एक मज़ाक के लिए मुझे फांसी पर मत लटकाओ: रणदीप हुड्डा

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करगिल युद्ध में मारे गए एक सैनिक की बेटी गुरमेहर कौर के एक पुराने वीडियो की तर्ज पर भारत के पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने 26 फ़रवरी को एक ट्वीट किया था.
इस ट्वीट को लेकर सहवाग की काफी आलोचना हो रही है. सहवाग के इस ट्वीट पर बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा ने प्रतिक्रिया में कुछ स्माइली पोस्ट की थी.
इस स्माइली के कारण हुड्डा को भी लोगों ने घेरा. कई लोगों का मानना है कि हुड्डा की यह स्माइली गुरमेहर कौर की ट्रोलिंग करने वालों के पक्ष में है.
पिछले हफ्ते रामजस कॉलेज में एबीवीपी और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इसे लेकर एबीवीपी की आक्रामकता पर लोगों ने सवाल खड़े किए. इसी दौरान गुरमेहर कौर सामने आईं और उन्होंने कहा, ''मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा हूं. मैं एबीवीपी से नहीं डरती हूं. मैं अकेली नहीं हूं. भारत के सभी छात्र मेरे साथ हैं.''

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एक तबके को गुरमेहर का यह क़दम पसंद नहीं आया और लोगों ने ऑनलाइन ट्रोलिंग शुरू कर दी. ट्रोल करने वालों ने सहवाग और हुड्डा के ट्वीट का भी खूब इस्तेमाल किया. अब हुड्डा ने अपने ट्वीट को लेकर फ़ेसबुक पर सफ़ाई में एक पोस्ट लिखी है. हुड्डा ने लिखा है-
हंसने के लिए मुझे लटकाओ मत. वीरू ने एक जोक साझा किया था और मैं स्वीकार करता हूं कि मुझे उस जोक पर हंसी आई थी. वह बहुत मज़ाकिया हैं और यह उन कई चीज़ों में से एक था जिसने मुझे हंसने पर मजबूर किया. बस इतना ही था!!
लेकिन अब मैं हैरान हूं कि मुझे एक युवती के ख़िलाफ़ नफ़रत भड़काने के लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है. वह लड़की भी ऐसा ही मानती है. उसने यह बात कही थी और वह खुलकर सामने आई थी. ऐसे में उसे अपने ख़िलाफ़ आवाज़ भी धैर्य से सुनने का साहस दिखाना चाहिए था.

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यदि आप किसी पर उंगली उठाते हैं (इस मामले में मैं) और उस पर आने वाली प्रतिक्रियाओं के लिए किसी को जिम्मेदार ठहराते हैं तो यह सही नहीं है. मैं बिल्कुल उस लड़की के ख़िलाफ़ नहीं हूं.
मैं मजबूती के साथ इस बात को मानता हूं कि हिंसा ग़लत है. महिला को धमकी देना एक जघन्य अपराध है. ऐसा करने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए.
मैं उस लड़की के वीडियो को पसंद करता हूं जिसमें उसने युद्धरत देशों के बीच शांति की अपील की है. यह सराहने लायक है, लेकिन टकराव का बिन्दु यह नहीं है. उसे अधिकार है कि वह जो सोचती है उसके आधार पर किसी भी चीज़ का विरोध करे.
दूसरी तरफ़ वीरू को भी अधिकार है कि वह मज़ाक उड़ाएं. हम एक लोकतंत्र में रहते हैं और हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हक़ हासिल है. हम पर बदमाशी का आरोप लगाना और उस लड़की को ट्रोल करना ग़लत है.

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सहवाग के जोक में उस लड़की को टैग नहीं किया गया था. वह हमारी हंसी में शामिल नहीं थी लेकिन कुछ पत्रकारों ने अन्य लोगों के साथ हमलोगों के ऊपर उंगली उठाना शुरू कर दिया.
उन्होंने अपने एजेंडे के हिसाब से हमें घेरना शुरू कर दिया. यह बदमाशी है. यदि आप सोचते हैं आप किसी को सता सकते हैं तो आपको दूसरी तरफ़ से भी सामना करना होगा.
डीयू में हुई हिंसा को युद्ध के ख़िलाफ़ उसकी अपील से कैसे जोड़ा गया? वीरू के जोक को हिंसा के समर्थन में कैसे जोड़ दिया गया?
मुद्दा यह है कि यह कोई मुद्दा ही नहीं है, लेकिन इस मामले में चीज़ों को जानबूझकर घालमेल किया जा रहा है.

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लड़की की आवाज़ बहुत अहम है लेकिन सभी नागरिकों की आवाज़ से ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं है. ऐसा नहीं है कि वह सभी शहीदों और उनके बच्चों का प्रतिनिधित्व करती है.
यह उसकी निजी राय थी और उसी रूप में लिया जाना चाहिए. मेरी निजी राय है कि लोगों को युवाओं के कंधे पर बंदूक रखकर नहीं दागना चाहिए. छात्रों को पढ़ना चाहिए, बहस करनी चाहिए और उन्हें एक-दूसरे से सीखना चाहिए.
वे हमारे देश के भविष्य हैं और मैं अपने भविष्य को लेकर दुखी नहीं हूं क्योंकि हमलोगों के चारों तरफ़ ऐसे साहसिक और खुलकर बोलने वाले लोग हैं.
एक शहीद की बेटी के प्रति असंवेदनशीलता को लेकर मैं आप सबसे कहना चाहता हूं कि मेरे 6 दोस्तों ने देश के लिए अपनी जान दे दी. इनके साथ मेरे और कई लोग भी हैं. मेरे राज्य के हर गांव में शहीद हैं.
हां, युद्ध ग़लत है, लेकिन इसकी शुरुआत हम नहीं करते हैं. हम अपनी सीमा की रक्षा करने से पीछे नहीं हट सकते चाहे इसके लिए हमें जान ही गंवानी पड़े. हम आख़िर इससे कैसे निपट सकते हैं? हंसी और मज़ाक से? अब इस मुद्दे को मैं यहीं ख़त्म करना चाहता हूं.
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