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कठुआ और उन्नाव रेप की घटनाओं को लेकर देशभर में गुस्सा, सड़कों पर उतरे लोग
कठुआ और उन्नाव में रेप की घटनाओं को लेकर देश के कई हिस्सों में रविवार को विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए. दिल्ली में संसद मार्ग पर हुए विरोध प्रदर्शन में लोग 'नॉट इन माइ नेम' की तख्तियां लिए नज़र आए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी चुप्पी तोड़ते हुए इन घटनाओं को शर्मनाक बताते हुए शुक्रवार को कहा था कि गुनहगारों को सख़्त सज़ा दिलवाने में भारत सरकार कोई कोताही नहीं होने देगी. हालांकि प्रधानमंत्री के वादों के बावजूद इन प्रदर्शनों में शामिल हुए लोगों में केंद्र सरकार के प्रति काफी गुस्सा दिखा.
'साज़िश कामयाब नहीं होगी'
दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल होने पहुंची एक महिला कमला ने इन दोनों मामलों में केंद्र की बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ उठ रहे सवालों को दोहराया.
उन्होंने कहा, "हमारा क़ानून पुलिस और सबूतों पर निर्भर करता है. धर्म के नाम पर आप किस हद तक जा सकते हैं, ये हम देख रहे हैं. धर्म और जाति के आधार पर देश को बांट कर 2019 का चुनाव जीतना चाहते हैं तो इसे वो भूल जाएं. आप देख रहे हैं... यूपी में देखिए, कश्मीर में देखिए. वो हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं लेकिन हम तो नहीं चाहते ऐसा. अगर ऐसा होता तो 1947 में ही भारत हिंदू राष्ट्र बन जाता, लेकिन यहां अलग अलग भाषा, धर्म, जाति के लोग रहते हैं और सब को मिलकर आगे बढ़ना है. हम यही कहना चाहते हैं कि धर्म के नाम पर देश के लोगों को लड़वाने की साज़िश की जा रही है, पर ये चलेगा नहीं."
प्रदर्शन में थर्ड जेंडर भी शामिल
इस प्रदर्शन में शामिल हुईं वकील गरिमा भारद्वाज ने बार काउंसिल की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा, "उन्नाव में कठुआ की घटनाएं निंदनीय है. हम दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले इसलिए यहां इकट्ठा हुए हैं.
इस प्रदर्शन में कठुआ और उन्नाव रेप के मामलों में दोषियों को सख़्त सजा हो, इस मांग को लेकर महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों के साथ थर्ड जेंडर भी शामिल हुआ.
बीबीसी ने जब लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने के विषय में जानना चाहा तो इसमें शामिल सिविल सर्विसेज़ की तैयारी कर रहे एक छात्र ने कहा, "हमारे संवैधानिक अधिकार अखंड रहे हैं. किसी के साथ असामान्य व्यवहार नहीं किया जाए. सब के साथ बिना जाति, धर्म के बराबरी का व्यवहार किया जाए. एक जागरुक समाज के नागरिक होने के नाते हमें आगे आकर इससे लड़ना है. हर कौम के लोग इस देश में सुरक्षित रहें, यही हमारी ख़्वाहिश है."
इस प्रदर्शन में जम्मू में बकरवाल समाज के परिवारों को सुरक्षा मुहैया कराए जाने की मांग की गई. साथ ही पीड़ित परिवार को सरकार की ओर से क़ानूनी सहायता दिए जाने की भी मांग की गई.
कठुआ मामले में पीड़ित पक्ष के वकील तालिब हुसैन ने कहा हिंदू एकता मंच में भाजपा ही नहीं बल्कि कांग्रेस के लोग भी शामिल हैं. साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर से विदेशियों को बाहर निकाले जाने के नाम पर खानाबदोश मुसलमानों को भी निकालने की साज़िश चल रही है.
इन घटनाओं के विरोध में चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में भी लोग सड़कों पर उतरे.
इस प्रदर्शन में शामिल नवजीत कौर ने कहा, "हमारे समाज में महिलाएं और बच्चे सुरक्षित नहीं हैं और मुझे इस बात का दुख है कि समाज के लोगों की सोच इतनी मज़बूत नहीं है कि वो एक निष्पक्ष निर्णय ले सके."
नौंवी कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा तारा कहती हैं, "मेरी मां मुझे यहां लेकर आई हैं. मुझे लगता है सभी को अपनी आवाज़ उठानी चाहिए क्योंकि कठुआ बलात्कार के जैसी घटनाएं देश में कहीं भी हो सकती हैं."
वहीं मनोविज्ञानी हरसिमरत कौर कहती हैं कि महिलाओं पर रोज़ाना अत्याचार बढ़ रहे हैं और लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं. इस प्रदर्शन से हम यह संदेश देना चाहते हैं कि हमें इस देश में रेप कल्चर को ख़त्म करना होगा."
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