पहली बार श्री श्री को लेकर नहीं हो रहा विवाद

श्री श्री रविशंकर

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आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर आज अयोध्या में हैं. श्री श्री बिना किसी के बुलाए बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद की मध्यस्थता करने पहुंच गए हैं.

लेकिन भारत के सबसे बड़े विवाद को सुलझाने के प्रयास कर रहे श्री श्री स्वयं भी कई बार विवादों में रहे हैं.

श्री श्री सबसे बड़े विवाद में तब घिरे थे जब दिल्ली में यमुना किनारे आयोजित किए गए वर्ल्ड कल्चरल फ़ेस्टिवल पर राष्ट्रीय हरित ट्राइब्यूनल ने सवाल उठाए थे.

यमुना किनारे श्री श्री का पंडाल

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इमेज कैप्शन, एनजीटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि श्री श्री के कार्यक्रम से यमुना को भारी नुकसान हुआ है

एनजीटी को नहीं दिया जुर्माना

ट्राइब्यूनल ने श्री श्री की संस्था ऑर्ट ऑफ़ लिविंग पर यमुना को हुए नुकसान के लिए पांच करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया था.

मार्च 2016 में हुए कार्यक्रम को एनजीटी ने शर्तों के साथ अनुमति दी थी. लेकिन श्री श्री की संस्था ने ये जुर्माना जमा नहीं कराया.

एनजीटी के विशेषज्ञों के पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि श्री श्री के कार्यक्रम की वजह से "पर्यावरण को इतना भारी नुकसान हुआ है कि उसकी भरपाई नहीं हो सकती."

बाद में एक बयान में श्री श्री ने एनजीटी को ही यमुना में हुए नुकसान का ज़िम्मेदार ठहरा दिया.

अपने बयान में श्री श्री ने कहा कि कार्यक्रम के लिए अनुमति देने के लिए एनजीटी पर ही जुर्माना लगाया जाना चाहिए. यह मामला अभी भी एनजीटी में चल रहा है.

समलैंगिकता

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समलैंगिकता स्थायी नहीं

श्री श्री के हाल ही में समलैंगिकता पर दिए गए बयान पर भी विवाद हुआ. उन्होंने कहा था कि समलैंगिकता एक प्रवृत्ति है और इसे बाद में बदला जा सकता है.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक छात्र को जवाब देते हुए श्री श्री ने कहा था, "समलैंगिक होना कोई स्थायी लक्षण नहीं है. मैंने ऐसे कई लोगों को देखा है जो पहले समलैंगिक होते थे और बाद में विषमलैंगिक हो गए. इसके अलावा ऐसे भी लोग हैं जो बिलकुल सामान्य होते हैं, लेकिन बाद में समलैंगिक बन जाते हैं."

श्री श्री की इस बात पर अभिनेत्री सोनम कपूर ने भी अपनी राय दी थी. उन्होंने कहा था, "समलैंगिकता कोई प्रवृत्ति नहीं है, यह जन्मजात होती है और पूरी तरह सामान्य है."

हालांकि श्री श्री समलैंगिकता को गुनाह नहीं मानते.

भारत में समलैंगिकता को अपराध क़रार दिए जाने के बाद श्री श्री ने कहा था, "समलैंगिकता को अपराध क़रार देना सही नहीं है. ये लोगों की प्राथमिकता है. हर किसी के अंदर पुरुष और स्त्री के तत्व होते हैं, भले ही उनका जेंडर कोई भी हो. कभी कोई प्रवृत्ति सक्रिय होती है तो कभी कोई प्रवृत्ति सक्रिय होती है."

किसान आत्महत्या
इमेज कैप्शन, भारत में किसानों की आत्महत्या एक बड़ी समस्या है

ध्यात्म की कमी से ख़ुदक़ुशी

श्री श्री रविशंकर ने इस साल अप्रैल में किसानों की ख़ुदक़ुशी पर अपनी राय देते हुए कहा कि किसान अध्यात्म की कमी की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं.

"हमने विदर्भ के 512 गांवों में पदयात्रा की है और उस आधार पर हम कह सकते हैं कि केवल ग़रीबी किसानों की ख़ुदक़ुशी का कारण नहीं है. उनमें आध्यात्म की भी कमी होती है. इसलिए मैं इस क्षेत्र (आध्यात्म) में काम करने वाले सभी लोगों से किसानों तक पहुंचने का आग्रह करता हूं. किसानों में आत्महत्या की मनोवृत्ति को खत्म करने के लिए योग और प्राणयाम जरूरी है." श्री श्री ने यह बात एक संवाददाता सम्मेलन में किसानों की आत्महत्या पर पूछे गए सवाल पर कही.

मलाला युसुफ़ज़ई

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इमेज कैप्शन, मलाला को शांति का नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद श्री श्री ने कहा था कि उन्हें भी नोबेल पुरस्कार का प्रस्ताव मिला था जो उन्होंने ठुकरा दिया था

मलाला को नोबेल पर सवाल

श्री श्री रविशंकर ने पाकिस्तान की छात्रा मलाला यूसुफ़ज़ई को शांति का नोबेल पुरस्कार दिए जाने पर ऐतराज़ जताया था.

उन्होंने कहा कि मलाला यूसुफ़ज़ई ने ऐसा कुछ भी नहीं किया है जिसके लिए उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार दिया जाना चाहिए. रविशंकर ने यह भी बताया कि उन्हें भी नोबेल पुरस्कार का प्रस्ताव मिला था.

एक प्रेस वार्ता में बात करते हुए श्री श्री ने कहा था, "मुझे भी शांति का नोबेल पुरस्कार देने का प्रस्ताव दिया गया था लेकिन मैंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया क्योंकि मैं काम में भरोसा रखता हूं, पुरस्कार में नहीं."

असदउद्दीन ओवैसी

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नोबेल पाने के लिए हथकंडा

सांसद असदउद्दीन ओवैसी को लगता है कि श्री श्री अयोध्या विवाद में दिलचस्पी नोबेल पुरस्कार पाने के लिए दिखा रहे हैं.

ओवैसी ने हाल ही में कहा था कि, "रविशंकर इस विवाद को सुलझाने के लिए कोई अथॉरिटी नहीं हैं. वो कुछ भी कर लें लेकिन उन्हें नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने वाला है. रविशंकर पहले उस जुर्माने को चुकाएं जो उन पर एनजीटी ने लगाया है, शांति की बातें बाद में करें."

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