दंगा अभियुक्त से मिलने जेल पहुंचे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह

इमेज स्रोत, Giriraj Singh @Twitter
शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा अलीमुद्दीन अंसारी की हत्या के आरोप में उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे अभियुक्तों के जेल से बेल पर छूटने पर उनका स्वागत करते नज़र आए थे.
ये तस्वीरें इंटरनेट पर शेयर की गईं और इस मामले में बाद में उन्हें सफ़ाई देनी पड़ी.
अब भारतीय जनता पार्टी से जुड़े एक और केंद्रीय नेता गिरिराज सिंह ने नवादा जेल जा कर बजरंग दल के ज़िला संयोजक जितेंद्र प्रताप जीतू और विश्व हिंदू परिषद के ज़िलामंत्री कैलाश विश्वकर्मा से मुलाक़ात की.
इस मुलाक़ात की तस्वीरें उन्होंने शनिवार को अपने ट्विटर अकाउंट पर साझा की हैं और साथ ही लिखा है "जीतू जी एवं कैलाश विश्वकर्मा जी से मिलने नवादा मंडल कारागार गया था."
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गिरिराज सिंह ने इसके बाद एक समाचार चैनल का यूट्यूब वीडियो शेयर किया जिसमें वो ये कहते दिख रहे हैं कि "उन्हें जिस ढंग से उन्हें फंसाया गया है वो दुर्भाग्यपूर्ण है."
"2017 में जब यहां तनाव हुआ था तो ये शांति बहाली के काम में लगे थे. जब यहां नवादा बाईपास पर हनुमान की मूर्ति तोड़ने की बात आई तो ये लोग ही शांति सौहार्द बनाने में शामिल रहे. प्रशासन के मन में एक बात बैठ गई है कि सांप्रदायिक सौहार्द तभी ठीक होगा जब हिंदुओं को दबाया जाएगा."
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कौन हैं जितेंद्र प्रताप और कैलाश विश्वकर्मा?
इसी सप्ताह 4 जुलाई को बजरंग दल के छह लोगों को जितेंद्र प्रताप की गिरफ़्तारी के विरोध में बंद का आयोजन करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
पुलिस का कहना था कि बजरंग दल समर्थक, दुकानदारों को दुकानें बंद करने के लिए मजबूर कर रहे थे जिस कारण कई जगहों पर लाठीचार्ज भी करना पड़ा था. इस दौरान जिन छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें विहिप के कैलाश विश्वकर्मा भी शामिल हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार नवादा के पुलिस अधीक्षक हरिप्रसाद का कहना है कि "जितेंद्र प्रताप को 3 जुलाई को नवादा में साल 2017 में राम नवमी के मौक़े पर हुए सांप्रदायिक दंगों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है."
बदरंग दल के नाराज़ कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रशासन "उनके साथ मनमानी" कर रही है.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार इसी साल मार्च में नवादा के गोंदापुर में राष्ट्रीय राजमार्ग 31 के नज़दीक हनुमान की मूर्ति टूटी हालत में मिली थी.
इसके बाद पास के एक होटल में एक मुस्लिम शादी में शामिल होने आए कुछ लोगों पर इसका आरोप लगाया गया और गुस्साए लोगों ने होटल और अहाते में खड़ी बस पर पथराव किया था.
इस भीड़ में जितेंद्र प्रताप और कैलाश विश्वकर्मा भी कथित तौर पर शामिल थे.
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