सोशल: 'चायवाला' का ताना कांग्रेस को कैसे ले डूबा था?

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मज़ाक, तंज़, अपमान या सियासी चूक. इन सभी के बीच महीन सी रेखा होती है, जो दिखती तो नहीं लेकिन ज़रा सी भूल होने पर भारी नुकसान की नींव रख देती है.
ऐसा नहीं कि नेता या सियासी गलियारों में भद्दी भाषा का इस्तेमाल नहीं होता. आए दिन वही होता रहता है. लेकिन तंज़ कब अपने फ़ायदे के बजाय, दूसरे का फ़ायदा बन जाएं, इसका ख़्याल रखना बेहद ज़रूरी है.
और कांग्रेस जितना जल्द ये सीख लेगी, उसके लिए उतना अच्छा रहेगा. गुजरात विधानसभा चुनाव क़रीब हैं और कांग्रेस से जुड़ी एक इकाई ने तंज़ कसने के चक्कर में ऐसी ही एक भूल की.

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ब्लू टिक टि्वटर हैंडल
भारतीय युवा कांग्रेस की ऑनलाइन मैगज़ीन "युवा देश" के ब्लू टिक टि्वटर हैंडल से मंगलवार शाम एक तस्वीर पोस्ट की गई, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी, अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेज़ा मे दिखाई दी.
इस तस्वीर पर तीन डायलॉग बॉक्स बने थे. जिनमें मोदी वाले डायलॉग बॉक्स में लिखा गया, 'आप लोगों ने देखा विपक्ष मेरे कैसे कैसे मेमे बनवाता है?'
ट्रंप वाले डायलॉग बॉक्स में लिखा था, 'उसे मेमे नहीं, मीम कहते है.'
और टेरेज़ा मे वाले डायलॉग बॉक्स में लिखा था, 'तू चाय बेच.'

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चाय का ताना
बवाल इसी पर मचा. चाय का ताना भाजपा को बुरा लगा और सियासी हमले का पहला दांव चला गया.
भाजपा ने कहा कि ऐसा कहकर कांग्रेस ने पूरे गुजरात का, पूरे देश का अपमान किया है.
मामला हाथ से निकलता देख, युवा देश ने कुछ ही देर बाद ये ट्वीट डिलीट कर दिया.
केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने लिखा, ''मैडम सोनिया गांधी और राहुल गांधी क्या आप अब भी मानते हैं कि आपको भारत पर राज करने का दैवीय अधिकार मिला हुआ है.''
''देश युवा कांग्रेस के ट्वीट पर आपकी प्रतिक्रिया चाहता है, जो शर्मनाक और गरीबों का अपमान है. आप ट्वीट मिटा सकते हैं लेकिन गरीबों के प्रति आपकी सोच साफ़ दिख रही है.''

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देश का प्रधानमंत्री
और इतनी जल्दी इसे डिलीट करने की कांग्रेस के पास बड़ी वजह है. उसे अतीत याद है. साल 2014 में दिल्ली में कांग्रेस का सम्मेलन था, जिसमें उसके एक वरिष्ठ नेता ने ऐसी ही एक चूक की थी, जिसे भाजपा ने अपने सबसे बड़े हथियार में बदल दिया था.
मणिशंकर अय्यर ने कहा था, ''मैं आपसे वादा करता हूं कि 21वीं सदी में नरेंद्र मोदी इस देश का प्रधानमंत्री कभी नहीं बन पाएंगे. लेकिन अगर वो यहां आकर चाय बेचना चाहते हैं, तो हम उन्हें इसके लिए जगह दिला सकते हैं.''
दरअसल, इससे पहले कई बार नरेंद्र मोदी और भाजपा ये कहती आई थी कि वो बचपन में चाय बेचा करते थे. अय्यर का ताना इसी पर था लेकिन उल्टा पड़ा.

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'चाय पर चर्चा'
भाजपा के सोशल मीडिया कैम्पेन और प्रचार तंत्र ने इसे तुरंत लपका और कहा कि कांग्रेस 'गरीब परिवार से आने वाले और बचपन में चाय बेचने वाले' व्यक्ति को देश का प्रधानमंत्री बनते नहीं देख सकती.
दूसरे स्तर पर 'चाय पर चर्चा' शुरू की गई जिसमें नरेंद्र मोदी आम लोगों से बातें किया करते थे और मीडिया उन आयोजनों को लाइव दिखाया करता था.
इसके अलावा ऐसा ही एक और जुमला सोनिया गांधी के तरकश से निकला था और वो तीर सीधे कांग्रेस को लगा. वाकया साल 2007 का है जब विधानसभा चुनावों के प्रचार में सोनिया ने तंज़ कसते हुए 'मौत का सौदागर' कहा था.

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'मोदी थे कैंटीन कॉन्ट्रेक्टर'
मोदी, मतदाताओं से जुड़ने के लिए बार-बार ख़ुद को चायवाला कहा करते थे तो कांग्रेस ने कई बार उनकी इस योजना की हवा निकालने की कोशिश भी की.
साल 2014 के फ़रवरी में कांग्रेस ने यहां तक कहा था कि मोदी चायवाले नहीं थे बल्कि वो कैंटीन कॉन्ट्रेक्टर थे. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अहमद पटेल ने 'चाय पर चर्चा' को चुनावी दांव करार दिया था.
उन्होंने कहा था, ''ये चाय पर चर्चा नाटक है और चुनावों को दिमाग में रखकर ऐसा किया जा रहा है. चाय बेचने वालों के एसोसिशन ने कहा था वो कभी चाय नहीं बेचा करते थे बल्कि कैंटीन कॉन्ट्रेक्टर थे.''

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मणिशंकर क्या बोले?
ये सारी कहानी जिन मणिशंकर से शुरू हुई थी. जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ''आप फिर मुझे मिसकोट कर रहे हैं. रिकॉर्ड दिखाते हैं उन्होंने ख़ुद को ही चायवाला कहा था. एक नहीं बल्कि कई बार.''
''मुझसे साल 2014 में 17 जनवरी को पूछा गया था कि मैं ऐसा क्यों मानता हूं कि वो भारत के प्रधानमंत्री क्यों नहीं बनने चाहिए, तो इस पर मैंने कई कारण बताए थे कि वो क्यों जवाहरलाल नेहरू के जूतों में फ़िट क्यों नहीं होते.''
''और फिर मैंने कहा था कि अगर वो चुनाव हार जाते हैं और दोबारा चाय बेचना चाहते हैं तो हम इंतज़ाम कर सकते हैं. मुझे यक़ीन नहीं होता कि मैं इतना प्रभावशाली हूं कि एक चुटकुला पूरी कांग्रेस पार्टी को हरवा सकता है. मोदी की जीत के अरबों कारण थे.''












