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'फ़ैसले पीएम मोदी के हैं, सवाल उन्हीं से करेंगे ना?'
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरू से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
फ़िल्म अभिनेता प्रकाश राज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक बार फिर ज़ुबानी हमला किया है. उनका कहना है कि उनकी नज़रों में प्रधानमंत्री की इज़्ज़त कम हुई है.
बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में प्रकाश राज ने कहा, "मूडीज़ की रेटिंग देश और व्यापारियों के लिए तो अच्छी है लेकिन ज़रा ग्रामीण भारत के हालात पर भी नज़र दौड़ाइए. नोटबंदी, जीएसटी और देश में बन रहे डर के माहौल की वजह से मेरी नज़रों में प्रधानमंत्री की इज़्जत कम होती जा रही है."
प्रकाश राज दक्षिण भारतीय फ़िल्मों का बड़ा चेहरा हैं. बॉलीवुड की कई फ़िल्मों में भी उन्होंने काम किया हैं.
प्रकाश राज का कहना है, "मूडीज़ की अच्छी रेटिंग से भारत को विश्व बैंक से कर्ज़ लेने में मदद मिलेगी, लेकिन हमें समझना होगा कि इसका फ़ायदा सिर्फ बड़े व्यापारियों को मिलेगा. ज़रा ग्रामीण भारत के बारे में भी सोचिए, उस पर इस रेटिंग का कोई असर नहीं पड़ेगा."
प्रकाश राज ने कहा है कि वे प्रधानमंत्री से मुश्किल सवाल पूछना बंद नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, "समस्या ये है कि यहां सभी को सब कुछ पता है. जब मैंने कहा कि नोटबंदी से काला धन नहीं आने वाला तो यह बात सभी को पता थी. लेकिन लोकतंत्र में आपका सवाल पूछना बेहद ज़रूरी है. अगर हम सवाल ही नहीं पूछेंगे तो वह लोकतंत्र नहीं है."
बदल रहा है लोगों का नज़रिया
प्रकाश राज का कहना है कि धीरे-धीरे सरकार के प्रति लोगों का नज़रिया बदल रहा है, आज भले ही लोग ज़्यादा मुखर न हों लेकिन जब उन्हें मौका मिलेगा वे जवाब जरूर देंगे.
उन्होंने कहा, "शांत जनता ही बड़ी क्रांति लाती है, एक दिन वो बोलेंगे, शायद उनकी संख्या ज़्यादा न हो लेकिन मुझे भरोसा है कि हवा बदल रही है."
"मुझे इस सरकार से बहुत उम्मीदें थीं लेकिन आज मेरे विचार बदल गए हैं. बहुत से लोगों को भी मेरी ही तरह महसूस हो रहा है. आज मैंने आवाज़ उठानी शुरू की है. और भी आवाज़ें उठेंगी."
कौन बना रहा है डर का माहौल
फ़िल्म 'पद्मावती' को लेकर चल रहे विवाद पर प्रकाश राज ने कहा कि अगर राजस्थान के राजपूत पद्मावती के अस्तित्व पर विश्वास करते हैं, तो उन्हें अपने विचार और भावनाएं सही तरीके से प्रकट करनी चाहिए.
उन्होंने कहा, "अपनी बात रखने का एक तरीका होता है. देश में कानून-व्यवस्था है, सेंसर बोर्ड है. लेकिन यह क्या तरीका हुआ कि आप धमकी देंगे, 'मैं तुम्हारा गला काट दूंगा'. क्या इसका मतलब ये कि देश में सरकार नहीं है या फिर आपको देश की सरकार पर भरोसा नहीं है, यह सब कैसे हो रहा है?"
प्रकाश राज ने कहा, "आप इन लोगों को चुप होने के लिए क्यों नहीं बोलते हैं? सरकार आख़िर क्या कर रही है. कोई आदमी किसी की गर्दन काटने की बात कर रहा है, आखिर उनके अंदर ऐसा कहने की हिम्मत कहां से आ रही है? देश में यह डर का माहौल तैयार करने के पीछे किसका हाथ है?"
'फ़ैसले मोदी के तो उन्हीं से सवाल करूंगा'
प्रकाश राज का कहना है कि देश के सभी बड़े फ़ैसले जब मोदी लेते हैं तो उनसे जुड़े सवालों के जवाब भी वो ही देंगे.
उन्होंने कहा, "जब मैं जीएसटी की बात करता हूं तो मैं देश के वित्त मंत्री से सवाल पूछ रहा होता हूं. लेकिन क्या इस देश के सभी फैसले प्रधानमंत्री नहीं लेते? अगर ऐसा है तो मैं उन्हीं से सवाल करूंगा."
"जीएसटी पर मेरे सवाल सिर्फ बीजेपी के लिए नहीं हैं, ये उन सभी पार्टियों और मुख्यमंत्रियों के लिए भी हैं जो इसे लागू करने के लिए ज़िम्मेदार हैं. जीएसटी मोदी का अकेले का लिया निर्णय नहीं है. इसलिए अगर मैं जीएसटी पर सवाल करता हूं तो मैं मोदी विरोधी कैसे हो गया?"
राजनीति में प्रवेश करने की संभावना से प्रकाश राज ने इंकार किया है.
उन्होंने कहा, "राजनीति में आने की मेरी कोई इच्छा नहीं है, मैं सिर्फ एक निडर और ईमानदार नागरिक बने रहना चाहता हूं. मेरा कोई एजेंडा या झंडा नहीं है."
"सवाल पूछने के लिए राजनीति में उतरना ज़रूरी नहीं. ये तो हर नागरिक का अधिकार है."
बड़ी शख्सियतों के राजनीति में प्रवेश करने पर प्रकाश राज कहते हैं, "महेंद्र सिंह धोनी देश के नंबर एक क्रिकेटर हैं, तो क्या उन्हें मुंबई का पुलिस कमिश्नर बना दिया जाए? मदर टेरेसा एक महान शांति दूत थीं, क्या आप उन्हें रक्षा मंत्री बना देते?"
वो कहते हैं. "हमें समझना चाहिए कि सभी जिम्मेदारियां अलग-अलग होती हैं."