दंगों में सभी फ़र्ज़ी मुकदमे हिंदुओं के ख़िलाफ़ दर्ज हुए: संजीव बालियान

संजीव बालियान

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इमेज कैप्शन, संजीव बालियान कहते हैं कि वो संगीन मामलों जैसे हत्या के मामलों में दर्ज केस को वापस लेने की बात नहीं कर रहे हैं
    • Author, विनीत खरे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पश्चिमी उत्तर प्रदेश से भाजपा सांसद संजीव बालियान और विधायक उमेश मलिक के मुताबिक साल 2013 के मुज़फ़्फ़रनगर और शामली दंगों में अभियुक्त हिंदुओं के ख़िलाफ़ दर्ज 'फ़र्ज़ी' मामलों को वापस लेने की सरकारी कार्रवाई चल रही है.

अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में दोनों नेताओं के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की बात आई थी और इसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई है.

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बसपा ने सरकार की आलोचना की है.

दोनों भाजपा नेताओं ने पांच फ़रवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी और उनसे क़रीब 850 लोगों के ख़िलाफ़ 179 दर्ज "फ़र्ज़ी" मुकदमों को वापस लेने की बात रखी.

मुज़फ़्फ़रनगर दंगे

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मुज़फ़्फरनगर दंगे

संजीव बालियान ने बीबीसी को बताया, "ये दर्ज़ मामले आगज़नी और तोड़फोड़" से जुड़े हैं और "हत्या के मामलों को वापस लेने की मांग उन्होंने नहीं की."

वो कहते हैं, "सपा सरकार ने कहा था, जो मुक़दमा दर्ज़ करवाएगा उसे मुआवज़ा मिलेगा. लोगों ने मुआवज़ा लेने के लिए मुक़दमे दर्ज़ करवा दिए."

उधर मुज़फ़्फ़रनगर दंगों पर किताब लिख चुक मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर के मुताबिक ऐसा लगता है कि पूरा सिस्टम अभियुक्तों को बचाने में लगा है.

वो कहते है, "पहले से ही कमज़ोर स्थिति को और ज़्यादा कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है. या तो आप मान लें कि लोग अपने आप ही मर गए, उनके घर अपने आप जल गए. और वो ऐसे ही घर से बेघर हो गए."

मुज़फ़्फ़रनगर दंगे

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सरकार चाहे तो...

उत्तर प्रदेश के क़ानून मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि सरकार चाहे तो ऐसा कर सकती है और "ये (मामला वापस लेना) अभी एक प्रस्ताव है".

विधायक उमेश मलिक के मुताबिक 'एक घंटे चली' मुलाकात में योगी आदित्यनाथ ने उनसे कहा कि "इसमें विधिक राय लेते हुए निश्चित रूप से, गंभीरता से इनका संज्ञान लिया जाएगा और प्रयास किया जाएगा कि जो फ़र्ज़ी मुकदमे हैं, उन्हें विधिक राय लेने के बाद वापस लिया जाए."

उन्होंने बीबीसी से कहा कि ऐसा करने से "कोई संदेश नहीं जाएगा कि भाजपा सरकार दोषियों को बचा रही है. अगर पिछली सरकार ने कोई ग़लत काम किया है तो उन्हें सुधारने के लिए जनता ने हमें भेजा है."

सितंबर 2013 के इन दंगों में 62 लोग मारे गए थे और 500 से ज़्यादा मामले दर्ज किए गए थे.

मुज़फ़्फ़रनगर दंगे

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इमेज कैप्शन, मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के दौरान कुतबा गांव के एक मुस्लिम परिवार का घर, तस्वीर एक सितंबर, 2014 की है

'हिंदुओं के ख़िलाफ़'

उन दिनों जहां सपा सरकार की आलोचना हुई थी कि उसने दंगा प्रभावित लोगों के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की, भाजपा नेता संजीब बालियान जैसे बीजेपी नेताओं पर मामले को हवा देने और सांप्रदायिक तनाव को भड़काने वाले विवादित भाषण देने के आरोप लगाए थे.

संजीव बालियान के मुताबिक "सभी फ़र्ज़ी मुकदमे हिंदुओं के ख़िलाफ़ दर्ज हुए थे. मुसलमानों पर (फ़र्ज़ी मुकदमे) दर्ज नहीं हुए थे. आप पता कर लीजिए."

संजीव बालियान के मुताबिक वो संगीन मामलों जैसे हत्या के मामलों में दर्ज केस को वापस लेने की बात नहीं कर रहे हैं.

तो वो कौन से मामले हैं जिन्हें संजीव बालियान और उमेश मलिक फ़र्ज़ी बता रहे हैं?

मुज़फ़्फ़रनगर दंगे

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तोड़फोड़ का मुक़दमा

संजीव बालियान के मुताबिक, "किसी के घर में ईंट गिरी तो तोड़फोड़ का मुकदमा दर्ज हो गया. घर से मान लीजिए किसी ने सामान उठा लिया तो वो भी लूटपाट में दर्ज हो गया. ऐसे ही निर्दोष लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज हुए."

उधर उमेश मलिक के मुताबिक, "किसी ने अपनी रज़ाई में आग लगा कर थाने में तहरीर दे दी, किसी ने अपनी खाट में आग लगी दी, किसी ने कूड़े करकट में आग लगा दी और आग लगाने के बाद थाने में तहरीर दे दी."

वहीं हर्ष मंदर बताते हैं कि अभी भी दंगा पीड़ित 60,000 से 70,000 लोग अपने घर नहीं जा पाए हैं और उन्हें दोबारा घर बसाना पड़ा है.

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