'आलू से सोना... हमें तो 10 पैसे ही दिला दो'

आलू

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    • Author, वात्सल्य राय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक वीडियो पर खूब विवाद हुआ. चर्चा और विवाद की वजह ये थी कि इस वीडियो में कथित तौर पर आलू से सोना बनाने की बात की गई थी.

ये वीडियो पश्चिम उत्तर प्रदेश की 'आलू बेल्ट' में भी चर्चा में आया जहां के आलू किसानों के मुताबिक इन दिनों आलू की कीमत सोना तो दूर 'कचरे' के बराबर भी नहीं रही.

देश की राजधानी दिल्ली में रविवार को सफल स्टोर से करीब 17 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर आलू ख़रीदने वालों को हैरानी हो सकती है कि महज दो सौ किलोमीटर की दूरी पर बसे आगरा में एक किलोग्राम आलू की थोक कीमत 10 पैसे भी नहीं है.

मथुरा में आलू का उत्पादन करने वाले किसान केएल वर्मा कहते हैं कि प्रति किलोग्राम आलू उत्पादन पर किसान को सवा रुपये की लागत आती है लेकिन अब उसे 'कोई मुफ़्त भी नहीं ले रहा है'.

वो कहते हैं, "आलू किसान तो बस ज़िंदा हैं. अकेले मुझे साढ़े 11 लाख रुपये का घाटा हुआ है. रबी की फसल बोने के लिए भी पैसे नहीं बचे."

सफल स्टोर
इमेज कैप्शन, दिल्ली के मयूर विहार स्थित सफल स्टोर पर रविवार को आलू की प्रति किलोग्राम कीमत 16 रुपये 90 पैसे रही

नई फसल से नुकसान

स्वतंत्र कृषि पत्रकार दिलीप कुमार यादव के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आगरा और अलीगढ़ मंडल में बड़ी संख्या में किसान आलू की खेती करते हैं. आगरा में करीब 60 हज़ार हेक्टेयर और मथुरा में 15 हज़ार हेक्टेयर में आलू की खेती होती है. दोनों ज़िलों में करीब साढे तीन सौ कोल्ड स्टोरेज़ हैं जिनकी भंडारण क्षमता करीब 35 लाख टन है.

किसान केएल वर्मा के मुताबिक बीते साल आलू की जोरदार फसल होने की वजह से ज़्यादातर किसानों ने बाद में अच्छी कीमत मिलने की आस में आलू को कोल्ड स्टोरेज़ में रख दिया.

वो बताते हैं, " मई जून में किसानों ने कोल्ड स्टोर से बाहर रह गए आलू को 200 रुपये प्रति 50 किलो की कीमत पर बेचा. बरसात में भी दाम नहीं चढ़े. इसके बाद पंजाब से आलू की नई फसल आ गई और यूपी का नया आलू भी आ गया और पुराने आलू की पूछ बंद हो गई"

दिलीप कुमार यादव भी बताते हैं कि बाज़ार में नया आलू आने से पुराने आलू का कोई खरीदार नहीं है.

वो कहते हैं, "लोग पुराना आलू ले ही नहीं रहे हैं. जब मांग ही नहीं तो वो कूड़े के भाव भी नहीं बिक रहा है. किसान कह रहे हैं कि हमें दस पैसे की ही कीमत दिला दो."

आलू किसान

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बेहाल हैं किसान

आलू किसान कोल्ड स्टोरेज़ में 50 किलोग्राम के बैग बनाकर भंडारण करते हैं. एक बैग के लिए मार्च से नवंबर के बीच 110 से 125 रुपये किराया लिया जाता है.

आगरा मंडल के एक और किसान सुधीर अग्रवाल कहते हैं, "कोल्ड स्टोरेज़ में आलू नवंबर तक के लिए रखा जाता है. ज्यादातर किसानों के पास इतने पैसे नहीं थे कि वो भंडार में रखा माल निकालें. किसानों ने कोल्ड स्टोर मालिकों से कहा कि वो आलू बेचकर किराया वसूल कर लें."

अग्रवाल कहते हैं कि आलू किसान के पास भंडार किया आलू निकालने के लिए ढुलाई भाड़ा देने के भी पैसे नहीं हैं.

वो तल्खी के साथ कहते हैं, "आप कहें तो दो ट्रैक्टर आलू भेज देता हूं. ट्रैक्टर का किराया आप दे देना."

आलू

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सरकार का दावा

वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि सभी आलू किसान इस तरह परेशान नहीं हैं.

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही कहते हैं, " एक हफ्ते पहले हमारी बात हुई थी तब तक लगभग 99 फीसदी आलू कोल्ड स्टोरेज से निकल चुका था."

हालांकि, पश्चिम उत्तर प्रदेश के कोल्ड स्टोरेज़ संचालकों का दावा कुछ और है. वो कहते हैं कि अब भी पिछले सीजन का आलू बड़ी तादात में बचा हुआ है.

आगरा मंडल के एक कोल्ड स्टोरेज़ संचालक विनोद चौधरी कहते हैं, " अब भी दस से पंद्रह फीसदी आलू बचा हुआ है. भंडार मालिक या तो आलू बाहर निकाल कर रख रहे हैं या जानवरों को खिला रहे हैं.

वो कहते हैं कि हर कोल्ड स्टोरेज़ मालिक को औसतन 10 से 15 लाख रुपये का घाटा हुआ है.

वो कहते हैं, "कोल्ड स्टोर में आलू रखने वाले किसानों से किराया तब लिया जाता है जबकि वो आलू लेने आते हैं. जो किसान आए ही नहीं, उनसे किराया कैसे लिया जाए. इस बार न आलू किसान ने पैसा कमाया और न कोल्ड स्टोर मालिकों को पैसा मिला."

पश्चिम उत्तर प्रदेश के सुधीर अग्रवाल जैसे किसान मौजूदा स्थिति के लिए प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहते हैं, "यूपी सरकार ने खरीद का आदेश किया लेकिन खरीद न के बराबर हुई."

सफल स्टोर की रेट लिस्ट
इमेज कैप्शन, दिल्ली के मयूर विहार फेज़ 3 स्थित सफल स्टोर की रविवार की रेट लिस्ट

भाव उठे तब क्यों नहीं बेचा?

वहीं कृषि मंत्री शाही मौजूदा स्थिति के लिए किसानों को ही जिम्मेदार बता रहे हैं.

कृषि मंत्री शाही कहते हैं, "प्रदेश में पहली बार हमारी सरकार ने आलू खरीद का फ़ैसला किया. मार्च में हमारी सरकार बनी और अप्रैल में खरीदारी शुरू कराई गई. सरकार ने सीजन में खरीदारी के लिए 467 रुपये प्रति क्विंटल का रेट तय किया था. उस समय बहुत कम मात्रा में किसान आलू लेकर आए."

शाही आगे कहते हैं, "उसके बाद हमने एक्सपोर्ट की व्यवस्था की. राज्य से बाहर भेजने पर 25 रुपये प्रति क्विंटल ट्रांसपोर्ट पर छूट दी गई."

वो ये भी कहते हैं, "बीच में बाज़ार के भाव उठे थे उस समय उनको आलू बेच देना चाहिए था."

सरकार को आलू न बेचने के सवाल पर किसान केएल वर्मा कहते हैं कि सरकार ने खरीद के लिए जो पैमाने तय किए थे, उन पर ख़रा उतरना मुश्किल था.

वो कहते हैं, " योगी सरकार ने कई शर्तें लगा दी थीं. आलू का साइज़ सवा इंच का हो. कलर साफ हो. अच्छी पैकिंग में हो. एक भी आलू दबा न हो. तो ऐसा आलू तो किसी भी काश्तकार के पास मिलना नहीं है."

इस पर कृषि मंत्री शाही कहते हैं कि चाहे आलू हो या गन्ना हर फसल की खरीदारी का मानदंड तय होता ही है.

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कैसे सोना उगलेगा आलू?

उधर, किसान सुधीर अग्रवाल सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहते हैं, " जब नीयत सही होगी तो आमदनी ठीक होगी. सिर्फ गाल बजाने से नहीं होगी.हम 65 प्रतिशत लोग जो देहात में रहते हैं. खेती बाड़ी करते हैं. उनकी कोई सुनने वाला ही नहीं है."

अग्रवाल दावा करते हैं कि अगर सरकार सही नीति तैयार करे तो आलू वाकई सोना उगल सकता है.

वो कहते हैं, "हम बीते 15 साल से कह रहे हैं कि आप वोदका का आयात कर रहे हैं. हमें आलू से वोदका बनाने का लाइसेंस दे दीजिए. वोदका बनती ही आलू से है. इनके अलावा जितने भी सेंट हैं उनकी मिक्सिंग में आलू का एल्कोहल ही काम आता है. ये तरीके आलू को सोना बना देंगे"

लेकिन फिलहाल आलू मिट्टी के भाव भी नहीं पूछा जा रहा है.

परेशान किसानों को राहत के सवाल पर कृषि मंत्री शाही का कहना है कि इस वक्त कोल्ड स्टोर खाली हो चुके हैं. फिलहाल के लिए कोई योजना नहीं है. आलू की अगली फसल के समय परिस्थिति के मुताबिक फैसला किया जाएगा.

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