हैदराबाद की मक्का मस्जिद ब्लास्ट के अभियुक्तों को बरी करने के कुछ घंटे बाद जज का इस्तीफ़ा

जज रवींद्र रेड्डी

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साल 2007 में हैदराबाद की मक्का मस्जिद धमाके में सोमवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कोर्ट के जिस जज ने सभी अभियुक्तों को बरी किया था उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है. एनआईए स्पेशल कोर्ट के जज रवींद्र रेड्डी ने यह फ़ैसला सुनाया था और इसके बाद उनके इस्तीफ़े की ख़बर आई है.

बीबीसी तेलुगू सेवा की संवाददाता दीप्ति बथिनि ने बताया कि रेड्डी ने अपना इस्तीफ़ा हाई कोर्ट को भेजा है. अभी तक यह साफ़ नहीं है कि जज रेड्डी ने अचानक से इस्तीफ़ा क्यों दिया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार जज रेड्डी ने कहा है कि उन्होंने इस्तीफ़ा निजी कारणों से दिया है और इसका मक्का मस्जिद में धमाके के फ़ैसले से कोई संबंध नहीं है.

इससे पहले, अदालत ने धमाके के सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया था, इसमें एक अभियुक्त आरएसएस के पूर्व कार्यकर्ता स्वामी असीमानंद भी शामिल थे.

मक्का मस्जिद

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जज के इस्तीफ़े पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट कर लिखा है, ''जिस जज ने मक्का मस्जिद धमाके में सभी अभियुक्तों को बरी किया है उसने इस्तीफ़ा दे दिया है. यह पहेलीनुमा है और मैं इस फ़ैसले से काफ़ी हैरान हूं.''

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2007 में हुए इस धमाके में 9 लोग मारे गए थे और 50 से ज़्यादा लोग ज़ख़्मी हुए थे. एनआईए की इस जांच पर वामपंथी पार्टियों ने सवाल उठाया था. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का कहना था कि एनआईए धमाके की सच्चाई को सामने लाने में नाकाम रही है.

फ़ैसले पर किसने क्या कहा?

2007 में हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए धमाके में आरएसएस के पूर्व कार्यकर्ता असीमानंद को एनआईए कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बाद अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आ रही थीं. कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में असीमानंद के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत नहीं हैं.

सीपीआई नेता डी राजा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, ''एनआईए कोर्ट ने सभी अभियुक्तों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. लेकिन वो कौन लोग हैं जिन्होंने मस्जिद में धमाका किया था. इस धमाके पीछे कौन ताक़ते थीं? इस सच को सामने लाया जाना चाहिए.''

राजा ने आगे कहा, ''यह सच है कि मक्का मस्जिद में विस्फोट किया गया था. लोगों के सामने यह सच्चाई आनी चाहिए कि धमाका करने वाले कौन लोग थे. हम इंतज़ार कर रहे हैं कि सरकार और जांच एजेंसी का अगला रुख़ क्या होता है. एक बात तो साफ़ है कि एनआईए धमाके के पीछे की सच्चाई को सामने लाने में नाकाम रही है.

स्वामी असीमानंद

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दूसरी तरफ़ ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने असीमानंद के रिहा होने पर कटाक्ष करते हुए कहा, ''एनआईए ने इस मामले की जांच के दौरान इसी बात को सुनिश्चित किया था कि कोर्ट उन्हें बरी कर दे. मक्का मस्जिद में हुआ धमाका कोई छोटा अपराध नहीं है.''

वहीं विश्व हिन्दू परिषद ने कोर्ट के इस फ़ैसले का स्वागत किया है. वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि यह फ़ैसला कांग्रेस के मुंह पर तमाचा है जिसने हिन्दुओं को बदनाम करने की कोशिश की.

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