कश्मीर के पुलवामा में ग्रेनेड हमला, तीन की मौत, बाल-बाल बचे मंत्री

भारतीय जवान

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    • Author, रियाज़ मसरूर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर से

गुरुवार को भारत प्रशासित कश्मीर के त्राल में एक ग्रेनेड धमाके में तीन लोगों की मौत हो गई और 30 अन्य घायल हो गए. हमले में प्रदेश सरकार के एक मंत्री बाल बाल बच गए हैं.

पुलवामा ज़िले के एक बस स्टैंड पर हुए इस धमाके में अर्धसैनिक बल के सात जवान भी घायल हुए हैं.

स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि छह घायलों को विशेष इलाज के लिए श्रीनगर के एक अस्पताल में शिफ़्ट कर दिया गया है और इनमें से दो लोगों की हालत नाजुक है.

हमले में निशाने पर मंत्री

क्षेत्र के पुलिस प्रमुख एसपी वैद ने बीबीसी को बताया कि यह हमला उस इलाके का दौरा कर रहे एक वीआईपी को निशाना बनाकर किया गया था.

जब यह हमला हुआ तो सत्तारूढ़ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के मंत्री नईम अख़्तर विकास परियोजना का उद्घाटन करने के लिए इस इलाके के दौरे पर थे.

उन्होंने कहा, "इलाके में आज वीआईपी मूवमेंट थी, उन्हें निशाना बना कर यह हमला किया गया." इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वीआईपी को हमले के फ़ौरन बाद सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया.

रो पड़े मंत्री अख़्तर

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मंत्री नईम अख़्तर ने मीडिया से कहा, "मैं इसे ताउम्र नहीं भूल सकूंगा."

उन्होंने बताया कि जैसे ही वो शहर पहुंचे तो उनके दस्ते पर एक ग्रेनेड फेंका गया.

हमले में मृतकों की बातें करते हुए अख़्तर रो पड़े. उन्होंने कहा कि हमलावर न तो कश्मीर के दोस्त थे और न ही इस्लाम के.

त्राल हिजबुल का गढ़

दक्षिण कश्मीर के त्राल को चरमपंथी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का गढ़ माना जाता है. यह संगठन अपने अधिकांश लोग इसी इलाके से भर्ती करता है.

हालांकि अधिकारियों ने हमले के लिए सशस्त्र चरमपंथियों को दोषी ठहराया है, वहीं स्थानीय न्यूज़ एजेंसी को प्राप्त ईमेल के अनुसार हिजबुल मुजाहिदीन ने इस हमले की निंदा की है.

इस ईमेल के मुताबिक हिजबुल मुजाहिदीन ने कहा, "हम नागरिकों पर इस हमले की कड़ी निंदा करते हैं. यह हमला भारतीय एजेंसियों के दिमाग की उपज है जो कश्मीर की स्वतंत्रता आंदोलन को बदनाम करना चाहते हैं."

हमले के बाद, स्थानीय निवासियों ने अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. यहां भारतीय सेना की ओर से "नागरिकों पर गोली और पैलेट गन से हमले" के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया गया.

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि हमले के बाद सेना ने नागरिकों पर गोलीबारी की.

'ऑपरेशन ऑल आउट'

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हालांकि, पुलिस ने हमले के बाद किसी भी बल प्रयोग के इस्तेमाल से इनकार किया है.

2016 में हिज़बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी की एक मुठभेड़ में मौत के बाद से इस क्षेत्र में अलगाववादी गतिविधियों में वृद्धि हुई है.

इस साल भारतीय सेना ने भारतीय शासन से आज़ादी की मांग करने वाले अलगाववादी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ ऑपरेशन शुरू कर रखा है जिसे 'ऑपरेशन ऑल आउट' का कोड नाम दिया गया है.

इसमें अब तक 150 से अधिक चरमपंथी मारे गए हैं.

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