सहारनपुर जैसी घटना दोहराने की कोई हिम्मत नहीं करेगा- पुलिस प्रमुख

उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक सुलखान सिंह

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    • Author, प्रदीप कुमार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह का दावा है कि सहारनपुर जैसी वारदात दोहराने की अब पूरे राज्य में कोई हिम्मत नहीं कर सकता.

बीते शनिवार को ही सुलखान सिंह ने राज्य के पुलिस मुखिया का पदभार संभाला है.

इसके ठीक दो दिन पहले, पिछले हफ़्ते गुरुवार को सहारनपुर के एसएसपी लव कुमार ने आरोप लगाया था कि स्थानीय बीजेपी सांसद राघव लखनपाल के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने उनके घर पर पत्थरबाज़ी की थी. हालाँकि सांसद ने इन आरोपों का खंडन किया था.

इस घटना के बाद पुलिस के मनोबल पर किसी नकारात्मक असर की बात पर सुलखान सिंह ने बीबीसी से कहा, "पुलिस का काम दूसरों का मनोबल बढ़ाकर रखना है. पुलिस अपनी रक्षा तो कर ही सकती है. उसका काम जनता की रक्षा करना है. सहारनपुर में अब तक 10 लोगों को गिरफ़्तार किए जा चुका है. हम इस मामले में इतनी सख़्त कार्रवाई करेंगे कि कोई इस तरह की घटना दोहराने की हिम्मत नहीं कर सकता."

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पुलिस स्टेशन पर हमला

अभी तक इस मामले में स्थानीय सांसद राघव लखनपाल शर्मा पुलिस की गिरफ़्त से बाहर हैं, हालांकि पुलिस ने उन पर दो एफ़आईआर दर्ज की हैं.

वैसे राज्य में इस तरह का ये कोई अकेला मामला नहीं है. योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य में पुलिस के साथ अलग-अलग हिस्सों में कथित तौर पर भगवा बिग्रेड के साथ झड़प की ख़बरें लगातार आ रही हैं.

पिछले ही सप्ताह आगरा में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की ओर से पुलिस स्टेशन पर हमले का मामला सामने आया था.

सुलखान सिंह ने इस चुनौती के बारे में कहा, "लोग उत्साह और उद्दंडता के नाम पर पुलिस फ़ोर्स से भिड़ जाते हैं. लेकिन पुलिस का काम ही ऐसे लोगों से निपटना है. चाहे वो कोई भी हो, किसी भी पार्टी से जुड़ा हो, किसी भी संगठन से जुड़ा हो. पूरे राज्य की पुलिस व्यवस्था को स्पष्ट निर्देश दे दिया गया है कि गुंडागर्दी करने वालों पर कार्रवाई करनी है."

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सीएम का आदेश स्पष्ट

हालांकि वो भी मानते हैं कि योगी आदित्यनाथ के मौजूदा सरकार में 325 विधायक हैं, ऐसे में इन विधायकों के समर्थकों की उद्दंडता पर काबू पाना राज्य पुलिस विभाग के सामने चुनौती तो है.

लेकिन वो ये भी कहते हैं कि पुलिस सख्ती से हर तरह की उद्दंडता को निपटने में सक्षम है.

सुलखान सिंह ने बताया, "मुख्यमंत्री जी का साफ़ आदेश है कि पूरे प्रदेश में क़ानून व्यवस्था सुचारू ढंग से लागू हो, जो भी इसमें मुश्किल पैदा करे, उस पर किसी दलगत भेदभाव किए बिना कार्रवाई हो."

सुलखान सिंह ये भी कहते हैं कि गोरक्षा के नाम पर या फिर एंटी रोमियो स्क्वॉड अभियान के तहत किसी को भी क़ानून अपने हाथ में लेने की इज़ाजत नहीं दी जाएगी.

उन्होंने ये भी कहा कि कोई भी इस बारे में सूचना पुलिस बल को दे सकता है, लेकिन उसे लोगों को धमकाने, पकड़ने इत्यादि का अधिकार नहीं है.

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पुलिस महानिदेशक

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद पूरे राज्य में ज़ोर-शोर से एंटी स्क्वॉड अभियान शुरू किया गया, हालांकि पुलिस द्वारा वयस्क लोगों को तंग किए जाने की ख़ूब आलोचना भी झेलनी पड़ी है.

सुलखान सिंह ने इस अभियान के बारे में कहा, "ये अभियान यूपी पुलिस का रेगुलर फ़ीचर है. जिस तरह से चोरी और डकैती होने पर गश्त भेजी जाती है, उसी तरह से छेड़खानी रोकने के लिए सादे लिबास में पुलिस की गश्त भेजी जाती रहेगी. ये व्यवस्था चार दिन या चार महीने तक चलाकर बंद नहीं होगी. लेकिन हम गश्त पर जाने वालों को हमेशा निर्देश देकर भेजेंगे कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं करना."

59 साल के सुलखान सिंह ने बीते शनिवार को ही राज्य के पुलिस महानिदेशक का पदभार संभाला है.

वे कहते हैं कि उनकी सबसे बड़ी चुनौती राज्य के लोगों का भरोसा हासिल करने की है, इसके लिए पुलिस व्यवस्था को अपना काम ईमानदारी से करना होगा.

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सोशल मीडिया

सुलखान सिंह की पहचान राज्य के अच्छी छवि वाले पुलिस अधिकारियों में की जाती है. हालांकि उनके पुलिस प्रमुख बनने के वक्त राज्य की पुलिस व्यवस्था अपने भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों की वजह से भी चर्चा में हैं.

सुलखान सिंह से पहले राज्य के पुलिस महानिदेशक रहे जावीद अहमद ने 18 अप्रैल को एक ट्वीट करके बताया था, "संदिग्ध आपराधिक लिंक वाले 625 पुलिस अधिकारियों का अलग-अलग जगहों पर तबादला कर दिया गया है. ऐसे और पुलिसवालों की पहचान की जा रही है."

जावीद अहमद के इस ट्वीट के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर बिफरते हुए कहा था कि आपराधिक लिंक वाले अधिकारियों का केवल तबादला क्यों किया जा रहा है.

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आपराधिक कार्रवाई

इस पूरे मामले पर राज्य के नए पुलिस प्रमुख सुलखान सिंह कहते हैं, "मैंने वो लिस्ट अभी तक नहीं देखी है. अगर इन पुलिस वालों के ख़िलाफ़ सबूत होंगे तो उनके ख़िलाफ़ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी. अगर सबूत का आधार संदेह पैदा करने वाले हुआ तो उनका तबादला किया जा सकता है, विभागीय कार्रवाई हो सकती है, ताकि वे पुलिस विभाग को कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाएँ."

सुलखान सिंह अपनी शीर्ष पांच प्राथमिकताओं के बारे में कहते हैं, "जनता के हित वाली पुलिस व्यवस्था, सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना, यातायात की व्यवस्था को बेहतर बनाना, सांप्रदायिक सौहार्द्र बनाए रखना और आतंकवाद पर अंकुश पाना. ये हमारी प्राथमिकताएं हैं."

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