महाराष्ट्र: किसानों और सरकार के बीच समझौता, आंदोलन वापस

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महाराष्ट्र सरकार और सूबे के किसानों के बीच 'किसानों की माँगों' को लेकर समझौता हो गया है.
किसानों ने 7 मार्च को शुरू किया अपना आंदोलन वापस ले लिया है.
सोमवार को मुंबई के विधान भवन में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फ़डनवीस की अध्यक्षता में महाराष्ट्र सरकार और किसानों के प्रतिनिधिमंडल के बीच एक बैठक हुई.

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इस बैठक के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फ़डनवीस ने कहा है, "हमने किसानों की सभी माँगें मान ली हैं और उन्हें भरोसा दिलाने के लिए एक लिखित पत्र भी जारी किया है. किसान मार्च शुरू होने के पहले दिन से ही हम कोशिश कर रहे थे कि किसानों के साथ बातचीत की जाए. हमारे मंत्री गिरीश महाजन शुरुआत से ही किसानों के संपर्क में थे."
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महाराष्ट्र सरकार ने किसानों की सभी माँगें मानने का दावा किया है और उन्हें पूरा करने के लिए किसानों से छह महीने का समय माँगा है.
सूत्रों के अनुसार, नासिक से क़रीब 180 किलोमीटर का पैदल मार्च करते हुए मुंबई के आज़ाद मैदान तक पहुंचे किसानों के वापस लौटने के लिए सरकार ने एक विशेष ट्रेन का बंदोबस्त किया है.
किसने क्या कहा?
- महाराष्ट्र सरकार में मंत्री गिरीश दत्तात्रेय महाजन ने कहा है, "किसानों के साथ एक सकारात्मक मीटिंग रही. हमने उनसे सभी मुद्दों पर बात की. उनकी क़रीब 12-13 माँगें हैं, जिनमें से लगभग सभी को हमारी सरकार मानने को तैयार है. इसके लिए एक मसौदा भी तैयार किया गया है. कल हम विधानसभा में इसे पेश करेंगे. मुझे उम्मीद है कि सरकार के फ़ैसले से सूबे के किसान संतुष्ट होंगे."
- महाराष्ट्र सरकार में जनजातीय विकास मंत्री विष्णु सावरा ने कहा, "किसानों की शिकायत है कि जो हमारी ज़मीन है उससे कम उनके नाम पर है. यानी जितनी ज़मीन वो जोतते हैं, वो उनके नाम पर होनी चाहिए. मुख्यमंत्री इस बात को मान गए हैं. महाराष्ट्र के मुख्यसचिव अब इस दिशा में काम करेंगे और अगले छह महीने में इसे लागू करने की कोशिश करेंगे."
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- सीपीआई(एम) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, "महात्मा गांधी ने भी इसी दिन सत्याग्रह की शुरुआत की थी. अगर हमारी माँगे नहीं मानी गईं या उन्हें नहीं लागू किया गया तो अगला किसान आंदोलन आज़ाद मौदान से ही शुरू करेंगे. भारत के किसान, इस देश के सैनिक (योद्धा) हैं."
- वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया, "मुंबई में किसानों का जनसैलाब जनता की ताक़त का अद्भुत उदाहरण है. कांग्रेस पार्टी केंद्र और राज्य सरकार के निष्ठुर रवैये के ख़िलाफ़ किसानों और आदिवासियों के संघर्ष में उनके साथ खड़ी है. प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी को अपने अह्म को भूलकर उनकी जायज़ मांगों को मानना चाहिए."
- अन्ना हज़ारे ने कहा है कि किसानों की माँगें मानने की बात कहने से ज़्यादा ज़रूरी है कि सरकार अब अपने वादों को पूरा करे. सरकार अब कुछ करके दिखाए. ताकि किसानों को दोबारा सड़कों पर न उतरना पड़े.
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