मुज़फ़्फ़रनगरः महिलाओं ने की कथित बलात्कार की शिकायत

- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
'वे हमें पकड़कर ले गए. हमारे आदमी मार दिए गए. तीन चार घंटे हमें रखा और बारी-बारी से ग़लत काम किया. हम सब कुछ लुटाकर वहाँ से लौटे हैं, अब लौटना नहीं चाहते.'
ये आरोप हैं शामली जिले के एक दंगा प्रभावित गाँव की एक महिला के. जब वह आश्वस्त हो गई कि हम तस्वीरें नहीं ले रहे हैं तभी वो और जानकारी देने के लिए तैयार हुई.
मुज़फ़्फ़रनगर की पुलिस अधीक्षक (अपराध) कल्पना सक्सेना ने बताया है, "हमें शिविरों के ज़रिए कुछ इलाक़ों से चार शिकायतें मिली हैं. हमें 376 के तहत दो शिकायतें और दो शिकायतें 364 के तहत छेड़खानी की मिली हैं.एफ़आईआर दर्ज की है. हम जाँच कर रहे हैं. ये शिकायतें हमें राहत कैंप में रह रही महिलाओं की ओर से मिली हैं. महिला पुलिस अधिकारी अब कैंपों में जाकर महिलाओं से बात कर रही हैं. हम हर शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करके जाँच करेंगे."
दंगा प्रभावित गाँव की महिला ने आरोप लगाते हुए कहा, 'वे औरतों और लड़कियों को उठाकर ले गए. तीन घंटे एक घर में रखा गया. हमारे साथ ग़लत काम हुआ. कुछ लड़कियों के साथ तो कई आदमियों ने एक साथ ग़लत काम किया. वे कितने मर्द थे, हमें याद नहीं, लेकिन 10 से ज़्यादा थे.'
शर्मिंदगी
इस महिला ने बताया, "शर्मिंदगी की वजह से हम अपनी बात नहीं कह पा रहे थे. कई लड़कियाँ जिनके साथ ऐसा हुआ है, वे अब कैंप के बजाए अपने रिश्तेदारों के घरों में रह रही हैं. दो लड़कियों के साथ बहुत ज़्यादा हुआ. दो हफ़्ते हो गए हैं. हमारी आँखों में आँसुओं के सिवा कुछ नहीं है."
एक और महिला ने यही बात दोहराई. कई पीड़ित महिलाएं बात करने को तैयार नहीं थीं. एक ने कहा, 'हमारे घर के मर्दों को पता चला तो हमारा क्या होगा, पहले तो ग़ैर ही हमारे लिए बुरे थे, फ़िर तो हमारे अपने भी बुरे हो जाएंगे.'

हम जब 19 सितंबर को शामली के काँधला कैंप पहुँचे थे, तो पुरुष इस बारे में बात करने को तैयार ही नहीं थे. जिन गाँव की महिलाओं ने अपने साथ बलात्कार के आरोप लगाए हमने उन गाँवों के पुरुषों से बात की तो उन्होंने ऐसे किसी भी मामले की जानकारी से ही पूरी तरह इनकार कर दिया.
वहीं शामली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनिल राय ने कहा, 'हमारे पास अभी तक बलात्कार की कोई शिकायत नहीं आई है. मैं स्वयं राहत कैंपों में गया था और अपील की थी कि यदि किसी के साथ कुछ हुआ है, तो वे मामला दर्ज करवाएँ. यदि हमारे सामने ऐसी कोई भी शिकायत आती है, तो हम मामला दर्ज करके जाँच करेंगे.'
राहत कैंपों में रह रही महिलाएँ बलात्कार के मामले में अब अपना मुँह खोल रही हैं. संभवत और भी मामले हैं जो अब प्रकाश में आ पाएंगे.
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