैं उनके न्याय के लिए उनके हक़ के लिए लड़ने में कुछ भी कमी नहीं नहीं करूंगा. मैं आपकी आशाओं- आकांक्षाओं को पूरा करके रहूंगा.''

पिछले हफ़्ते ही राज्यसभा में तीन तलाक़ बिल को पेश किए जाने की संभावना थी लेकिन फिर इसे शीतकालीन सत्र तक के लिए टाल दिया गया.

मुस्लिम महिलाएं

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कैबिनेट ने पिछले साल लोकसभा में पारित बिल में पिछले हफ़्ते कुछ संशोधन किए. अगर बिल शीतकलाीन सत्र में राज्यसभा में पारित हो जाएगा तो राष्ट्रपति के पास जाने से पहले इस संशोधित बिल को एक बार फिर लोकसभा में पास कराना होगा और उसके बाद कहीं जाकर ये क़ानून की शक़्ल लेगा.

सुप्रीम कोर्ट पहले ही एक बार में तीन तलाक़ को ग़ैर क़ानूनी क़रार दे चुका है.

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