बिहार: 12वीं की परीक्षा में किशनगंज के छात्रों ने कैसे किया कमाल?

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    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, पटना से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

बिहार के कला संकाय के इंटरमीडिएट परिणाम में महज 37 फ़ीसदी छात्र ही पास हुए है.

लेकिन मुस्लिम बहुल इलाके किशनगंज में कला संकाय के 63 फ़ीसदी छात्र पास हुए है. पास प्रतिशत के लिहाज से ये पूरे बिहार में सबसे ज़्यादा है.

क्या कहते हैं आंकड़े?

किशनगंज में कुल 7355 छात्रों ने यहां इंटर (कला) की परीक्षा दी थी. इनमें से 4635 छात्र पास हुए. 1336 छात्रों को फर्स्ट डिवीजन मिली है जबकि 3007 छात्र सेंकेंड डिवीजन से पास हुए है.

विज्ञान संकाय की बात करें तो 1553 बच्चों ने परीक्षा दी जिसमें से 996 पास हुए. वहीं, कामर्स की बात करें तो 607 बच्चों में से 548 छात्रों ने सफलता पाई.

आबादी के लिहाज से देखें तो 2011 की जनगणना के मुताबिक किशनगंज की आबादी 1,690,948 है जिसमें से 68 फ़ीसदी आबादी मुस्लिम समाज की है. ये आर्थिक सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर पिछ़ड़ी हुई है.

साक्षरता दर की बात करें तो ये 57 फ़ीसदी है. किशनगंज के लिए ये उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि ये भारत के पिछड़े ज़िलों में से एक है.

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सामाजिक कार्यकर्ता चित्राली बीते चार साल से किशनगंज में लड़कियों की शिक्षा को लेकर ज़िले के दो ब्लाक बहादुरगंज और कोचाधामन में काम कर रही है.

बकौल चित्राली, "बीते कुछ सालों में सरकारी योजनाओं ने किशनगंज पर ध्यान दिया है. साथ ही मुस्लिम समाज में चेतना बढ़ी है कि उनके यहां के बच्चे भी पढ़ें और मुख्यधारा में शामिल हों.".

पटना में विरोध प्रदर्शन

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सिर्फ आर्ट्स ही नहीं बल्कि अन्य संकायों में भी किशनगंज के नतीजे अच्छे रहे है.

किशनगंज में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग इसे उपलब्धि के तौर पर देख रहे है. मारवाड़ी कालेज, किशनगंज में हिन्दी के विभागाध्यक्ष सजल प्रसाद कहते हैं, " हमारे लिए बहुत ख़ुशी की बात है कि इतने बुरे दौर में भी हमनें बहुत अच्छा परफॉर्म किया है."

'किशनगंज बहुत पिछड़ा है, ऐसा करिश्मा कैसे?'

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मोहम्मद अब्दुल हफीज से जब ये सवाल किया गया कि किशनगंज बहुत पिछड़ा इलाका है तो उससे ऐसे करिश्मे की उम्मीद कैसे की जाए.

हफीज़ बहुत ठोस वजह तो नहीं बताते लेकिन आत्मविश्वास से लबरेज होकर कहते हैं, "पिछड़ा है तो क्या उठेगा नहीं. पिछड़ा है तो हालात बदलने की कोशिश भी करेगा और किशनगंज भी कर ही रहा है. वैसे भी पिछड़ा क्या होता है, हमारे देश में तो यूपीएससी टॉपर भी अब पिछड़े समाज से आ रहे हैं."

30 मई को नतीजे घोषित करते बोर्ड के अधिकारी

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बीजेपी ने किशनगंज की सफलता पर उठाए सवाल

बीजेपी नेता सुशील मोदी ने प्रेस नोट जारी करके किशनगंज के पास प्रतिशत को लेकर सवाल उठाए है.

उनके मुताबिक, "सरकार बताए कि बिहार के सबसे पिछड़े ज़िले किशनगंज में इंटर आर्ट्स में 63. 46 प्रतिशत को बगल के अररिया में 24 प्रतिशत छात्र ही क्यों पास हुए?"

बता दें कि इंटर आर्टस में नालंदा का रिज़ल्ट 24 फ़ीसदी, पटना का 34 फ़ीसदी रहा जबकि वैशाली जिले के नतीजे सबसे खराब रहे जहां सिर्फ 11.55 फ़ीसदी बच्चे ही पास हुए.

सुशील कुमार मोदी जो सवाल उठा रहे हैं उसे बिहार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एके पी यादव के तर्क भी ताक़त देते हैं.

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वह कहते हैं, "किशनगंज बहुत पिछड़ा ज़िला है वहां जब इस तरह का रिजल्ट आता है तो उनके दो मायने निकाले जा सकते हैं. पहला तो ये कि या तो वहां एडमिनिस्ट्रेशन ने सख्ती नहीं बरती और नकल हुई. दूसरा ये हो सकता है कि कॉपियों की बारकोडिंग ना हुई हो. अब किशनगंज की कॉपियों की बारकोडिंग हुई है या नहीं, ये बोर्ड बता सकता है."

क्या कहते हैं बिहार बोर्ड के अध्यक्ष?

बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर से जब किशनगंज की परफारमेंस को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने बताया, "अभी तक बोर्ड ने ज़िला स्तर पर रिज़ल्ट की समीक्षा नहीं की है, समीक्षा जब गहन स्तर पर होगी तभी कुछ कह पाना संभव होगा."

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