तेजस्वी पर इस्तीफ़े के दबाव के बीच राजद की बैठक

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- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर सीबीआई की कार्रवाई के बाद अब सबकी नज़रें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हैं.
सीबीआई छापेमारी के तीन दिन बीत जाने के बाद भी उनकी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
इन तीन दिनों में इतना ज़रूर हुआ है कि नीतीश भौगोलिक रूप से लालू यादव के क़रीब आ चुके हैं. सात जुलाई को जब छापेमारी हुई तो नीतीश कुमार राजगीर में स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे.
नीतीश रविवार को पटना लौट आए हैं. गौरतलब है कि पटना में नीतीश और लालू यादव के आवास आस-पास है.
नीतीश की चुप्पी

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इस बीच ख़बरों के मुताबिक आज का लोक-संवाद का सरकारी कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया है.
यह कार्यक्रम आम तौर पर हर सोमवार आयोजित होता है और इसके बाद मुख्यमंत्री मीडिया से बातचीत भी करते हैं. माना जा रहा है कि मीडिया के सवालों से बचने के लिए ऐसा किया गया है.
हालांकि ये कोई पहला मौक़ा नहीं कि जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते किसी बड़ी घटना के बाद मीडिया से दूरी बनाई हो.
अपने पिछले कार्यकालों के दौरान नीतीश ने मिड डे मील हादसे सहित कुछ बड़ी घटनाओं पर चंद दिनों तक ख़ामोश रहना ही पसंद किया था. लेकिन इस बार मामला किसी हादसे का नहीं बल्कि राजनीतिक है.
लड़ाई क़ानूनी नहीं राजनीतिक

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नीतीश की चुप्पी के बीच राष्ट्रीय जनता दल के विधायक दल की आज बैठक हो रही है.
माना जा रहा है कि नीतीश इसके इंतज़ार में हैं कि उनके सरकार की बड़ी सहयोगी पार्टी इस बैठक में क्या-क्या फैसला लेती है.
हालांकि राजद पहले ही यह साफ़ कर चुका है कि उनके नेता और सूबे के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इस्तीफा नहीं देंगे.
आज की बैठक के बारे में राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने बताया, "लालू जी सहित विपक्षी दलों के नेताओं को प्रताड़ित करने के राजनीतिक निहितार्थ हैं. आज की बैठक में अपने विधायकों को इससे रुबरू कराएंगे. बैठक का मकसद आने वाले संघर्ष के लिए उनको तैयार करना है. विधायकों को ये बताना है कि ये लड़ाई क़ानूनी नहीं राजनीतिक है."
जदयू ने मंगलवार को एक अहम बैठक बुलाई है. माना जा रहा है कि नीतीश कुमार इस बैठक के बाद ही अपने फैसले के साथ सामने आएंगे.
मांझी ने याद दिलाया अपना इस्तीफ़ा

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इस बीच कल सत्तारुढ़ गठबंधन के घटक दलों की ओर से तो कोई बड़ा बयान नहीं आया लेकिन विपक्षी दलों ने अलग-अलग तरीके से तेजस्वी के इस्तीफ़े के लिए नीतीश पर दबाव बढ़ाया.
2005 में जब नीतीश कुमार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने थे तो तब उनके मंत्रिमंडल सहयोगी के रुप में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने भी शपथ ली थी.
लेकिन शपथ ग्रहण के कुछ ही घंटों बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था क्योंकि उन पर एक घोटाले में शामिल होने के आारोप लगे थे.
अपने इस इस्तीफे के आधार पर मांझी ने नीतीश पर कल निशाना साधते हुए कहा, "नीतीश के लिए नैतिकता और भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टोलरेंस' पीछे छूट गए हैं. वे केवल अपनी कुर्सी बचाने के लिए तेजस्वी के इस्तीफ़े के सवाल पर चुप हैं."
उमा और तेजस्वी का मामला अलग-अलग

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वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद नित्यानंद राय ने बीबीसी से खास बातचीत में कहा, "अगर तेजस्वी इस्तीफ़ा नहीं देते हैं तो भाजपा इसके लिए आंदोलन करेगी."
तेजस्वी के इस्तीफ़े की मांग पर राजद का यह भी तर्क है कि पहले केंद्रीय मंत्री उमा भारती इस्तीफ़ा दें.
गौरतलब है कि इस साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में उमा भारती पर मुक़दमा दर्ज करने का आदेश दिया लेकिन इसके बाद भी ने उन्होंने इस्तीफ़ा देने से इनकार कर दिया था.
उमा भारती के इस्तीफे की मांग पर नित्यानंद राय कहते हैं कि उमा भारती और तेजस्वी का मामला अलग-अलग है.
इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने राजद विधायकों से अपील की है कि वे लालू जी पर दबाव बनाकर तेजस्वी का इस्तीफ़ा लें और किसी दूसरे नेता को उपमुख्यमंत्री बनाएं.
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