गवाहों के मुकरने से पीड़ित परिवार दुखी

- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कांधला, उत्तर प्रदेश से
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कस्बा कांधला जहाँ शहर की हदों से कुछ दूरी पर है अमन कॉलोनी. यहाँ इक़बाल अपने घर पर अंधेरे में बैठे हैं. बहुत देर से उनकी कॉलोनी में बिजली नहीं है.
इक़बाल 12 साल के आस मोहम्मद के पिता हैं जिसकी दंगों के दौरान हुई हिंसा में मौत हो गई थी. यह पुगाना के लाक गाँव के रहने वाले हैं जहां साल 2013 में जमकर हिंसा हुई थी.
आस मोहम्मद के साथ ही उनकी चाची रज्जो की भी हत्या कर दी गई थी.
घटना के बाद इक़बाल और उनके भाई का परिवार भाग कर कांधला आ गया. मुज़फ्फरनगर की अदालत में इस घटना में दो अलग-अलग लोगों की हत्या के मामले को एक साथ जोड़ दिया गया.
कुल मिलाकर 13 अभियुक्त बनाए गए जबकि एक नाबालिग सहित कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया.
इन दोनों ही मामलों में सारे अभियुक्त अदालत से इसलिए बरी कर दिए गए क्योंकि मामलों के गवाह मुकर गए हैं. इक़बाल के घर अब भी मातम का ही माहौल है. वो अब सब कुछ ऊपर वाले की अदालत पर छोड़ रहे हैं.

इक़बाल का कहना है, "अब तो अल्लाह करेगा जी फ़ैसला. हम कुछ ना करेंगे. जो हो रहा है, अल्लाह की मर्ज़ी से ही हो रहा है. इस अदालत ने बरी कर दिया तो कोई नहीं. ग़लती की सज़ा तो मिलेगी. यहाँ नहीं तो उसकी अदालत में."
वहीं उनकी पत्नी सलमा भी काफी दुखी हैं और कहती हैं कि उनका मामला पहले ही कमज़ोर कर दिया गया था. "जो लोग हमारी तरफ़ से लड़ रहे थे अदालत में, उन्होंने ही सब कमज़ोर कर दिया."
इक़बाल का कहना है कि गवाहों के टूटने से सब कुछ ख़त्म हो गया है. उन्होंने कहा, "इससे बढ़कर बोझ क्या होगा जब औलाद बाप के सामने मारी गई हो? यह जो हमारे वकील हैं, दंगे के सारे केस उन्हीं के पास हैं. अब उन्होंने क्या किया, क्या नहीं, हमें तो पता नहीं."
ज़ाहिर सी बात है कि सारा आरोप मामले के सरकारी वकील पर है. आरोप यह लग रहे हैं कि अदालत में उनकी पैरवी लचर थी इस वजह से गवाहों को उसका लाभ मिला है.

इमेज स्रोत, AP
सरकारी वकील साजिद राणा से जब मैंने बात की तो उनका कहना था कि गवाहों का अदालत में मुकरना वो नहीं रोक सकते.
वो कहते हैं, "अब अगर अदालत में गवाह मुकर रहे हैं तो मैं क्या कर सकता हूँ. मेरी तो कोई ग़लती नहीं है."
साजिद राणा ने मामले के शिकायतकर्ताओं पर ही आरोप लगाया है कि उन लोगों ने अभियुक्तों के साथ समझौता कर लिया है.
बहरहाल सामाजिक संगठनों के प्रतिवेदन के बाद राज्य सरकार ने निचली अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ ऊपरी अदालत में अपील करने का मन बना लिया है.
सरकारी सूत्रों का कहना है कि एक-दो दिन में अपील दायर भी हो जाएगी.
लेकिन क़ानून के जानकारों का कहना है कि जब गवाह निचली अदालत में ही मुकर गए हैं तो फिर वो ऊपरी अदालत में भी ज्यादा कुछ नहीं बोल पाएंगे.
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