मैंने अपने दोनों बच्चों की आंखों में ख़ौफ़ देखा है: एसएसपी की पत्नी

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- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसक झड़पों को लेकर अब स्थानीय सांसद और वरीय पुलिस अधीक्षक आमने-सामने आ गए हैं.
पुलिस ने बीजेपी सांसद राघव लखनपाल और कई भाजपा विधायकों पर एसएसपी के घर तोड़फोड़ करने के आरोप में मुक़दमा दर्ज किया है.
वहीं सांसद राघव लखनपाल एसएसपी लव कुमार पर माहौल ख़राब करने और हिंसा के दौरान मौक़े से फ़रार होने के आरोप लगा रहे हैं.

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मीडिया में एसएसपी की पत्नी शक्ति कुमार का एक बयान आया है जिसमें उन्होंने कहा है, "सबसे ज्यादा सुरक्षित मानी जाने वाली एसएसपी कोठी पर ढाई घंटे तक जो मंजर मैंने देखा, उससे सहम गई हूं. मैंने अपने छह व आठ साल के बच्चों की आंखों में ख़ौफ़ देखा है."
आरोप है कि गुरुवार को अंबेडकर शोभा यात्रा रोके जाने का विरोध करने के लिए सांसद राघव लखनपाल के नेतृत्व में सैकड़ों लोग एसएसपी के घर पहुंचे और वहां तोड़फोड़ की.
गुरुवार को निकाली जा रही शोभायात्रा पर पत्थरबाज़ी हुई थी जिसके बाद हुई हिंसा में दुकानों को तोड़फोड़ दिया था. पुलिस ने बिना अनुमति निकाली जा रही शोभायात्रा को रोक दिया था.

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बीबीसी से बात करते हुए लव कुमार ने कहा, "घर में चार सौ पांच सौ लोग घुस जाएंगे तो बच्चों का डरना स्वाभाविक है."
लव कुमार ने कहा, "मैं उस समय घर पर नहीं था. वो लोग चार-पांच घंटे तक रहे होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है कि वो चार-पांच घंटों तक तोड़फोड़ ही करते रहे हों."
उत्तर प्रदेश आईपीएस एसोसिएशन ने इस घटना की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से समय भी मांगा है.
वहीं पुलिस ने गुरुवार को हुई झड़पों के सिलसिले में कई लोगों को हिरासत में लिया है. लव कुमार का कहना है कि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि गिरफ़्तार लोग किसी पार्टी के कार्यकर्ता हैं या नहीं.
वहीं बीबीसी से बात करते हुए सांसद राघव लखनपाल ने कहा, "पुलिस ने ग़लत एफ़आईआर दर्ज की है. असल में एक शांतिपूर्ण शोभायात्रा पर एक हिंसक भीड़ ने हमला किया है. कार्रवाई उन लोगों पर होनी चाहिए थी."
सांसद ने कहा, "एसएसपी घटनाक्रम से भाग खड़े हुए और अब मनगढ़ंत कहानी सुना रहे हैं. वो अपनी नाकामी को, अपने परिवार को कवच के रूप में इस्तेमाल करके ढक रहे हैं. हमने उनके घर पर कोई हमला नहीं किया था."
पुलिस ने गुरुवार को निकाली गई शोभायात्रा के लिए अनुमति नहीं दी थी. जब सांसद से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मुझे आयोजकों ने शोभायात्रा में आमंत्रित किया था. जब मैं वहां पहुंचा तब ही पता चला कि प्रशासन ने शोभायात्रा के लिए अनुमति नहीं दी है."

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उन्होंने कहा, "या तो ज़िलाधिकारी शफ़ाक़त कमाल बाबा साहेब आंबेडकर में आस्था नहीं रखते होंगे. निश्चित रूप से एसएसपी तो रखते ही नहीं है. नहीं तो वो नेतागिरी कम करते अपनी ड्यूटी ज़्यादा करते."
सांसद का आरोप है कि इस इलाक़े में कश्मीर की तरह पत्थरबाज़ पनप रहे हैं और पुलिस कार्रवाई नहीं कर पा रही है.
जब सांसद से पूछा गया कि क्या ऐसी घटनाओं से सरकार पर सवाल नहीं उठते हैं तो उन्होंने कहा, "एसएसपी मेरी आंखों के सामने अपने सुरक्षाबलों को लेकर मौक़े से भागे हैं. एसएसपी अपनी ड्यूटी निभाने में नाकाम रहे हैं. मैं सांसद के तौर पर जनता का मुद्दा उठा रहा था."
सांसद का कहना है कि पुलिस अधीक्षक ने अब इसे व्यक्तिगत मसला बना लिया है. सहारनपुर की इस घटना से उत्तर प्रदेश में लचर क़ानून व्यवस्था का सवाल एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है.












