यूपी सीएम: क्या बीजेपी को है 'शुभ मुहूर्त' का इंतज़ार?

इमेज स्रोत, samiratmaj mishra
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
विधानसभा चुनाव के परिणाम आने और बड़ी जीत हासिल करने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के लिए मुख्यमंत्री का चेहरा तय नहीं कर पा रही है.
ये स्थिति तब है जब कहा जा रहा है कि फ़ैसला पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की इच्छा पर निर्भर होगा.
पांच दिन बीत जाने के बाद पार्टी सिर्फ़ ये तय कर पाई है कि 18 मार्च को विधायक दल की बैठक होगी.

इमेज स्रोत, samiratmaj mishra
हालांकि पहले ये बैठक 16 तारीख को ही होने वाली थी लेकिन दिल्ली में कई बैठकों के बावजूद मुख्यमंत्री को लेकर जब सहमति नहीं बन पाई तो इसे 18 तारीख तक के लिए टाल दिया गया.
रहस्य कायम
विधायक दल की बैठक कब होगी, ये तो तय कर लिया गया है लेकिन मुख्यमंत्री के नाम पर रहस्य कायम है.
होली के बाद बुधवार और गुरुवार को बीजेपी के लखनऊ दफ़्तर के बाहर कार्यकर्ताओं और नेताओं की लगी भीड़ सिर्फ़ इसी बात पर चर्चा करती रही कि राज्य की कमान पार्टी किसे सौंपती है. जो नाम हवा में तैर रहे हैं वो इस बारे में बात नहीं करना चाहते.

इमेज स्रोत, samiratmaj mishra
बुंदेलखंड
बीजेपी दफ़्तर के बाहर बुंदेलखंड से आए कुछ लोग कहने लगे, "बुंदेलखंड से बीजेपी को पहली बार इतनी बड़ी जीत हासिल हुई है, इसलिए बुंदेलखंड से आने वाले स्वतंत्रदेव सिंह को मुख्यमंत्री बनाना चाहिए."
वहीं केशव प्रसाद मौर्य, मनोज सिन्हा, राजनाथ सिंह, श्रीकांत शर्मा जैसे नामों को लेकर चर्चाओं का बाज़ार लगातार गर्म है.

इमेज स्रोत, samiratmaj mishra
दिलचस्प बात ये भी है कि गुरुवार को पार्टी के एक-दो नेताओं को छोड़कर राज्य स्तर का भी कोई नेता पार्टी कार्यालय में नहीं मिला.
सीएम कौन
पूछने पर पार्टी के एक नेता ने ही मज़ाकिया लहज़े में कहा, "इसीलिए कोई नहीं आया होगा कि इसी एक सवाल का वो क्या जवाब दें कि मुख्यमंत्री कौन बन रहा है?"
दरअसल, ये सवाल न सिर्फ़ पार्टी कार्यकर्ता और नेता पूछ रहे हैं बल्कि पत्रकार भी पूछ रहे हैं. पार्टी के कई प्रवक्ताओं के फ़ोन भी लगातार बंद मिल रहे हैं.

इमेज स्रोत, samiratmaj mishra
वहीं एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर ये कहा कि होली के आठ दिन बाद तक कोई भी शुभ काम नहीं होना चाहिए.
शपथ ग्रहण
नेता का कहना था कि विधायक दल की बैठक भले ही 18 तारीख को हो रही है और हो सकता है कि मुख्यमंत्री का फ़ैसला भी हो जाए लेकिन शपथ ग्रहण 21 तारीख के बाद ही होगा.
ये पूछने पर कि गोवा और मणिपुर में तो पार्टी ने मुख्यमंत्री तय करके शपथ ग्रहण भी हो गया, एक कार्यकर्ता का कहना था, "वहां विधायकों का इंतज़ाम करना था, यहां तो प्रचंड बहुमत है, जब चाहेंगे तब शपथ ग्रहण हो जाएगा."
लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मिश्र कहते हैं, "मसला सिर्फ़ मुख्यमंत्री तय करने का ही नहीं है बल्कि यूपी की बड़ी जीत का जश्न भी बीजेपी उसी तरह मनाना चाहती है. इसीलिए वो अन्य राज्यों के मंत्रिमंडल गठन को निपटाकर उत्तर प्रदेश पर ध्यान देगी. ज़ाहिर है, यहां भव्य शपथ ग्रहण होगा और पार्टी चाहेगी कि उसकी चर्चा भी जमकर हो, इसलिए पूरा समय लिया जा रहा है."
सुभाष मिश्र भी इस बात से इनकार नहीं करते कि 'शुभ मूहूर्त' भी देरी की वजह हो सकता है.
बहरहाल, अब सबकी निग़ाहें 18 तारीख पर लगी हैं कि शायद विधायक दल की बैठक के बाद ये पता चल सके कि उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन होगा?













