प्रेस रिव्यू: कासगंज में दोनों ही पक्षों के हाथ में था तिरंगा, झगड़ा रास्ते को लेकर हुआ

कासगंज में हिंसा

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इमेज कैप्शन, शनिवार को कासगंज में रह रहकर आगजनी होती रही

उत्तर प्रदेश के कासगंज में गणतंत्र दिवस के दिन हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद तनाव जारी है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक जहां दंगा हुआ वहां दोनों ही पक्षों के पास तिरंगा था और फ़साद रास्ते को लेकर हुआ.

अख़बार के मुताबिक बद्दू नगर के स्थानीय मुसलमानों ने गणतंत्र दिवस के दिन तिरंगा फहराने की तैयारियां की थीं और कुर्सियां बिछाईं गईं थीं.

वहीं बाइकों पर निकल रही तिरंगा रैली में शामिल युवाओं ने कुर्सियां हटाकर रैली वहीं से निकालने के लिए कहा था.

एक स्थानीय नागरिक ने अख़बार को बताया है कि बाइक सवार नारेबाज़ी कर रहे थे और लोगों ने उनसे गणतंत्र दिवस का जश्न ख़त्म होने का इंतेज़ार करने का आग्रह किया लेकिन वो वहां से पीछे नहीं हटे.

आईजीपी ध्रुव कांत ठाकुर ने अख़बार को बताया, "जहां घटना हुई वहां मुस्लिम समुदाय के लोग तिरंगा फहराने की तैयारी कर रहे थे."

कोटा में हर साल लाखों छात्र प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं
इमेज कैप्शन, कोटा में हर साल लाखों छात्र प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं

कोटा में ड्रग और सेक्स की लत का शिकार छात्र

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक कोटा में रहकर इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परिक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र तनाव के कारण ड्रग्स और सेक्स की लत का शिकार हो रहे हैं.

इसके अलावा नींद से जुड़ी परेशानियों, गर्भवती होने का ख़तरा, अकेलापन और वज़न कम होने जैसी दिक्कतों का सामना भी छात्रों को करा पड़ रहा है.

अख़बार ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ के एक शोध के हवाले से ये रिपोर्ट प्रकाशित की है.

हर साल डेढ़ से दो लाख छात्र प्रवेश परिक्षाओं की तैयारी करने के लिए कोटा आते हैं. साल 2013 से 2017 के बीच 58 छात्र कोटा में आत्महत्या कर चुके हैं.

नमाज़ पढ़ाती जमीदा

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नमाज़ पढ़ाने वाली महिला इमाम का विरोध

केरल की एक मस्जिद में जुमे की नमाज़ पढ़ाने वाली एक महिला इमाम को विरोध का सामना करना पड़ रहा है.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मल्लापुरम ज़िले की एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ाने वाली जमीदा का कहना है कि इस्लाम में कहीं नहीं लिखा है कि सिर्फ़ पुरुष ही इमाम हो सकते हैं.

जमीदा क़ुरान सुन्नत सोसायटी की राज्य सचिव भी हैं.

इस मुस्लिम पंथ से जुड़े लोगों का मानना है कि क़ुरान ही सच्चा दीन है और पैगंबर मोहम्मद की कहीं बातें आने वाले कल पर भी लागू रहेंगी.

जमीदा के पीछे संस्था से जुड़े कुछ पुरुषों ने नमाज़ पढ़ी थी और कोई महिला इसमें शामिल नहीं हुई थी.

रूढ़िवादी इस्लामी संगठनों ने जमीदा के कृत्य को गैर इस्लामिक करार दिया है.

वीडियो कैप्शन, फिल्म रिव्यू: 'पद्मावत' कैसी है?

'पद्मावत' की कमाई 'बाजीराव मस्तानी' से ज़्यादा

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक संजय लीला भंसाली की विवादित फ़िल्म 'पद्मावत' की चार दिनों की कमाई उन्हीं की फ़िल्म 'बाजीराव मस्तानी' की पहले चार दिनों की कमाई से दोगुनी है.

विरोध में हिंसा और चार राज्यों में रोक के बावजूद 'पद्मावत' फ़िल्म ने अब तक सौ करोड़ रुपये कमा लिए हैं.

साल 2015 में आई बाजीराव मस्तानी ने चार दिनों में 57 करोड़ रुपये ही कमाए थे.

वहीं पीरियड ड्रामा फ़िल्म 'बाहुबली-2' की चार दिनों की कमाई 'पद्मावत' के मुकाबले 78 करोड़ रुपये ज़्यादा थी.

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