'पुलिस न आती तो वो हमें ज़िंदा जलाने वाले थे..'

- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
राजस्थान में कथित गौरक्षकों के हमले में बुरी तरह घायल हुए एक पीड़ित ने आरोप लगाया है कि मारपीट के बाद भीड़ उन्हें जलाने जा रही थी.
अलवर में हुई इस घटना में एक व्यक्ति पहलू खां की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है.
ये लोग जयपुर के पास नगर निगम के सरकारी मेले से दुधारू गायें ख़रीद कर हरियाणा में मेवात के नूंह आ रहे थे.
लेकिन दिल्ली-जयपुर हाईवे पर बहरोड के पास कुछ मोटरसाइकिल सवारों ने उन्हें रोका और कथित तौर पर गाय की तस्करी के आरोप लगाकर पीटने लगे.
बेहरोर पुलिस थाना इंचार्ज रमेश चंद ने बीबीसी को बताया कि बुधवार शाम को तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और बाकी लोगों की तलाश जारी है.
इनके ख़िलाफ़ गाय तस्करी का मामला दर्ज किया गया है.
इस हमले में बाल बाल बचे अज़मत ने बीबीसी फ़ेसबुक लाईव में अपनी आप बीती बताई.
अज़मत की कहानी उन्हीं की ज़ुबानी
जयपुर के पास नगर निगम के एक सरकारी मेले से हम लोग दुधारू गायें लेकर आ रहे थे.
बहरोड के पास हमें चार पांच मोटरसाइकिलों पर सवार लोगों ने गाड़ी को रोका और उसके बाद बिना किसी पूछताछ के मारपीट शुरू कर दी.
उस समय हम अपनी गाड़ी में ड्राईवर के बगल में बैठे थे.
मैं सबसे किनारे था और बीच में पहलू खां बैठे थे. जिस समय यह घटना घटी मैं सो रहा था.
'कागज़ फाड़ दिए, पैसे छीने'
सबसे पहले मुझे खींच कर उतारा गया. जब तक कुछ समझ पाता, उन्होंने हमारे सारे पैसे छीन लिए.

हमने गाय की ख़रीद के सरकारी काग़ज़ात दिखाए लेकिन उन्होंने कुछ नहीं सुना, बल्कि उन्हें फाड़कर फेंक दिया.
ये काग़ज हमने नगर निगम में हज़ार हज़ार रुपये देकर बनवाए थे. इसका ब्योरा ऑनलाइन पर भी उपलब्ध है.
इसके बाद उन्होंने मारपीट शुरू कर दी. मेरे सामने पहलू खां की बुरी तरह से पिटाई होने लगी.
वो लोग लात, घूंसे, हॉकी, पत्थर, बेल्ट से मार रहे थे.
मेरे सर में चोट आई है और कमर की हड्डी में फ्रैक्चर हुआ है.
लगभग आधे घंटे तक हमारे साथ मारपीट होती रही.
'ड्राईवर अर्जुन को छुआ तक नहीं'
लेकिन इन सबके बीच ड्राईवर अर्जुन को उन लोगों ने उतरते ही भगा दिया. उसे एक थप्पड़ भी नहीं मारा.

इस मारपीट में मैं एक तरफ गिरा और पहलू खां दूसरी तरफ गिरे.
मुझे इतना मारा कि मैं कुछ देर के बाद बेहोश हो गया.
इसी दौरान दूसरी गाड़ी पर तीन बंदे और आ गये. उन्होंने भी मारना शुरू किया. उस समय मैं पहलू खां से 20 फुट दूर पड़ा हुआ था.
जहां तक मुझे लगता है - ये पब्लिक थी, बदमाश लोग थे. मुझे इतना सुनाई दे रहा था कि ये लोग डीज़ल निकालकर हम लोगों को जलाने की बात कर रहे थे.
'जलाकर मारने वाले थे'
अगर पुलिस न आई होती तो वो लोग हमें जला कर मार डालते.
जब मुझे होश आया तो मैं अस्पताल में था और रात के एक या दो बजे होंगे.
पुलिस ने हमें पास के एक निजी कैलाश अस्पताल में भर्ती करा दिया था. अस्पताल के लोग भी ऐसे ही थे, वहां कोई सुनने वाला नहीं था.

जहां बेड का 35 रुपये किराया होता है वहां पांच हज़ार लिया गया. यहां दो दिन तक इलाज के बाद पहलू खां की मौत हो गई. बाद में मुझे डिस्चार्ज कर दिया गया.
'मुसलमान होने की वजह से पीटा'
इस घटना में पहलू खां के बेटे भी गाय लेकर आ रहे थे और घटना के समय वो भी पहुंचे थे.
हम कभी मेले नहीं गए थे. हमारा डेयरी का काम है. हमारी गायें बिक गई थीं इसलिए हम लेने जा रहे थे.
प्रशासन से अभी तक इस बारे में कोई पूछताछ करने नहीं आई. जो कुछ हुआ वो हाईवे पर ही हुआ.
पहलू खां के गुजर जाने के बाद पुलिस वालों ने हमारी काफी मदद की.
हम तो गए थे अपने काम से, लेकिन हमारे साथ बुरा हुआ.
उन्होंने मुसलमान होने की वजह से हमें पीटा.
(पुलिस के मुताबिक हमलावर स्थानीय लोग थे जिनकी पहचान वीडियो साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है. अलवर पुलिस के मुताबिक जयपुर से गायें लेकर हरियाणा के मेवात के नूहं जा रहे लोगों ने गायों की ख़रीद के दस्तावेज भी दिखाए थे लेकिन उत्तेजित भीड़ ने हमला कर दिया. बीबीसी से बातचीत में डीएसपी परमाल गुर्जर ने बताया, "हमले और मौत का मामला दर्ज किया गया है . हमलावर गौरक्षा समूहों से जुड़े भी हो सकते हैं.")
अज़मत के चचाजात भाई

रमज़ान में दूध की ज़रूरत होती है तो दूध के लिए ये लोग गाय लेने गए थे.
घटना के बारे में हमें रात के नौ बजे पता चला. मैं नहीं जा पाया लेकिन बाकी लोग वहां गए.
लेकिन बेहरोड के कैलाश अस्पताल में मौजूद लोगों ने घायलों से मिलने नहीं दिया और कहा कि चले जाओ नहीं तो तुम भी पिट जाओगे.
जब दूसरे दिन थाने गए तो थानेदार ने भी नहीं मिलाया.
अज़मत के भाई यूसुफ़

जब रात नौ बजे लोग अस्पताल पहुंचे तो वहां मौजूद लोगों ने कहा कि ये तो वही गाय वाले लोग आ गए.
जब अस्पताल में डाक्टर से मुलाक़ात की तो वो पैसे मांगने लगे.
इलाज में भी लापरवाही हुई है. वो आदमी की मौत लापरवाही की वजह से हुई है.
जहां कैलाश अस्पताल है, वहां से घटना स्थल महज पांच-10 मिनट की दूरी पर है, वहां ट्रैफिक पुलिस भी थी.
लेकिन पुलिस घटना के 15-20 मिनट बाद आई, अगर पुलिस न आई होती तो वो लोग इन्हें जलाने वाले थे.
यहां इलाज में कोताही बरती गई, अगर जयपुर में सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया होता तो बेहतर और सस्ता इलाज होता.
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