कश्मीर में कथित पाकिस्तानी चरमपंथियों की क़ब्रगाह!

गैंतामुल्ला

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    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, बारामुला से, बीबीसी हिंदी के लिए

भारत प्रशासित कश्मीर के बारामूला ज़िले में उड़ी-मुज़फ़्फ़राबाद राजमार्ग पर एक छोटा सा गांव है - गैंतामुल्ला. वहां मौजूद है एक क़ब्रिस्तान, आम क़ब्रिस्तानों से कुछ अलग.

साल भर पहले तैयार इस क़ब्रिस्तान में वो शव दफ़न होते हैं जो भारतीय सुरक्षाबलों के मुताबिक़ पाकिस्तानी चरमपंथी होते हैं.

इसमें अब 45 शव दफ़न किए जा चुके हैं.

कब्रिस्तान

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पुलिस स्टेशन से चंद कदमों की दूरी पर इस क़ब्रिस्तान को पिछले साल ही तैयार किया गया है. झेलम नदी के किनारे मौजूद क़ब्रिस्तान के एक तरफ़ घनी झाड़ियां हैं.

कुछ क़ब्रों पर पुलिस ने छोटे-छोटे बोर्ड भी लगाए हैं, हालांकि कुछ की लिखाई मिट चुकी है.

बोर्डों पर मुठभेड़ की जगह का नाम लिखा होता है, लेकिन दफ़न होने वाले का नाम नहीं.

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इमेज कैप्शन, कई बोर्डों की लिखाई मिट चुकी है.

दफ़न हुए लोगों के रिकॉर्ड पुलिस स्टेशन में दर्ज होते हैं. पुलिस ने कुछ की तस्वीरें भी रजिस्टर में रखी हैं. इसमें भी किसी का नाम नहीं है, बस एनकाउंटर स्थल, पुलिस स्टेशन, सीरियल नंबर और मामला लिखा जाता है.

'ज़्यादातर शव रात को दफ़नाए जाते हैं'

मुठभेड़ों में मारे जाने वाले इन संदिग्ध चरमपंथियों को ज्यादातर रात को दफ़नाया जाता है. पुलिस और स्थानीय लोगों का कहना है कि दफ़न करने से पहले सभी धार्मिक रस्मों को पूरा किया जाता है.

हमेशा जनाज़ों में शामिल रहने वाले गांव के एक शख्स ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि 'हमें सिर्फ यह पता होता है कि लाश दफ़न करनी है. जब पुलिस बुलाती है तो मैं आ जाता हूं.'

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वह कहते हैं, "पहले जब हम लाशों को देखते थे, दिमाग़ पर ख़ौफ़ छाया रहता था. मगर अब तो यह रोज़ की बात हो गई है."

उन्होने कहा, "यहां दफ़न करने वाले का हम वह सब कुछ करते हैं, जो आम मुसलमान के शव को दफ़नाते वक़्त किया जाता है. हम गांव के चंद लोग और पुलिस वाले साथ मिलकर जनाज़े की नमाज़ पढ़ते हैं. पुलिस हमें पहले ही सूचित कर देती है, जिसके बाद हम कब्र खोदने का काम शुरू कर देते हैं. तब तक पुलिस शव लेकर पहुंच जाती है."

इसी तरह गांव के एक और नागरिक ने बताया कि उन्हें सिर्फ़ इस बात का पता रहता है कि क़ब्र खोदनी है, जनाज़ा पढ़ना है और शव को दफ़नाना है.

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क्या कहती है पुलिस?

पुलिस कहती है कि इस क़ब्रिस्तान को कश्मीर में मारे जाने वाले पाकिस्तानी चरमपंथियों के लिए बनाया गया है, ताकि पाकिस्तान जब चाहे, यहां आकर अपने नागरिकों के शवों पर दावा कर सके.

पुलिस के मुताबिक़ बीते एक साल से कश्मीर के किसी भी कोने में या फिर सीमा पर मारे जाने वाले पाकिस्तानी चरमपंथियों को यहीं पर दफ़न किया गया है.

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पिछले दिनों जब लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर अबू दुजाना की मौत हुई थी, उस समय मुनीर ख़ान ने कहा था कि वह पाकिस्तान के दूतावास को कहेंगे कि दुजाना का मृत शरीर ले जाएं.

कश्मीर ज़ोन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस मुनीर ख़ान ने बीबीसी को बताया, "पाकिस्तान तो मानता ही नहीं है कि उनके नागरिक कश्मीर में कुछ करते हैं. जब भी हम किसी पाकिस्तानी को मुठभेड़ में मारेंगे तो मैं पाकिस्तान को लिखता रहूंगा कि वह अपने नागरिकों के मृत शरीर ले जाए. हमने बारामूला में एक क़ब्रिस्तान पाकिस्तान चरमपंथियों के लिए रखा है. हम उन्हें धार्मिक रस्मों के साथ दफ़न करते हैं. "

कश्मीर ज़ोन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस मुनीर ख़ान

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इमेज कैप्शन, कश्मीर ज़ोन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस मुनीर ख़ान

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान सबकुछ एक तरफ़ रखकर इंसानी बुनियादों पर अपने लोगों को ले जाए. मैं तो ये कहूंगा कि क़ब्रिस्तान में जो शव हैं, पाकिस्तान उन्हें अपना मानने से इनकार कर रहा है. वह चाहे तो दावा कर सकता है."

स्थानीय लोगों ने दिया है नया नाम

इस क़ब्रिस्तान को कुछ स्थानीय लोग हालांकि 'शहीद मज़ार' के नाम से पुकाते हैं.

बीते साल यहां 23 शव दफ़नाए गए थे और 2017 मे अब तक 19 लाशों को दफ़न किया गया है.

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कुछ साल पहले उत्तरी कश्मीर के इलाक़ों में हज़ारों बे निशान क़ब्रें मिलने का मामला सामने आया था. इसके बाद स्टेट ह्यूमन राइट्स कमिशन ने 2,156 बेनामी क़ब्रों का डीएनए करने के लिए कहा था.

मानवाधिकार कार्यकर्ता कश्मीर में सुरक्षाबलों पर बीते 30 सालों में हज़ारों आम कश्मीरियों को ग़ायब करने या फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारने का इल्ज़ाम लगाते रहे हैं.

मगर प्रशासन और सुरक्षाबल इन आरोपों का खंडन करते हैं.

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