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मूडीज़ रेटिंग से गुजरात में कितना फ़ायदा मिलेगा?
- Author, समीर हाशमी
- पदनाम, बीबीसी बिज़नेस संवाददाता
अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट एजेंसी मूडीज़ ने 2004 के बाद पहली बार भारत की रेटिंग को बढ़ाया है. इसकी वजह बीते एक साल में केंद्र सरकार के क़दमों को बताया गया और कहा गया है कि आने वाले दिनों में ये क़दम बेहतर साबित होंगे.
मूडीज़ ने भारत की रेटिंग को बीएए 3 के बदले बीएए2 किया है, यानी स्टेबल से पॉजिटिव रेटिंग हो गई है. इस बदलाव का मतलब ये है कि भारत निवेश के लिहाज से इटली और फ़िलीपींस जैसे देशों की क़तार में आ गया है.
विश्लेषकों के मुताबिक नई रेटिंग से भारत में घरेलू और विदेशी कंपनियों का काम करना आसान और सस्ता होगा. भारत की पहचान निवेश करने वाले केंद्र के तौर पर मज़बूत होगी.
मूडीज़ की रैंकिंग से पहले कुछ ही दिनों पहले वर्ल्ड बैंक की कारोबार करने के लिहाज वाली रैंकिंग में भारत की स्थिति 30 स्थान बेहतर हुई थी.
मूडीज़ की रैंकिंग का असर भारत के शेयर बाज़ार पर भी देखने को मिला है. सेंसेक्स में 235.98 अंकों का उछाल देखने को मिला, जबकि निफ़्टी में 68.85 अंक का उछाल देखने को मिला.
मुंबई स्थित ब्रोकरेज फ़र्म जियोजिट बीएनपी पारिबा के उपाध्यक्ष गौरांग शाह ने कहा, "सरकार ने जो सुधार किए हैं, उनका फ़ायदा मिला है. इससे ये संकेत भी मिल रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार इस बात को समझ रही है कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही रास्ते पर है."
ज़्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि इन सुधारों के चलते लोगों को थोड़े समय तक मुश्किल हुई हो लेकिन मूडीज़ की रेटिंग से ये ज़ाहिर होता है कि इन क़दमों से सुधार की संभावना बढ़ी है.
गौरांग शाह ने उम्मीद जताई है कि एसएंडपी और फ़िच जैसी एजेंसियां भी भारत को बेहतर रेटिंग देंगी.
वे कहते हैं, "अगले कुछ महीनों में, दूसरी एजेंसियों की रेटिंग आनी है, उसमें भी भारत की स्थिति बेहतर होगी."
एसएंडपी ने भारत की रेटिंग को बीबीबी निगेटिव रखा हुआ है, जो जंक स्टेट्स से महज एक क़दम ऊपर है.
केयर रेटिंग एजेंसी के मुख्य इकॉनामिस्ट मदन साबनवीस कहते हैं, "कुछ एजेंसियां रेटिंग पर फ़ैसला लेने के लिए बजट का इंतज़ार करेंगी."
मूडीज़ की रेटिंग में सुधार के बावजूद कुछ विश्लेषकों के मुताबिक अभी भी भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां बनी हुई हैं.
मदन सबनवीस कहते हैं, "इसमें शक़ नहीं है, नई रेटिंग से सरकार को फ़ायदा ज़रूर हुआ है, लेकिन सरकार को बड़ी आर्थिक चुनौतियों, मसलन रोजगार और निजी निवेश पर सुधार करना होगा."
2014 में नरेंद्र मोदी विकास और आर्थिक तरक्की के नाम पर चुनाव जीता था. चुनावी अभियान के दौरान बड़ी संख्या में रोजगार देने का वादा भी उन्होंने किया था. उनकी सरकार के साढ़े तीन साल पूरे हो चुके हैं. लेकिन सरकार बड़ी संख्या में नौकरियां सृजित नहीं कर सकी हैं.
भारत में हर 1.2 करोड़ नई नौकरियों की ज़रूरत है, लेकिन सरकार इस लक्ष्य को पूरा नहीं कर पायी है, ऐसे में बेरोजगारों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है. गुजरात में चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बेरोजगारी को बड़ा मुद्दा बना रहे हैं.
केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था को बेहतर करने के लिए जो क़दम उठाए हैं उनमें सार्वजनिक बैंकों को 2.11 लाख करोड़ रुपये की सहायता देना है. यस बैंक के चीफ़ इकॉनामिस्ट शुभादा राव बताते हैं, "बैंकों को आर्थिक सहायता दिए जाने से कई आर्थिक समस्याओं का हल निकलेगा."
बैंक जब ज़्यादा कर्ज देने की स्थिति में होंगे तो निवेश भी बढ़ेगा और ज़्यादा नौकरियां उत्पन्न होंगी.
लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या मूडी रेटिंग का असर गुजरात चुनाव पर पड़ेगा?
मदन सबनवीस कहते हैं, "रेटिंग अपग्रेड से कारोबारी बाज़ार को तो फ़ायदा होगा लेकिन किसी राज्य के चुनाव पर इसका क्या असर होगा, क्योंकि वहां स्थानीय मुद्दे अहम होते हैं."
लेकिन कुछ विश्लेषकों के मुताबिक इससे बीजेपी को फ़ायदा होगा. जियोजीत बीएनपी परिबास के गौरांग शाह कहते हैं, "ऐसी घोषणाओं का सीधा असर भले नहीं हो लेकिन इससे चुनावी अभियान को फ़ायदा तो मिलता है."
गुजराती चुनाव पर भले इसका जो भी असर पड़े, लेकिन मूडीज़ रेटिंग एक तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए क्रिसमस का तोहफ़ा है, जो पिछले कुछ महीनों से अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ़्तार और जीएसटी लागू करने के चलते लगातार आलोचनाओं से घिरे हैं.
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