कौन हैं देश के सबसे ताक़तवर नेता का बेटा जय शाह?

जय शाह

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    • Author, प्रशांत दयाल
    • पदनाम, बीबीसी गुजराती के लिए

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के इकलौते बेटे हैं जय अमित शाह.

मौजूदा समय में अमित शाह देश के दूसरे सबसे ताक़तवर शख़्स माने जाते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद. लेकिन 27 साल की उम्र और औसत कद काठी वाले जय अमित शाह इन दिनों दूसरी वजह से चर्चा में हैं.

वेबसाइट द वायर की स्टोरी के मुताबिक नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अमित शाह के बेटे का कारोबार कई गुना बढ़ गया है.

ऐसे में उनके कारोबार के विस्तार को उनके पिता की राजनीतिक हैसियत से जोड़कर देखा जा रहा है, कांग्रेस पार्टी की ओर से वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री से 'शाह के बिजनेस मॉडल' को एक्सप्लेन करने की मांग की है.

हालांकि जय अमित शाह के बचाव में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल सामने आए और उन्होंने स्टोरी करने वाली वेबसाइट पर मुक़दमा दर्ज कराने की बात कही है. इन सबको लेकर सोशल मीडिया पर काफ़ी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

ज़ाहिर है विपक्ष से लेकर सरकार तक में, चर्चा के केंद्र में जय अमित शाह आ गए हैं. क्या करते हैं जय अमित शाह और गुजरात में पिता के साये में किस तरह बढ़ा है उनका कारोबार, ये जानने में हर किसी की दिलचस्पी होगी.

जब पहली बार मीडिया की नज़रों में आए जय

वैसे जय अमित शाह पर पहली बार मीडिया की नज़र साल 2010 में पड़ी थी. तब 20 साल का एक युवा लड़का देश के जाने माने वकील राम जेठ मलानी के साथ गुजरात हाई कोर्ट आया करता था.

अमित शाह

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कोर्ट की कार्यवाही के दौरान वह वकीलों के पीछे वाली दूसरी कतार में बैठा रहता. कोर्ट की बहस में एक तरफ जहां राम जेठमलानी मुद्दे से जुड़े अपने तर्क पेश करते, वहीं दूसरी तरफ़ से केटीएस तुलसी उन तर्कों को काटने की कोशिश करते.

वह लड़का वकीलों की दलीलों की बजाय जज के चेहरे पर चढ़ते-उतरते भावों को समझने की कोशिश किया करता. कोर्ट की कार्यवाही के दौरान वह लगातार हनुमान चालीसा का पाठ करता रहता.

2010 तक शायद ही कोई इस लड़के को जानता था, इस लड़के का नाम था जय शाह.

साल 2010 में ही सीबीआई ने अमित शाह को सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में गिरफ़्तार किया था. उस वक्त जय शाह अपने पिता की जमानत के लिए कोर्ट के चक्कर लगा रहे थे. यही वो वक्त था जब वे पहली बार मीडिया और जनता की नज़रों में आए.

गुजरात हाईकोर्ट ने अमित शाह को जमानत दे दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनके गुजरात में प्रवेश करने पर रोक लगा दी, इसके बाद अमित शाह दिल्ली रवाना हो गए.

उस समय अमित शाह नारनपुरा से गुजरात विधानसभा के सदस्य थे. लेकिन उनके दिल्ली चले जाने के बाद उनकी विधानसभा में लोगों की समस्याएं सुनने की ज़िम्मेदारी जय ने उठाई.

इसके साथ ही उन पर अपने पिता के शेयर मार्केट से जुड़े बिजनेस को संभालने की ज़िम्मेदारी भी आ गई.

गुजरात क्रिकेट की ज़िम्मेदारी

अपने पिता के नक्शे-क़दम पर चलते हुए जय गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन यानी जीसीए के साथ जुड़ गए. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन का पद खाली हो गया था, जिसे अमित शाह ने संभाला.

अमित शाह के बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन की लगभग पूरी ज़िम्मेदारी जय के हाथों में सौंप दी, उन्होंने जय को जीसीए का संयुक्त सचिव नियुक्त कर दिया.

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गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व अधिकारी हितेश पटेल ने बीबीसी न्यूज़ गुजराती को बताया कि अमित शाह और जय शाह की आपस में तुलना नहीं की जा सकती. जय हमेशा ही लो-प्रोफाइल रहना ही पसंद करते हैं.

पटेल बताते हैं कि जय की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे जीसीए प्रशासन की रोज होने वाली गतिविधियों के लिए समय नहीं निकाल पाते, साथ ही उनके अंदर अपने पिता के जैसी समझ भी नहीं है.

पिता का रुतबा नहीं दिखता

जय ने निरमा इंजीनियरिंग इंस्टिट्यूट से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. तीन साल पहले उन्होंने अपनी क्लासमेट रुशिता पटेल के साथ शादी की थी.

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पिता और पुत्र में यह ख़ास गुण है कि वे अपनी निजी ज़िंदगी को कभी भी सार्वजनिक नहीं होने देते.

अमित शाह के करीबी दोस्त कमलेश त्रिपाठी ने बीबीसी को बताया, ''अमित शाह ने शुरुआत से ही इस बात का ख्याल रखा कि उनके बेटे पर अपने पिता के रुतबे का असर न दिखे.''

एक और समानता जो जय और अमित शाह में देखने को मिलती है, वह यह है कि दोनों ही किसी को अपने परिवार और निजी दोस्तों की मंडली में आसानी से जगह बनाने नहीं देते.

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इमेज कैप्शन, बेटे जय और बहु रुशिता के साथ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह

जैसे कि जब जय की बेटी का जन्म हुआ तो उस कार्यक्रम में बहुत कम रिश्तेदारों और दोस्तों को बुलाया गया.

वैसे शाह परिवार को जानने वाले लोगों का दावा है कि जय का बस एक लक्ष्य है अपने व्यापार को आगे बढ़ाना और ज़्यादा से ज़्यादा पैसा बनाना.

अब उनका व्यापार राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप का विषय बन चुका है.

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