ग्राउंड रिपोर्ट: भीमा कोरेगांव में किस तरह हालात बेक़ाबू हो गए?

भीमा कोरेगांव
    • Author, मयूरेश कोन्नुर
    • पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता

महाराष्ट्र में बुधवार को बुलाए गए बंद के दौरान राज्य के कई स्थानों पर हिंसा भड़क गई. हिंसा से कई जगहों पर सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुंचने की ख़बर है.

भारतीय रिपब्लिकन पार्टी बहुजन महासंघ के अध्यक्ष और डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर ने बुधवार शाम को बंद का आह्वान वापस ले लिया.

पुणे के भीमा कोरेगांव सोमवार को भड़की हिंसा के बाद आठ दलित सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने ये बंद बुलाया था.

प्रकाश आंबेडकर ने बुधवार को राज्यव्यापी बंद का आह्वान करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने न्यायिक जांच के जो आदेश दिए हैं वो उन्हें मंज़ूर नहीं हैं.

साल के पहले दिन हज़ारों दलित पुणे के भीमा कोरेगांव में स्थित वॉर मेमोरियल पर इकट्ठा होते हैं. इस जगह को दलित अपने लिए पवित्र मानते हैं.

कहा जाता है कि भीमा कोरेगांव की लड़ाई 1 जनवरी, 1818 को ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना और पेशाओं के नेतृत्व वाली मराठा सेना के बीच हुई थी.

इस लड़ाई में मराठाओं की हार हुई और जीत का सेहरा ईस्ट इंडिया कंपनी की महार रेजिमेंट के सिर बंधा. महार समुदाय उस वक्त महाराष्ट्र में अछूत समझा जाता था.

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200 साल पूरे होने का ख़ास मौका

साल 1927 में भीमराव आंबेडकर ने इस वॉर मेमोरियल का दौरा किया और इसके बाद महार समुदाय ने अगड़ी जाति के पेशवाओं पर मिली जीत की याद में इस दिन को मनाना शुरू किया.

हर साल यहां विशेष समारोह आयोजित किए जाते हैं और देश भर से हज़ारों लोग इसमें शरीक होते हैं. इस साल का आयोजन इसलिए भी ख़ास था कि भीमा कोरेगांव की लड़ाई के दो सौ साल पूरे हो रहे थे.

पहली जनवरी को भीमा नदी के किनारे स्थित मेमोरियल के पास दिन के 12 बजे जब लोग अपने नायकों को श्रद्धांजलि देने इकट्ठा होने लगे तभी हिंसा भड़की.

पत्थरबाज़ी हुई और भीड़ ने खुले में खड़ी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया. स्थानीय पत्रकार ध्यानेश्वर मेडगुले ने बताते हैं, "कुछ ही देर में हालात बेक़ाबू हो गए. इलाक़े में बड़ी तादाद में लोग मौजूद थे और जल्द ही पुलिसवाले भीड़ की तुलना में कम पड़ गए. भगदड़ की स्थिति बन गई."

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स्थानीय पुलिस का दावा

पुणे ग्रामीण के पुलिस सुपरिटेंडेंट सुवेज़ हक़ ने बीबीसी को बताया, "दो गुटों के बीच झड़प हुई और तभी पत्थरबाज़ी शुरू हो गई. पुलिस फौरन हरकत में आई. हमें भीड़ और हालात पर क़ाबू करने के लिए आंसू गैस और लाठी चार्ज का इस्तेमाल करना पड़ा. "

"अभी तक हमारी जांच से ये पता चला है कि एक व्यक्ति की मौत हुई है, 80 गाड़ियों को नुक़सान पहुंचा है. हम हिंसा में शामिल लोगों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल कर रहे हैं. हमने पूछताछ के लिए कुछ लोगों को गिरफ़्तार भी किया है."

कुछ ही घंटों के भीतर हालात पर क़ाबू पा लिया गया और वॉर मेमोरियल पर चल रहा कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा.

पुलिस ने अफ़वाहों पर काबू रखने के लिए इलाक़े की इंटरनेट स्पीड धीमी कर दी. इस हिंसा में जिस व्यक्ति की मौत हुई है, उसकी पहचान राहुल फतांगले के तौर पर हुई है.

राज्य सरकार ने इस मौत की सीआईडी से जांच कराने के आदेश दिए हैं. मृतक के परिवार के लिए 10 लाख रुपये मुआवज़े का भी ऐलान किया है.

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हिंसा की वजह

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हिंसा की न्यायिक जांच का फरमान भी जारी किया है. सोमवार की हिंसा के पीछे की वजहों को लेकर कई तरह की बातें कही-सुनी जा रही हैं.

भारतीय रिपब्लिकन पार्टी बहुजन महासंघ के अध्यक्ष और डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर ने मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "क्षत्रपति शंभाजी महाराज की हत्या के बाद उनका अंतिम संस्कार करने वाले गोविंद गायकवाड़ के मेमोरियल को कुछ लोगों ने नुक़सान पहुंचाया. पुलिस ने इस सिलसिले में एफ़आईआर भी दर्ज की है. भीमा कोरेगांव की हिंसा का इस मामले से कोई संबंध है या नहीं, इस पर जांच कराई जानी चाहिए."

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पुलिस की कार्रवाई

वधु गांव में गोविंद गायकवाड़ के मेमोरियल पर एक इंफोर्मेशन बोर्ड और एक शेड के निर्माण के बाद विवाद शुरू हुआ. कुछ स्थानीय लोगों ने गोविंद गायकवाड़ और क्षत्रपति शंभाजी को ऐतिहासिक रूप से जोड़े जाने का विरोध किया.

वधु लोकल काउंसिल के रमाकांत शिवले कहते हैं, "विवाद मेमोरियल को लेकर नहीं था बल्कि उस बोर्ड को लेकर था जिसे लोगों ने खड़ा किया. स्थानीय लोग इसे लेकर खुश नहीं थे. ये बोर्ड अब हटा लिया गया है. पुलिस ने शांति के लिए स्थानीय लोगों की बैठक बुलाई और लोग अमन के लिए तैयार भी हुए. लेकिन इसके बावजूद कुछ संगठन आए, गलफ़हमियां हुई और मुक़दमे दर्ज किए गए."

लेकिन ऐतिहासिक संदर्भों के दूसरे पक्ष भी हैं. रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के डॉक्टर सिद्धार्थ ढेंढे़ कहते हैं, "शंभाजी महाराज और गोविंद गोपाल का इतिहास कोई नया नहीं है. गोविंद गोपाल का मेमोरियल वहां सालों से है. इसलिए जो लोग इस पर एतराज उठा रहे हैं, वो समाज को बांट रहे हैं."

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शरद पवार का बयान

पुणे ग्रामीण के एसपी सुवेज़ हक़ कहते हैं, "एक जनवरी के फंक्शन से दो-तीन पहले एक मेमोरियल को लेकर विवाद था. लेकिन पुलिस ने सही समय पर दख़ल दिया. हमने सभी समूहों का एक जगह इकट्ठा किया और उनके बीच सहमति बनाने की कोशिश की. लेकिन इसके बावजूद अगर कुछ लोगों ने एक जनवरी को हिंसा कराने की कोशिश की है तो हम कार्रवाई करेंगे."

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के चीफ शरद पवार ने मंगलवार को ट्वीट किया, "भीमा कोरेगांव की लड़ाई के दो सौ साल पूरा होने के मौके पर वहां बड़ी तादाद में लोगों के इकट्ठा होने की पहले से उम्मीद थी. वधु गांव के लोग कह रहे हैं कि तीन चार दिन पहले वहां कुछ हिंदू संगठनों के लोग दूसरों को भड़का रहे थे."

मंगलवार शाम को पुलिस ने दंगा भड़काने के आरोप में समस्त हिंदू अघाड़ी के मिलिंद एकबोटे और शिव प्रतिष्ठान के शंभाजी भिडे के ख़िलाफ़ पिंपरी थाने में मामला दर्ज किया है.

वीडियो कैप्शन, कोरेगांव में भड़की हिंसा के बाद क्या हुआ?

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