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हिंदू धर्म को बचाने के लिए 'लोट कर' की मंदिर की परिक्रमा
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
अपने लेखन के लिए पुरस्कार से सम्मानित मलयालम लेखक केपी रामनउन्नी ने केरल के कन्नूर में मौजूद श्री कृष्ण मंदिर के चारों ओर ज़मीन पर लोट कर परिक्रमा की है.
रामनउन्नी का उद्देश्य है कि वो "हिंदू धर्म में विश्वास रखने वालों को धार्मिक मूल्यों में किए जा रहे बदलावों का विरोध करने के लिए जागरूक कर सकें."
लेकिन केरल संस्कृत संघ के सहयोग के आयोजित रामनउन्नी की इस कोशिश का कुछ संस्थाओं ने विरोध किया है. हालांकि रामनउन्नी बताते हैं कि राजनीतिक पार्टियों के समर्थन और पुलिस के द्वारा दी गई सुरक्षा व्यवस्था के कारण वो 'अपनी प्रार्थना' में सफल हो सके.
संस्कृत संघ एक सांस्कृतिक संस्था है जो हिंदूवाद पर यकीन करती है और "हिंदुत्व की नफ़रत करने वाली सांप्रदायिक राजनीति का विरोध करती है."
रामनउन्नी ने बीबीसी को बताया, "हिंदू धर्म में धारणा रखने वालों की ये ज़िम्मेदारी है कि वो कुछ लोगों के द्वारा धार्मिक मूल्यों में किए जा रहे बदलावों का विरोध करें. ये लोग समाज में नफ़रत का ज़हर फैला रहे हैं."
रामनउन्नी कहते हैं, "कठुआ में हुई बलात्कार की घटना एक उदाहरण अवश्य है लेकिन ये कोशिश हिंदू धर्म पर यकीन करने वालों की अंतरात्मा तक संदेश पहुंचाने की है."
वो कहते हैं कि धार्मिक मूल्यों से छेड़छाड़ की जा रही है और, "प्रार्थनास्थलों का इस्तेमाल अपराधों को अंजाम देने और सांप्रदायिक भावना फैलाने के लिए किया जा रहा था."
रामनउन्नी ने कन्नूर के मंदिर को ही चुना क्योंकि उनकी किताब 'दैवातिंते पुस्तकम' यानी 'ईश्वर की किताब' में श्री कृष्ण को 'सबसे दयालु' दिखाया गया है. इस किताब के लिए 2017 में केंद्र साहित्य अकादमी ने उन्हें पुरस्कार दे कर सम्मानित किया था.
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